नोएडा की स्वर्ण जयंती से पहले सुलगी चिंगारी ने बढ़ाई UP सरकार की बेचैनी, क्या है वजह

Praveen Sharma हिन्दुस्तान, नोएडा
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Noida News : उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी नोएडा अपने 50वें स्थापना दिवस (17 अप्रैल) के जश्न की तैयारी कर रही थी, लेकिन उससे ठीक पहले हुए एक हिंसक श्रमिक आंदोलन ने सरकार की नींद उड़ा दी है। 10 हजार करोड़ की परियोजनाओं के लोकार्पण से पहले उपजे इस संकट ने प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया है।

Noida News : उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी नोएडा की स्वर्ण जयंती मनाए जाने से ठीक पहले हुए श्रमिकों के सबसे बड़े हिंसक आंदोलन ने शासन-प्रशासन की बेचैनी बढ़ा दी है। पूरा प्रशासनिक अमला स्थापना दिवस की तैयारियों के बजाए अब आंदोलन को शांत कर हालात सामान्य बनाने में जुट गया है, जिससे निवेश और औद्योगिक इकाइयों पर इसका असर न पड़े।

नोएडा का स्थापना दिवस 17 अप्रैल को है और इस बार नोएडा अपनी 50 साल की आयु पूर्ण कर रहा है। इस दिन दस हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास की तैयारी चल रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री को भी आमंत्रण भेजा गया। नोएडा में विश्व की कई बड़ी कंपनियां स्थापित हो चुकी हैं और पूरे प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देने वाले जिलों में यह पहले नंबर पर है।

दावा है कि यहां 22 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। लेकिन, पिछले चार दिनों से चल रहे श्रमिक आंदोलन ने सरकार और अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक यह साफ नहीं है कि आखिर श्रमिकों का यह आंदोलन अचानक क्यों भड़का, इसकी नींव किसने रखी, नेतृत्वकर्ता कौन है और इसकी आंच इतनी तेज कैसे हो गई।

गैस सिलेंडर की कीमतों ने परेशानी बढ़ाई

आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की टीम ने आंदोलन के बीच पहुंचकर 100 से अधिक श्रमिकों से बात की। श्रमिकों में सबसे अधिक गुस्सा गैस सिलेंडरों की बढ़ी कीमत, हरियाणा में तय की गई मजदूरी और यहां पर मिल रहे कम वेतन को लेकर दिखा। उनका कहना था कि कंपनियों ने सिर्फ 200 से 500 रुपये महीने ही वेतन बढ़ाया, जबकि सामान, बच्चों की पढ़ाई, इलाज सब महंगा हो गया है। बोनस भी लगातार कम हो रहा। ओवर टाइम का भी पूरा पैसा नहीं मिलता। साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिल रहा, जबकि काम 10 से 12 घंटे लिया जाता है। दूसरी ओर, कंपनियां वेतन बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि नोएडा में इससे पहले बड़ा श्रमिक आंदोलन 21 फरवरी 2013 को हुआ था।

कहीं निवेश पर न पड़ जाए असर

नोएडा में वर्तमान में 11 हजार भूखंड आवंटित हुए हैं, जिनमें से 9500 से अधिक भूखंडों पर इंडस्ट्रियां संचालित हैं और अन्य निर्माणाधीन हैं। ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र स्थित कंपनियों की संख्या और अधिक है। अधिकारियों के ही अनुसार आने वाले समय में यहां पर लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आने की संभावना है, जिसके लिए सहमति हो चुकी है और कुछ में एमओयू सााइन हो चुके हैं। इनमें दस से अधिक बड़ी विदेशी कंपनियां हैं। अधिकारी चिंतित हैं कि कहीं आंदोलन का असर निवेश आने पर न पड़ जाए। इसलिए नोएडा से लखनऊ तक के अधिकारी आंदोलन को शांत करने में जुटे हैं।

हरियाणा में वेतन वृद्धि से नाराजगी बढ़ी

श्रमिकों ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 10 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें फैक्टरी-उद्योगों से जुड़े कर्मियों के न्यूनतम वेतन में 35% तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया गया। इससे अकुशल कर्मियों का वेतन 11,274 से बढ़कर 15,220 रुपये हो गया, वहीं कुशल कर्मियों का 13 से बढ़कर करीब 18 हजार और उच्च-कौशल वाले कर्मियों का 14 हजार की जगह 19 हजार के करीब वेतन मिलने का दावा किया गया। नोएडा में अकुशल कर्मियों का न्यूनतम वेतन 11313 और कुशलकर्मी का 13940 रुपये है। दैनिक वेतन भी नोएडा में जहां 435-536 रुपये के बीच है, वहीं गुरुग्राम-मानेसर में यह करीब 585 से 747 रुपये प्रतिदिन तक है।

रिपोर्ट : निशांत कौशिक

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Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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