क्या यह मांग बेतुकी है? नोएडा में बवाल पर राहुल गांधी का सवाल, क्या बोले
नोएडा में मजदूरों के विरोध का राहुल गांधी ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कम वेतन और बढ़ती महंगाई के कारण मजदूर कर्ज में डूबे हैं। 12 घंटे काम के बावजूद बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो रहीं हैं। उनकी मांग जायज है।

नोएडा में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन पर राहुल गांधी ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन मजदूरों की उस अनसुनी आवाज का नतीजा है जो लंबे समय से आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। कम वेतन और बढ़ते किराए के कारण मजदूर कर्ज में डूब रहे हैं। राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों और नए लेबर कोड की आलोचना करते हुए कहा कि 12 घंटे काम करने के बाद भी मजदूरों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने 20 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग को जायज ठहराया और मजदूरों को देश की रीढ़ बताते हुए उनके अधिकारों के लिए साथ खड़े होने का वादा किया।
नोएडा की सड़कों पर कल जो हुआ?
राहुल गांधी ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा कि कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वह इस देश के मजदूरों की आखिरी पुकार थी। एक ऐसी पुकार जिसकी हर आवाज को नजरअंदाज कर दिया गया जो लगातार मिन्नतें करते-करते थक चुके थे।
महीने की सेलरी 12 हजार, किराया 4,000 से 7,000
राहुल गांधी ने आगे कहा कि नोएडा में एक मजदूर की महीने की सेलरी 12 हजार रुपये होती है। वहीं किराया 4,000 से 7,000 रुपये तक देना होता है। एक मजदूरी को साल में 300 की मामूली बढ़ोतरी मिलती है तब तक मकान मालिक किराया 500 रुपये तक बढ़ा देता है।
जान निचोड़ लेती है महंगाई
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब तक तनख्वाह इस बढ़ती महंगाई की बराबरी कर पाती है, तब तक यह बेकाबू महंगाई उसकी जान निचोड़ लेती है। नतीजतन एक मजदूर कर्ज के गहरे दलदल में डूब जाता है। यही विकसित भारत की सच्चाई है।
गैस के दाम बढ़ते ही जा रहे लेकिन तनख्वाह नहीं बढ़ रही
राहुल ने अपने पोस्ट में मजदूरों की प्रतिक्रियाएं भी लगाई है। उन्होंने लिखा- एक महिला मजदूर का कहना है कि गैस के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं, लेकिन तनख्वाह नहीं बढ़ रही है। गैस संकट में घर का चूल्हा जलाने के लिए शायद एक सिलेंडर के लिए इनको 5,000 रुपये तक खर्च करने पड़े होंगे।
दिहाड़ी मजदूर पर सबसे अधिक मार
यह सिर्फ नोएडा की बात नहीं है। यह सिर्फ भारत की बात भी नहीं है। दुनिया भर में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। सप्लाई चेन टूट गई है। लेकिन अमेरिकी टैरिफ, युद्ध, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन का बोझ मोदी जी के मित्र उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा है। इसकी मार सबसे अधिक दिहाड़ी मजदूर पर पड़ी है जो तभी खाता है जब कमाता है।
हक मांगने पर उसे क्या मिलता है?
राहुल ने आगे कहा कि मजदूर का किसी युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। उसने तो बिना शिकायत के बस काम किया। अपना हक मांगने पर उसे क्या मिलता है? दबाव और जुल्म… मोदी सरकार ने बिना किसी से सलाह-मशविरा किए जल्दबाजी में एक फैसला लेते हुए नवंबर 2025 से 4 लेबर कोड लागू कर दिए जिनके तहत काम के घंटे बढ़ाकर 12 घंटे प्रतिदिन कर दिए गए हैं।
क्या उसकी यह मांग बेतुकी है?
राहुल गांधी ने कहा कि वह मजदूर जो हर रोज 12-12 घंटे खड़ा रहता है फिर भी अपने बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए कर्ज लेता है। क्या उसकी यह मांग बेतुकी है? वह, जो हर रोज उसके अधिकारों को कुचल रहा है, क्या यही विकास है। नोएडा का मजदूर 20 हजार रुपये की मांग कर रहा है। यह कोई लालच नहीं, उसका हक है। यह उसकी जिंदगी का एकमात्र सहारा है। मैं ऐसे हर मजदूर के साथ खड़ा हूं जो देश की रीढ़ है। इस सरकार ने उसे एक बोझ बनाकर रख दिया है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
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