पकड़ा गया नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट हिंसा मामले का मास्टरमाइंड, तमिलनाडु से गिरफ्तार
नोएडा में वर्कर्स के हिंसक प्रदर्शन मामले में उत्तर प्रदेश की एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता को दबोच लिया है। पुलिस ने उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है।

नोएडा में वर्कर्स के हिंसक प्रदर्शन मामले में उत्तर प्रदेश की एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद को दबोच लिया है। पुलिस ने उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। उस पर एक लाख रुपए का इनाम था। जानकारीके मुताबिक गौतमबुद्धनगर में प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ गतिविधियों और हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के पीछे आदित्य आनंद का हाथ पाया गया था। इस दौरान उसकी भूमिका मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामनेआई। घटना के संबंध में थाना फेस-2 पर इसके खिलाफ केस रजिस्टर किया गया था। घटना के बाद से ही आरोपी लगातार फरार चल रहा था।
कई राज्यों में दबिश
आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने कई टीमें गठित की थी जो कई राज्यों में दबिश दे रही थीं। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और अन्य तकनीकी माध्यमों के जरिए पता चला कि वह तमिलनाडु में छिपकर बैठा है जिसमें बाद उसे तिरुचापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया।
इससे पहले पुलिस ने बताया था कि नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच में कई खुलासे हुए है। जांच में पता चला है कि हिंसा फैलाने के लिए कथित तौर पर 80 से अधिक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर सुनियोजित तैयारी की गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में पता चला है कि हिंसा भड़काने के लिए तीन दिन से कई स्तरों पर तैयारी हो रही थी। सोशल मीडिया से लेकर औद्योगिक इलाकों में घूमते हुए कुछ लोगों ने पूरा माहौल तैयार किया। इसके पीछे तीन संगठनों के नाम सामने आए हैं, जिनमें 'मजदूर बिगुल दस्ता' प्रमुख है। पुलिस ने इस संगठन के प्रमुख रूपेश राय को गिरफ्तार करने के साथ ही श्रमिकों को भड़काने वाले 18 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था।
80 से ज्यादा व्हाट्सऐप ग्रुप पर हिंसा भड़काने वाले मैसेज
पुलिस उपायुक्त शैव्या गोयल ने बताया कि श्रमिकों के प्रदर्शन से पहले तीन दिन के भीतर 80 से ज्यादा व्हाट्सऐप ग्रुप तैयार किए गए, जिनमें से करीब 50 ग्रुप की जानकारी पुलिस को मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इनमें से 17 ग्रुप का सत्यापन किया गया है, जिनमें हिंसा भड़काने वाले मैसेज साझा किए गए थे।
गोयल के अनुसार, इन ग्रुप में श्रमिकों की वास्तविक मांगों जैसे वेतन वृद्धि या कार्य स्थिति में सुधार को लेकर कोई चर्चा नहीं थी। इसके बजाय कर्मचारियों को उकसाने, भीड़ जुटाने और कारखानों में तोड़फोड़ करने जैसी बातें लिखी जा रही थीं। पुलिस ने कहा कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था और जांच के बाद 'मजदूर बिगुल दस्ता' संगठन से जुड़े रूपेश राय समेत 18 लोगों की गिरफ्तारी हुई।
तीन समूहों की भूमिका
नोएडा की पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने कहा कि श्रमिकों के प्रदर्शन को हिंसक बनाने में मुख्य रूप से तीन समूहों की भूमिका सामने आई है, और अब तक 17 व्हाट्सऐप ग्रुप वेरिफाई किए जा चुके हैं। सिंह ने कहा कि मामले में जांच अभी जारी है तथा आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि मजदूर बिगुल दस्ते से जुड़े लोग औद्योगिक क्षेत्रों में घूम-घूमकर मजदूरों को भड़काने का काम कर रहे थे। इस संगठन का नाम इससे पहले हरियाणा के मानेसर में हुई औद्योगिक हिंसा में भी सामने आया था।
पुलिस ने कहा कि डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में काम किया जा रहा है, और अन्य एजेंसियां भी जांच में जुटी हैं। जांच के दौरान पुलिस को 50 से अधिक संदिग्ध 'एक्स' हैंडल की जानकारी मिली, जो हिंसा से एक-दो दिन पहले ही बनाए गए थे।
लेखक के बारे में
Aditi Sharmaअदिति शर्मा
अदिति शर्मा डिजिटल मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें लाइव हिंदुस्तान, TV9 भारतवर्ष और न्यूज नेशन जैसे संस्थानों में 9 वर्षों का अनुभव है। BCA और MMC की शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ, वे तकनीक और पत्रकारिता के मूल्यों का सटीक संतुलन बनाती हैं। उनकी विशेषज्ञता राजनीति, अपराध और शोध-आधारित लेखन में है, जहां वे सकारात्मक प्रभाव डालने वाली विश्वसनीय पत्रकारिता को प्राथमिकता देती हैं।
विस्तृत बायो
डिजिटल मीडिया के इस दौर में, अदिति शर्मा पिछले 9 सालों से सूचनाओं को खबरों में और खबरों को अटूट विश्वसनीयता में बदलने का काम कर रही हैं। वर्तमान में 'लाइव हिंदुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत रहते हुए, उनकी पत्रकारिता का मुख्य आधार रफ्तार के साथ गहरी सटीकता बनाए रखना रहा है। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि तकनीकी और मीडिया शिक्षा का एक संतुलित मेल है। उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से BCA किया है। इसके बाद उन्होंने इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट (ITMI) से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की, जिसने उनके पत्रकारिता कौशल को निखारा।
अदिति के करियर का एक बड़ा हिस्सा TV9 भारतवर्ष, न्यूज नेशन और इंडिया टुडे जैसे देश के प्रतिष्ठित न्यूज रूम्स के साथ बीता है। इस दौरान उन्होंने न केवल पॉलिटिक्स, क्राइम और स्टेट न्यूज जैसी 'हार्ड-कोर' खबरों को कवर किया, बल्कि फीचर राइटिंग, ओपिनियन आर्टिकल्स और रिसर्च-आधारित गहन लेखन के जरिए खबरों की तह तक जाने का सफल प्रयास किया है।
उनके लिए पत्रकारिता केवल सूचना देना नहीं, बल्कि मल्टीमीडिया का एक संपूर्ण अनुभव है। एंकरिंग से लेकर वीडियो प्रोडक्शन और 'कैलेंडर जर्नलिज्म' से लेकर 'फैक्ट चेक' तक, उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता के हर अनिवार्य पहलू को जिया है। सोशल मीडिया की नब्ज पहचानना और कंटेंट को लाखों लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी पेशेवर ताकत है।
तथ्यों के प्रति उनकी ईमानदारी और 'मीडिया लॉ एंड एथिक्स' के दायरे में रहकर जनता की आवाज उठाना ही उनकी पत्रकारिता का असली उद्देश्य है। वे नई तकनीक और पत्रकारिता के पुराने मूल्यों के बीच एक ऐसा संतुलन बनाने में विश्वास रखती हैं, जिससे समाज को न केवल सही जानकारी मिले, बल्कि उस पर लोगों का भरोसा भी बना रहे। उनका हमेशा यह प्रयास रहता है कि उनकी खबरों से समाज में एक सकारात्मक बदलाव आए।
और पढ़ें

