लाखों की जमीन करोड़ों की हुई, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से कीमतों में 6 गुना तक उछाल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट चालू होने से जेवर ही नहीं, गौतमबुद्ध नगर सहित पश्चिमी यूपी के जिलों को सीधे लाभ मिलने जा रहा है। नोएडा एयरपोर्ट का ही असर है कि जेवर क्षेत्र में जो जमीन पहले लाखों की थी, वह करोड़ों में पहुंच गई है। जमीन की कीमतों में 2 से 6 गुना तक उछाल आया है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट चालू होने से जेवर ही नहीं, गौतमबुद्ध नगर सहित पश्चिमी यूपी के जिलों को सीधे लाभ मिलने जा रहा है। नोएडा एयरपोर्ट का ही असर है कि जेवर क्षेत्र में जो जमीन पहले लाखों की थी, वह करोड़ों में पहुंच गई है। जमीन की कीमतों में 2 से 6 गुना तक उछाल आया है।
अप्रैल 2021 में यमुना प्राधिकरण की स्थापना के बाद भी जेवर क्षेत्र में लोग जाने को तैयार नहीं थे। 25 नवंबर 2021 को शिलान्यास के बाद 28 मार्च 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। हवेलिया ग्रुप के एमडी और क्रेडाई एनसीआर एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संयुक्त सचिव निखिल हवेलिया का कहना है कि एयरपोर्ट एक उल्लेखनीय और मील का पत्थर साबित होने वाली उपलब्धि है।
इसके उद्घाटन और शीघ्र ही संचालन शुरू होने के साथ ही क्षेत्र में विकास और आर्थिक गतिविधियों की गति में पहले से ही वृद्धि देखी जा रही है। यह क्षेत्र मजबूत बुनियादी संसाधन के विकास के साथ औद्योगिक और संस्थागत विकास, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, आईटी पार्क, डाटा सेंटर आदि के रूप में निवेशकों के लिए एक पसंदीदा स्थान बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र का रियल एस्टेट बाजार भी स्वाभाविक रूप से तेजी से बढ़ेगा।
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित उपाध्याय का कहना है कि जिले के लिए यह ऐतिहासिक पल है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शुरू होने जा रहा है। इससे उद्योगों को बढ़ावा मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पड़ोसी जिलों में भी महंगी हुई जमीन
जेवर क्षेत्र में एयरपोर्ट बनने से जमीन की कीमतों में दो से छह गुना तक उछाल आया है। एयरपोर्ट बनने से पहले आबादी की जमीन की कीमत 10 हजार से लेकर 20 हजार रुपए प्रति वर्ग गज थी। अब आबादी की जमीन की कीमत 30 हजार से लेकर 80 हजार रुपए प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई है।
वहीं, मुख्य सड़क और रास्तों पर आने वाली आबादी की जमीन की कीमत 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपए वर्ग गज तक है। पहले खेती के लिए एक लाख रुपए बीघा जमीन मिल जाती थी। अब 30 से 35 लाख रुपए बीघा मिल रही है। एयरपोर्ट बनने से बुलंदशहर समेत दूसरे पड़ोसी जिलों की जमीन की कीमतों में भी उछाल आया है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


