नोएडा के मसाज पार्लरों में देह व्यापार का धंधा, 17 लड़कियां मुक्त कराईं; आपत्तिजनक सामग्री बरामद
उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने तीन मसाज पार्लरों पर छापेमारी कर 17 युवतियों को मुक्त कराया। साथ ही अवैध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने एक गोपनीय सूचना के आधार पर इन पार्लरों पर छापेमारी की।

उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने तीन मसाज पार्लरों पर छापेमारी कर 17 युवतियों को मुक्त कराया। साथ ही अवैध गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने एक गोपनीय सूचना के आधार पर इन पार्लरों पर छापेमारी की।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि एक गोपनीय सूचना में जानकारी दी गई कि थाना सेक्टर-49 क्षेत्र में मसाज पार्लर की आड़ में कथित तौर पर देह व्यापार का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। इसके बाद स्थानीय पुलिस और मानव तस्करी रोधी इकाई की संयुक्त टीम ने तीन मसाज पार्लर पर छापे मारे।
अपर पुलिस उपायुक्त मनीषा सिंह ने बताया कि इन मसाज पार्लरों से 17 युवतियों को मुक्त कराया गया। उन्होंने बताया कि मौके से तुषार, कपिल, मनीष, जितेंद्र, गुड्डू, शनि और विकास को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक सामग्री और नकदी भी बरामद हुई।
इससे पहले गाजियाबाद जिला के कौशांबी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का भंडाफोडृ किया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र के एक निजी बड़े होटल में लंबे समय से देह व्यापार का अवैध धंधा किया जा रहा है। छापेमारी के दौरान मौके से 11 महिलाओं को हिरासत में लिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि होटल में बाहरी राज्यों से महिलाओं को बुलाकर देह व्यापार कराया जा रहा था। ये लड़कियां गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिसा की रहने वाली थीं। छानबीन के दौरान होटल मैनेजर के फोन से लगभग 500 लड़कियों की तस्वीरें मिलीं, जो इस रैकेट की गंभीरता को उजागर करती हैं।
पुलिस के अनुसार, होटल में सेक्स वर्क के लिए लाई गई लड़कियों की तस्वीरें ग्राहकों को व्हाट्सऐप पर भेजी जाती थीं और उनसे रकम वसूली जाती थी। ग्राहकों से 15 से 20 हजार रुपए लिए जाते थे, जबकि लड़कियों को एक रात के लिए केवल 5 हजार रुपए मिलते थे। इसके अलावा, लड़कियों को अन्य होटलों में भी भेजा जाता था, जिनके लिए रूम बुकिंग ऑनलाइन की जाती थी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।



