
नोएडा में 5 हजार मोबाइल चुराने वाला गैंग पकड़ा, 8 करोड़ के 821 फोन बरामद; नेपाल तक जुड़े तार
नोएडा पुलिस ने बाजारों में लोगों के मोबाइल चुराने वाले गैंग का पर्दाफाश कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 8 करोड़ रुपये कीमत के चोरी के 821 मोबाइल बरामद किए गए हैं। इस गैंग से जुड़े चोरों ने दिल्ली-एनसीआर में पांच हजार मोबाइल चुराए हैं।
नोएडा की फेज-2 थाना पुलिस ने साप्ताहिक बाजारों में लोगों के मोबाइल चुराने वाले गैंग का पर्दाफाश कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही दो नाबालिगों को भी पकड़ा है। आरोपियों के पास से चोरी के 821 मोबाइल बरामद किए गए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपये के आसपास है। पुलिस जांच में पता चला है कि इस गैंग से जुड़े चोरों ने दिल्ली-एनसीआर में पांच हजार मोबाइल चुराए हैं और इनके तार नेपाल तक जुड़े हैं।
डीसीपी शक्ति मोहन अवस्थी ने मंगलवार को बताया कि आरोपियों की पहचान झारखंड के प्रदीप कुमार, शेखर महतो, भरतीया महतो और श्याम कुमार राय, मेरठ के मवाना निवासी रोहित सैनी और बिहार के भागलपुर निवासी गोविंदा के रूप में हुई। झारखंड के सभी आरोपी साहिबागंज जिले के रहने वाले हैं। दो अन्य बाल अपराधियों की पहचान उजागर नहीं की गई। गोविंदा गिरोह का सरगना है। आरोपियों को न्यायालय और किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने गिरोह को पकड़ने वाली टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया।

दो बदमाशों को छोड़कर सभी अशिक्षित
गैंग के सदस्य श्याम राय और रोहित सैनी ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। गोविंदा, प्रदीप, भरतीया महतो और शेखर अशिक्षित हैं। दोनों नाबालिग भी अनपढ़ हैं। आरोपियों के साथियों की तलाश की जा रही है।
दिल्ली-एनसीआर में पांच हजार फोन चुराए
एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार ने बताया कि सर्दियों में बदमाशों के निशाने पर वे व्यक्ति होते, जो जैकेट की जेब में मोबाइल रखते थे। आरोपी लोगों का ध्यान भंग होने का इंतजार करते। मौका मिलते ही दो सेकेंड में मोबाइल चोरी कर साथी को पकड़ा देते। आरोपियों ने दिल्ली-एनसीआर में पांच हजार मोबाइल चुराए।
झारखंड और नेपाल में सस्ते दाम पर बेचे
एसीपी उमेश यादव ने बताया कि गिरोह के सदस्य रोजाना वारदात करते थे। जब उनके पास 500 या एक हजार मोबाइल एकत्र हो जाते तो वे बस या ट्रेन से झारखंड और बिहार चले जाते। वहां कम दामों में लोगों को मोबाइल बेच देते। कुछ मोबाइल को महाराजगंज समेत अन्य रास्तों से होकर नेपाल पहुंचा दिया जाता था। चोरी के मोबाइल का स्क्रैप नेपाल से चीन तक पहुंचता था, ऐसे में डेटा के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने की आशंका है।





