
नोएडा में बोगस फर्म बनाकर साइबर ठगी के काले धन को करते थे सफेद, गिरोह का पर्दाफाश
नोएडा पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो बोगस फर्में बनाकर और जाली बिलों के जरिए साइबर ठगी की रकम को सफेद करता था, जांच में अब तक 10 बैंक खातों से 1.88 करोड़ के लेनदेन का खुलासा हुआ है।
साइबर ठगी के काले धन को सफेद करने के लिए गिरोह ने रहमान इंटरनेशनल के नाम से बोगस फर्म बनाई। इसका कार्यालय नोएडा के सेक्टर-63 में एक कमरे में खोला गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के पास से इस फर्म समेत चार फर्मों के जाली बिल भी बरामद हुए। चौंकाने वाली बात यह है कि कागजों में फर्म से टर्की को जरी का सामान एक्सपोर्ट करना दिखाया जाता था। रहमान इंटरनेशनल का मालिक दिल्ली का रहने वाला रजा हुसैन और मो. नबी है। पुलिस की एक टीम पड़ताल करने नोएडा सेक्टर-63 पहुंची तो वहां सिर्फ एक कमरे का ऑफिस मिला। कंपनी का बोर्ड लगा था। आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर पता चला कि यहां कभी-कभार कुछ लोग आते थे। कभी जरी का सामान नहीं देखा।
हिसाब-किताब कोड भाषा में होता था
तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से नूरी गारमेंट्स और रहमानी इंटरनेशनल के नाम की चालान स्लिप मिली हैं, जिनमें कोड भाषा में पैसों का विवरण लिखा हुआ था। पुलिस के अनुसार ये ठग फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम पर फर्जी बिलों के जरिए रुपयों का हेर-फेर करते थे। गिरोह ठगी की रकम को फर्जी तरीके से खुलवाए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करता था और एटीएम के जरिए कैश निकाल लेता था।
गिरोह का सरगना मो. नबी है। पूछताछ में पता चला है कि नबी का बॉस तरुण कौशिक नामक शख्स है, जो दिल्ली का रहने वाला है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जांच में पता चला है कि मो. नबी 2022 तक दिल्ली के अफजाल नामक शख्स के साथ साइबर ठगी के काले कारोबार में शामिल था। अफजाल का लिंक दुबई से जुड़ा है। उसने दुबई में भी आफिस खोल रखा है। मो. नबी ने उसके साथ करीब 6 माह काम किया और 35 लाख रुपये कमाए। उसके बाद उसने तरुण कौशिक के साथ साइबर ठगी शुरू की।
पुलिस के अनुसार जांच में भुता के रहने वाले ताहिर का नाम भी सामने आया है। ताहिर इस गिरोह को बैंक खाते मुहैया कराता था। जानकारी के अनुसार हर खाते के लिए वह 18 हजार रुपये कमीशन लेता था। बैक खाताधारक के आधार कार्ड का पता तक बदलवा देता था, जिससे पुलिस खाताधारक तक नहीं पहुंच सके। फतेहगंज पश्चिमी के धंतिया गांव का फरमान नाइजीरिया की ठग कंपनी के संपर्क में भी था। उसके पास मिले डेबिट कार्ड की डिटेल खंगाली जा रही है।
दस बैंक खातों में 1.88 करोड़ रुपये का लेनदेन
साइबर ठगी के कालेधन को ठिकाने लगाने के लिए गिरोह बोगस फर्मों के साथ ही सामान्य बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। जांच में सामने आया है कि जयपुर तक फैले इस गिरोह को नेटवर्क में शामिल लोग वहां एटीएम से इन खातों से रुपये निकालते हैं। शुरुआती तफ्तीश में अब तक 10 बैंक खातों का पता चला है जिसमें करीब 1.88 करोड़ का लेनदेन हुआ है।
आठवीं और दसवीं पास आरोपी ऐसे करते थे ठगी
गिरोह के सदस्य आठवीं, दसवीं पास हैं। यह गिरोह लोगों को कई तरीके से ठगता था। नामी बीमा कंपनियों के एजेंट बनकर लोगों को फोन करता और उनकी पूरी हो रही पॉलिसी पर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देता। जब पालिसीधारक उनके झांसे में आ जाता तो उससे बैंक खाते में रुपये जमा कराए जाते थे। गिरफ्तार फरमान और आरिफ आठवीं पास हैं। मो. नबी दसवीं और मो. अकरम 12वीं पास है।





