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अखलाक मामले में केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग

अखलाक मामले में केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग

संक्षेप:

बिसाहड़ा कांड में गुरुवार को अदालत में वादी पक्ष की गवाही नहीं हो सकी। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने केस ट्रांसफर के लिए जिला जज को प्रार्थनापत्र दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 23 जनवरी निर्धारित की। माकपा नेत्री वृंदा करात ने आरोपियों और सरकार की जुगलबंदी पर सवाल उठाए।

Jan 08, 2026 09:26 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नोएडा
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बिसाहड़ा कांड ग्रेटर नोएडा, संवाददाता। अखलाक मामले में गुरुवार को अदालत में वादी पक्ष की गवाही नहीं हो सकी। अदालत में गवाही होने से पहले आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने अवगत कराया की केस ट्रांसफर के लिए जिला जज के यहां प्रार्थनापत्र दिया गया है। इसके लिए अधिवक्ता ने अदालत से कुछ दिन का समय मांगा। अदालत ने सुनवाई के लिए 23 जनवरी की तारीख निर्धारित की है। दादरी के बिसाहड़ा गांव में 28 सितंबर 2015 की रात गो हत्या की सूचना पर अखलाक की पीटकर हत्या कर दी गई थी। उसके बेटे दानिश को पीटकर अधमरा कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

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सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं। अखलाक पक्ष के अधिवक्ता युसूफ सैफी ने बताया कि मामले में गुरुवार को कोर्ट में इकरामन की गवाही होनी थी। अदालत में जैसे ही केस को लेकर सुनवाई शुरू हुई आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि उन्होंने इस केस की सुनवाई के लिए कोर्ट ट्रांसफर के लिए जिला जज के यहां एक प्रार्थनापत्र दिया है। इसके लिए उन्हें थोड़ा समय दिया जाए। इसके साथ ही सरकार की केस वापसी की अर्जी निरस्त होने को लेकर हाईकोर्ट में अपील की गई है। अदालत ने आरोपी पक्ष के अधिवक्ता की गुजारिश पर सुनवाई के लिए अगली तारीख निर्धारित की। अधिवक्ता ने बताया कि इस केस में अब 23 जनवरी को सुनवाई होगी। आरोपियों और सत्ता पक्ष की जुगलबंदी देखने को मिली : वृंदा करात अखलाक मामले में माकपा नेत्री कामरेड वृंदा करात गुरुवार को जिला न्यायालय पहुंचीं। माकपा नेत्री का कहना है कि इस मामले में आरोपियों और सरकार की जुगलबंदी देखने को मिल रही है। यह न्याय का मजाक है। सरकार को पीड़ित पक्ष के साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन यहां आरोपियों का साथ दिया जा रहा है।