
पानी में सड़क से 100 मीटर दूर मिली युवराज की कार, सनरूफ से निकले थे बाहर
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में पानी में डूबकर जान गंवाने वाले युवराज की कार सड़क से करीब 100 मीटर अंदर मिली। वहीं, कार के खुले सनरूफ को देखकर पता चला है कि युवराज इसी के जरिए बाहर निकलकर डूबने से पहले मदद मांगते रहे।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 की टाटा यूरेका सोसाइटी में रहने वाले इंजीनियर युवराज मेहता की कार शुक्रवार की रात एक बिल्डर के खाली पड़े भूखंड में भरे पानी में जा गिरी थी। इंजीनियर का शव निकाल लिया गया था, लेकिन कार मंगलवार को निकल पाई। यह सड़क से करीब 100 मीटर अंदर मिली। वहीं, कार के खुले सनरूफ को देखकर पता चला है कि युवराज इसी के जरिए बाहर निकलकर डूबने से पहले मदद मांगते रहे।
एनडीआरएफ की टीम सुबह करीब 11:30 बजे कार को निकालने के लिए घटनास्थल पर पहुंची। टीम नाव के सहारे पानी में उतरी। इसके बाद सोनार यंत्र को पानी में डालकर सर्च अभियान चलाया गया। दो गोताखोर भी पानी में उतरे। काफी मशक्कत के बाद कार का पता चला और उसे बाहर निकाला गया। इस दौरान दिनभर घटना स्थल पर लोगों की भीड़ जुटी रही। भीड़ को संभालने के लिए पुलिस को घटनास्थल पर रस्सी बांधनी पड़ी। कार गिरने के बाद इंजीनियर ने मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन सरकारी सिस्टम इंजीनियर को बचा नहीं सका और पिता व बचाव दल के सामने पानी में डूबकर उनकी मौत हो गई। घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि जिस तरह कार निकालने का प्रयास हुआ, उसी तरह इंजीनियर को बचाने की कोशिश होती तो आज युवराज जिंदा होते।
फॉरेंसिक जांच संभव
कार को पानी से बाहर निकालने के बाद उसकी फॉरेंसिक जांच कराने की मांग शुरू हो गई है। कार की फोरेंसिक जांच से पता चल सकेगा कि हादसा कैसे हुआ। लोग कार में तकनीकी खामी, रफ्तार तेज होने जैसी बातें भी कह रहे। ऐसे में कार की फॉरेंसिक जांच करवाने की चर्चा हो रही है।
सनरूफ से निकल मांगते रहे मदद
इंजीनियर युवराज ने डूबने से पहले कार की सनरूफ से बाहर निकलकर करीब दो घंटे तक मदद मांगी थी। गड्ढे से कार निकाले जाने के बाद इसकी पुष्टि हुई। इससे पहले कयास लग रहे थे कि युवराज ने कार की खिड़की खोलकर मदद मांगी थी। इंजीनियर की कार में सनरूफ था। कार की छत का शीशा खुला हुआ मिला। घटना के समय युवराज पूरे होश में थे और उन्होंने जिंदगी बचाने के पूरे प्रयास किए। जैसे ही कार पानी में गिरी और धीरे-धीरे डूबने लगी तो युवराज कार का सनरूफ खोलकर ऊपर आ गए। छत पर बैठकर मदद मांगी। मोबाइल से फोन किया। टॉर्च जलाकर अपनी लोकेशन बताई। करीब दो घंटे तक कार की छत पर लेटकर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन सरकारी सिस्टम की नाकामी के चलते वह जिंदगी की जंग हार गए। सनरूफ के अंदर से पानी भर गया और इसके बाद कार पूरी तरह पानी में डूब गई।
उपग्रह तस्वीरों में वर्ष 2021 से दिख रहा गड्ढा
नोएडा, एजेंसी। युवराज मेहता की मौत मामले में एक और हैरानजनक खुलासा हुआ है। गूगल अर्थ की उपग्रह तस्वीरों से पता चला है कि सेक्टर-150 स्थित गड्ढा वर्ष 2021 से ही दिख रहा था। नवंबर 2021 के मानसून में पहली बार इसमें पानी भरा देखा गया। वर्ष 2009 से मार्च 2025 के बीच की उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण में ये खुलासा हुआ है। वर्ष 2015 से पहले ये क्षेत्र कृषि भूमि के रूप में दिख रहा था। वर्ष 2016-17 में स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट की अनुमति के बाद कृषि भूमि पर निर्माण शुरू हुआ। इसके बाद यहां गड्ढा दिखना शुरू हो गया था।





