
नोएडा में तेजी से गिर रहा भूजल, एक साल के भीतर 9 फीट गिरा; ग्रेनो में कैसे हालात?
नोएडा में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और पिछले नौ वर्षों में यह करीब 20 फीट नीचे चला गया है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, केवल एक साल में इसमें नौ फीट की भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्रेनो में कैसे हालात?
नोएडा में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यहां नौ वर्षों में भूजल 6.22 मीटर (20.41 फीट) तक नीचे आया है। पिछले एक वर्ष में भूजल के स्तर में नौ फीट तक गिरावट दर्ज हुई। इसका कारण बारिश के पानी संचय न होना बताया गया है। ग्रेनो के भूजल स्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। जिला प्रशासन की ओर से जारी नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में मानसून के पहले नोएडा का भूजल स्तर एक वर्ष में करीब तीन मीटर (नौ फीट) तक तेजी से नीचे गिरा।
2023 के बाद दूसरी बार सबसे बड़ी गिरावट
बीते वर्ष तेज बारिश और जिले में बने बाढ़ जैसे हालात से मानसून के बाद भूजल के स्तर में मामूली इजाफा हुआ, जो नाकाफी रहा। वर्ष 2023 के बाद यह दूसरी बार सबसे बड़ी गिरावट रही। इससे पहले अधिकतम एक या दो मीटर तक ही भूजल में गिरावट दर्ज होती थी। बीते नौ वर्षों में नोएडा का भूजल स्तर मानसून के पहले 25.78 मीटर (84.54 फीट) पर पहुंचा, जबकि वर्ष 2017 में यह 19.56 मीटर (64.17 फीट) था।
क्यों बिगड़ रहे हालात? नोटिस भेजे जाएंगे
बारिश का पानी न बचाने से हालात बिगड़ रहे हैं। सेक्टर, सोसाइटियों और बिल्डर परियोजनाओं में 95 प्रतिशत जल संचय प्रणाली खराब हैं। हाइड्रोलॉजिस्ट भूगर्भ जल विभाग के विश्वजीत सिंह ने कहा कि नोएडा में बारिश के पानी का संचयन नहीं हो पा रहा। इस कारण भूजल स्तर गिरा। वहीं, भूजल का निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने पर कई बिल्डर परियोजना पर जुर्माना लगाया जाता है। वाटर रिचार्ज न करने वाली परियोजनाओं को नोटिस भेजे जाएंगे।
ग्रेटर नोएडा में उतार-चढ़ाव जारी
ग्रेटर नोएडा में भूजल स्तर की बात करें तो यहां मामूली उतार-चढ़ाव जारी है। यहां का भूजल स्तर मानसून के पहले 13.52 मीटर (44.36 फीट) और मानसून के बाद 13.33 मीटर (43.73 फीट) दर्ज किया गया। वहीं, पहले से अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की हालत अब भी खराब है।
बिसरख में मानसून के बाद भी गिरावट
बिसरख ब्लॉक में इस बार भारी बारिश के बावजूद भूजल में दो मीटर की गिरावट आई। बिसरख ब्लॉक में मानसून से पहले 15.75 मीटर और मानसून के बाद 17 मीटर भूजल दर्ज किया गया। हालांकि, दादरी और दनकौर में पांच से सात मीटर पर भूजल रहा। यहां मामूली सुधार है।

जेवर में कैसे हालात?
बात करें जेवर की तो यहां तेजी से भूजल गिरना शुरू हो गया है। अब तक सात मीटर पर रहने वाला भूजल स्तर अब 10 मीटर तक पहुंच गया। इसका कारण जेवर में बस रहा नया शहर है। यहां कई ग्रुप हाउसिंग समेत अन्य परियोजनाएं चल रही हैं। बिल्डर भूजल का निर्माण कार्य में इस्तेमाल करते हैं, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। इसके लिए एसटीपी के पानी की व्यवस्था के नियम है।

कहां अधिक स्थिति खराब?
नोएडा के गढ़ी चौखंडी प्राथमिक विद्यालय में भूजल 37 मीटर तक पहुंच गया है। वहीं, छिजारसी राजकीय डिग्री कॉलेज (आरवीएच) में लगे पीजोमीटर के अनुसार यहां भूजल 36 मीटर पर है। सेक्टर-39 के डिग्री कॉलेज और कोतवाली का भूजल भी 30 मीटर से अधिक नीचे जा चुका है। वहीं, ग्रेटर नोएडा की बात करें तो यहां गुलिस्तानपुर गांव में भूजल 24 मीटर और एसीसी का 20 मीटर पर है।

लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
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