
भागवत कथा का शुभारंभ
नोएडा में भारतीय विकास परिषद के तत्वाधान में श्रीमदभागवत कथा का शुभारंभ हुआ। विख्यात कथा वाचक आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि यह कथा भक्ति, ज्ञान और त्याग की शिक्षा देती है। उन्होंने भागवत और गीता के अंतर को भी स्पष्ट किया। कथा के दौरान कई भक्तगण उपस्थित रहे।
नोएडा। भारतीय विकास परिषद के तत्वाधान में सेक्टर-19 के मैदान में श्रीमदभागवत कथा का बुधवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। वृंदावन से पधारे विख्यात कथा वाचक आचार्य मृदुल कृष्ण गोस्वामी महाराज ने कथा के दौरान कहा कि नोएडा आज से वृंदावन धाम बन गया हैं और आने वाले सात दिनों तक यहां भक्ति रस की धारा प्रवाहित होगी, उन्होने कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत भगवान कृष्ण का ही वांग्मय स्वरूप हैं जो भक्ति, ज्ञान और त्याग की शिक्षा देती हैं, आचार्य ने भागवत शब्द की व्याख्या भी की। श्रीमद्भागवत और श्रीमद् गीता के अंतर की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि दोनों में बहुत अंतर है।
श्रीमद्भागवत स्वयं साक्षात् श्रीकृष्ण भगवान हैं तथा श्रीमद् गीता भगवान श्री कृष्ण के श्रीमुख से निकली हुई उनकी वाणी है। श्रीमद् गीता योग शास्त्र, रामायण प्रयोग शास्त्र है तथा श्रीमद् भागवत वियोग शास्त्र है। जिसने संसार में जन्म लिया, उसकी मृत्यु निश्चित है। परंतु श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण मात्र से प्राणी इस संसार रूपी भवसागर से तर जाता है और संसार में आवागमन अर्थात जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है। भागवत ऐसा ग्रंथ है जिसमें रस ही रस, इसमें कहीं भी गुठली का तो नामोनिशान ही नहीं है। महाराज श्री ने कहा कि श्री बिहारी जी महाराज को केवल दो चीजें अच्छी लगती हैं, एक तो उनको चंदन और दूसरा वंदन। जो भी भगवान को को चंदन और वंदन प्रदान करते हैं उनके जीवन के समस्त बंधन कट जाते हैं कथा में अध्यक्ष देवेंद्र गंगल, मुख्य यजमान सुशीला गोयल, वेद प्रकाश गोयल, विनय गोयल, पंकज जिंदल, संजय बाली, अल्पेश गर्ग, के.के बंसल, राम रतन शर्मा, सौरभ अग्रवाल, प्रताप मेहता, राकेश कटयाल, राजेश बंसल, राजीव गर्ग, के.के बंसल एवं काफी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।

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