10 साल की बच्ची से कराते थे काम, मारते-पीटते भी थे; CRPF कांस्टेबल और उसकी पत्नी गिरफ्तार
नोएडा पुलिस ने सीआरपीएफ के एक कांस्टेबल और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने एक साल की बच्ची को घरेलू काम के लिए रखा था और उसे प्रताड़ित करते थे। इसकी शिकायत सीआरपीएफ के अधिकारी ने ही थाने में दी थी।

नोएडा पुलिस ने सीआरपीएफ के एक कांस्टेबल और उसकी पत्नी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने एक साल की बच्ची को घरेलू काम के लिए रखा था और उसे प्रताड़ित करते थे। इसकी शिकायत सीआरपीएफ के अधिकारी ने ही थाने में दी थी।
नोएडा के थाना ईकोटेक-3 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में तैनात सूबेदार मेजर ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि उनकी बटालियन में तैनात एक कांस्टेबल ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लिए बिना 10 साल बच्ची को अपने घर पर काम के लिए रखा। आरोप लगाया कि वहां बच्ची के साथ मारपीट कर उसका उत्पीड़न किया जा रहा है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।
एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 235 बटलियन में तैनात एक सूबेदार मेजर ने बीती रात को थाना ईकोटेक-तीन में रिपोर्ट दर्ज कराई। उनका आरोप है कि उनकी बटालियन में तैनात तारीक अनवर नमक कांस्टेबल और उसकी पत्नी रिस्पांस खातून ने बिना वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के अपने घर पर काम करने के लिए अपने एक रिश्तेदार की 10 साल की बच्ची को रखा हुआ है।
उनका आरोप है कि तारीक अनवर और उसकी पत्नी बच्ची के साथ मारपीट कर उसका उत्पीड़न कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि घटना की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने आज दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।



