Noida News: लोटस विला सोसाइटी में कई घरेलू सहायिकाओं ने काम छोड़ा
Noida News: ग्रेटर नोएडा की लोटस विला सोसाइटी में लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक के विरोध में घरेलू सहायिकाओं ने काम पर आना बंद कर दिया है। तीन सहायिकाएं और एक डिलीवरी बॉय कुत्तों के हमलों में घायल हुए हैं। सोसाइटी के निवासी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं।

Noida News: ग्रेटर नोएडा, रूपल राठी। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित लोटस विला सोसाइटी में लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक के विरोध में सोमवार से बड़ी संख्या में घरेलू सहायिकाओं ने काम पर आना बंद कर दिया। उनका कहना है कि जब तक परिसर में लावारिस कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगी। इसके चलते सोसाइटी के करीब 50 प्रतिशत घरों में घरेलू कामकाज प्रभावित रहा। लोगों के बताया कि पिछले एक सप्ताह में सोसाइटी में तीन घरेलू सहायिकाओं और एक डिलीवरी बॉय को लावारिस कुत्तों ने काट लिया। लगातार हो रही इन घटनाओं से नाराज घरेलू सहायिकाओं ने रविवार को मुख्य गेट पर प्रदर्शन भी किया था और चेतावनी दी थी कि यदि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो वे काम बंद कर देंगी। सोमवार को इसका असर साफ दिखाई दिया और बड़ी संख्या में घरेलू सहायिकाएं काम पर नहीं पहुंचीं। घरेलू सहायिकाओं के नहीं आने से कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह दफ्तर जाने वाले लोगों को घर के काम अधूरे छोड़ने पड़े, जबकि शाम को लौटकर उन्हें स्वयं सफाई और अन्य घरेलू कार्य करने पड़े। कई परिवारों में बच्चों का टिफिन भी समय पर तैयार नहीं हो सका, जिससे उन्हें बिना भोजन के स्कूल जाना पड़ा.
इन स्थानों पर अधिक है कुत्तों का आतंक
लोगों का आरोप है कि सोसाइटी के मुख्य गेट और मंदिर के आसपास लावारिस कुत्तों का सबसे अधिक जमावड़ा रहता है। यहीं पर कुत्तों के काटने की अधिकांश घटनाएं होती हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों को अकेले स्कूल भेजने या पार्क में खेलने के लिए भेजने में भी डर लगता है, कई बार कुत्ते स्कूल से आते समय उन पर हमला कर चुके हैं। लावारिस कुत्तों के आतंक के कारण सोसाइटी के 500 से अधिक परिवार भय के माहौल में रहने को मजबूर हैं। उन्होंने प्राधिकरण और संबंधित विभाग से जल्द कार्रवाई कर समस्या का समाधान कराने की मांग की है.
लावारिस कुत्तों के आतंक की वजह से सोसाइटी में रहने वाले लोग डर के साये में हैं
- लावारिस कुत्तों के आतंक की वजह से सोसाइटी में रहने वाले लोग डर के साये में हैं। काम करने वाले कर्मचारी भी आने से बच रहे हैं और कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
दिनेश कुमार, निवासी
- हमारे घर की घरेलू सहायिका पिछले सात दिनों से कुत्तों के डर के कारण काम पर नहीं आ रही है। इससे रोजमर्रा के सभी घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन अभी तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रशांत श्रीवास्तव, resident
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