नोएडा के ट्विन टावर मामले में 11 अधिकारी दोषी, तीन साल बाद भी नहीं हुआ कोई ऐक्शन
सुपरटेक ट्विन टावर मामले में ग्रेटर नोएडा के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण के 11 अधिकारियों को दोषी पाया गया है।

सुपरटेक के ट्विन टावर मामले में जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसमें नोएडा में तैनात रहे 11 अधिकारियों को दोषी माना गया है। शासन को अब आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेना है। अधिकारियों में से सात सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए थे गंभीर सवाल
उच्चतम न्यायालय ने 31 अगस्त 2021 को टि्वन टावर ढहाने का आदेश दिया था। इसके बाद 28 अगस्त 2022 को दोनों टावर ढहा दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन टावर को लेकर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे और कहा था कि प्राधिकरण के चेहरे ही नहीं, उसके मुंह, नाक, आंख सभी से भ्रष्टाचार टपकता है। शासन ने सितंबर 2021 में उत्तर प्रदेश बुनियादी ढांचा एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति बनाई। समिति की रिपोर्ट के आधार पर 26 अधिकारियों और कर्मचारियों, सुपरटेक लिमिटेड के निदेशकों और उनके आर्किटेक्ट के खिलाफ चार अक्तूबर 2021 को लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया गया। इस प्रकरण में जिन 26 अधिकारियों पर आरोप है, उनमें से 20 सेवानिवृत्त और दो की मौत हो चुकी है। वहीं चार लोगों को शासन ने निलंबित कर दिया। शासन ने नामजद 11 अधिकारियों की जांच का जिम्मा ग्रेटर नोएडा के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव को सौंपा था। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में शासन स्तर से कार्रवाई हो सकती है।
ट्विन टावर ढहाने के साढ़े तीन वर्ष बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
ट्विन टावर को ढहाए गए करीब साढ़े तीन वर्ष हो गए, लेकिन किसी भी आरोपी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। इसको लेकर अनेक बार सवाल उठे। अब एसीईओ की जांच रिपोर्ट शासन के पास पहुंचने के बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं
उच्चतम न्यायालय ने 31 अगस्त 2021 को टि्वन टावर ढहाने का आदेश दिया था। इनको ध्वस्त करने तैयारी में करीब एक साल का समय लगा और इन्हें 28 अगस्त 2022 को गिरा गया। लेकिन अब तक इन टावर के निर्माण के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण के अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। शासन ने सुपरटेक के ट्विन टावर मामले में नोएडा के 11 अधिकारियों की जांच का जिम्मा एसीईओ प्रवीण मिश्रा को दिया गया था। उनका 30 सितंबर 2022 को स्थानांतरण होने के बाद से जांच रुक गई। इस पर नोएडा की ओर से छह माह में तीन बार शासन को पत्र भेजा गया।
ग्रेटर नोएडा के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव को 23 मार्च 2023 को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। तब से वह जांच कर रहे थे। इसके साथ ही उक्त प्रकरण में आरोपी रहे नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ रहे मोहिंदर सिंह, एस के द्विवेदी और एसीईओ आर.पी अरोड़ा और ओएसडी यशपाल सिंह आदि शामिल हैं।
विजिलेंस की टीमें सक्रिय
एसीईओ की जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद इस मामले में विजिलेंस की टीमें भी सक्रिय हो गई हैं और उन्होंने मंगलवार को इस मामले में नोएडा के कार्यालय में पहुंचकर कुछ दस्तावेज हासिल किए थे।


