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नोएडा मुआवजा घोटाला : SC के आदेश से जांच के घेरे में आएंगे प्राधिकरण के 12 से अधिक सीईओ-एसीईओ

नोएडा मुआवजा घोटाला : SC के आदेश से जांच के घेरे में आएंगे प्राधिकरण के 12 से अधिक सीईओ-एसीईओ

संक्षेप:

 नोएडा : जांच के घेरे में आए प्राधिकरण के 12 से अधिक सीईओ-एसीईओ

Dec 11, 2025 07:37 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, दिल्ली/नोएडा
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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा देने में हुई अनियमितता की जांच कर रही एसआईटी को बुधवार को निर्देश दिया कि मामले की जांच दो माह में पूरी करें। अदालत ने एसआईटी से 10-15 साल पहले प्राधिकरण में तैनात रहे सीईओ, अधिकारियों, अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया है।

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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने एसआईटी को अतिरिक्त समय देते हुए यह निर्देश दिया। नोएडा प्राधिकरण की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच को बताया गया कि एसआईटी ने जांच को लेकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है और इसे पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है, लेकिन हम दो माह का वक्त दे रहे हैं, क्योंकि पहले ही काफी समय दिया जा चुका है।

सिर्फ अधिक मुआवजा देने वालों की जांच होगी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमने अपने पहले के आदेशों में ही साफ कर दिया कि जांच किसानों को परेशान करने के लिए नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों की मिलीभगत की जांच करने के लिए है, जिन्होंने अधिक भुगतान किए हैं।

जांच के घेरे में आए प्राधिकरण के 12 से अधिक सीईओ-एसीईओ

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोएडा के गेझा तिलपताबाद समेत तीन गांवों के अपात्र किसानों को करीब 117 करोड़ रुपये मुआवजा बांटने में हुई गड़बड़ी के मामले में जांच का दायरा अब बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण में पिछले 10-15 सालों में तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में 12 से अधिक सीईओ, एसीईओ और ओएसडी शामिल थे।

मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने साफ किया कि जिन किसानों को अधिक भुगतान किया गया, उन्हें सजा नहीं दी जाएगी और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जांच के दौरान किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। इससे पहले, किसान की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने बेंच को बताया कि किसानों को एसआईटी से अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस मिल रहे हैं। कृपया किसानों की रक्षा करें।

भुगतान गलती से हुआ तो किसान सुरक्षा के हकदार : चीफ जस्टिस ने भरोसा दिलाया कि किसान को सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि हम जानना चाहेंगे कि यदि भुगतान गलती से हुआ है, तो आप कानून के हिसाब से सुरक्षा के हकदार हैं। उन्होंने साफ किया कि एसआईटी को सब कुछ जांचने और रिपोर्ट देने की पूरी छूट होगी।

एसआईटी जांच की सराहना : सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त को मामले में नोएडा के अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था, जिन पर बिल्डरों के साथ मिलकर जमीन मालिकों को उनके हक से अधिक मुआवजा देने का आरोप है। बेंच ने कहा कि एसआईटी की 26 अक्टूबर की स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड में है। हम अब तक उठाए गए कदमों की तारीफ करते हैं। हमें उम्मीद है कि एसआईटी चल रही जांच को सही अंजाम तक ले जा पाएगी।

दायरा बढ़ने से सीईओ के अलावा एसीईओ और सीएलए भी जांच के दायरे में आएंगे। इसकी वजह यह है कि एक रुपये मुआवजा देने के लिए भी सीईओ तक फाइल की मंजूरी होती है। पहले बनी एसआईटी ने करीब पौने दो साल पहले जो रिपोर्ट सौंपी थी, उस रिपोर्ट से न्यायालय इस बात पर सहमत नहीं हुआ था कि इतनी बड़ी गड़बड़ी दो या तीन विधि स्तर के अधिकारी-कर्मचारी कर सकते हैं। गौरतबल है कि गेझा तिलपताबाद गांव के अलावा नंगला और भूड़ा गांव के अपात्र किसानों को प्राधिकरण ने मुआवजा दिया था।

बिना जांच किए फाइल मंजूरी के लिए भेज दी

नोएडा विकास प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि सभी मामलों में किसानों ने प्राधिकरण में झूठी अपील संख्या और अन्य तथ्य प्रस्तुत कर बताया कि उनका हाईकोर्ट में मामला लंबित है, जिसमें 297 रुपये प्रति वर्ग गज से मुआवजे की मांग की गई है, जबकि ऐसी कोई मांग किसी कोर्ट में लंबित नहीं थी। इन झूठे तथ्यों का एलएआर विभाग में कार्यरत अधिकारियों ने कोई जांच नहीं की और किसानों से समझौते का प्रार्थनापत्र लेकर फाइल को मंजूरी के लिए आला अधिकारियों के पास भेज दिया।

दो अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ

मुआवजा बांटने में गड़बड़ी का सबसे पहले खुलासा वर्ष 2021 में गेझा तिलपताबाद में हुआ था। प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी के आदेश पर कमेटी गठित की गई। कोर्ट ने एक मामले में अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन प्राधिकरण के अफसरों ने सांठगांठ कर न्यायालय के आदेश का लाभ अन्य किसानों को दे दिया। वर्ष 2015 में गेझा तिलपताबाद की किसान रामवती को पात्र न होते हुए भी 7 करोड़ 26 लाख रुपये का मुआवजा दे दिया था।

वर्ष 2021 में हुआ था मामले का खुलासा

वर्ष 2021 में यह मामला उजागर होने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने दो अधिकारियों और किसान के खिलाफ कोतवाली सेक्टर-20 में मामला दर्ज कराया था। उस समय सहायक विधि अधिकारी वीरेंद्र नागर को सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बाद 11 अन्य प्रकरण में भी गड़बड़ी का खुलासा हुआ। इन मामलों में भी प्राधिकरण की तरफ से फेज-1 कोतवाली में एफआईआर कराई गई थी।

इन्होंने फाइल आगे बढ़ाई

वीरेंद्र सिंह नागर, तत्कालीन सहायक विधि अधिकारी

दिनेश कुमार सिंह, तत्कालीन विधि अधिकारी

राजेश कुमार, तत्कालीन विधि सलाहकार

मृतक- मदनलाल मीना, कनिष्ठ सहायक

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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