
भंगेल एलिवेटेड रोड दो महीने से बनकर तैयार, लेकिन नहीं हो रहा शुभारंभ; आखिर कब तक इंतजार?
नोएडा में डीएससी मार्ग पर भंगेल एलिवेटेड रोड लगभग दो महीने से बनकर तैयार है, लेकिन मुख्यमंत्री से उद्घाटन का समय न मिलने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका है, जिससे बरौला, सलारपुर और भंगेल के लोगों को लंबा जाम झेलना पड़ रहा है और वे जल्द खोलने की मांग कर रहे हैं।
दादरी-सूरजपुर-छलेरा यानी डीएससी मार्ग पर भंगेल एलिवेटेड रोड करीब दो महीने से बनकर तैयार है। नोएडा प्राधिकरण के अफसरों को इसके शुभारंभ के लिए मुख्यमंत्री की हरी झंडी का इंतजार है। एलिवेटेड रोड शुरू न होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा।

लोगों की दिक्कतों पर आपका अपना अखबार ‘हिन्दुस्तान’ खबरों की शृंखला प्रस्तुत कर रहा है। पेश है पहली कड़ी। भंगेल एलिवेटेड रोड सेक्टर-41 आगाहपुर से फेज-2 स्थित नाले के पास तक बनी है। यह नोएडा के सबसे व्यस्ततम रास्तों में से एक है। यह एलिवेटेड रोड करीब दो महीने से बनकर तैयार है। इसके शुरू होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। बरौला, सलारपुर और भंगेल में जाम में नहीं फंसना पड़ेगा।
इस एलिवेटेड रोड का शुभारंभ नहीं होने पर लोग सवाल खड़े कर रहे। लोगों का कहना कि यह परियोजना लोगों की सहूलियत के लिए तैयार हुई है। अगर शासन स्तर पर किसी के पास इसके शुभारंभ का समय नहीं है तो किसी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से ही शुभारंभ कराकर इसे लोगों के लिए जल्द से जल्द खोल देना चाहिए। वहीं, प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि एलिवेटेड रोड समेत कुछ और परियोजनाओं के शुभारंभ के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से समय मांगा गया है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में सितंबर में ट्रेड शो हुआ था। इसकी तैयारियों का जायजा लेने और फिर कार्यक्रम के शुभारंभ के दिन मुख्यमंत्री ग्रेटर नोएडा आए। इसके बाद करीब दस दिन पहले 25 अक्तूबर को भी मुख्यमंत्री एयरपोर्ट के काम का जायजा लेने आए। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम अति व्यस्त होने के कारण परियोजनाओं के शुभारंभ का समय नहीं मिल सका। इस परियोजना का काम जून 2020 में शुरू हुआ था। दिसंबर 2022 तक यह बनकर तैयार होना चाहिए था। इस परियोजना का काम करीब पौने तीन साल की देरी से पूरा हुआ है।
लंबा चक्कर
एलिवेटेड रोड का काम करने के कारण यातायात पुलिस ने सेक्टर-49 से फेज-2 आने-जाने के लिए रास्ते बदल रखे हैं। वाहन महर्षि आश्रम, सेक्टर-110 होते हुए लोग आते-जाते हैं। उनको करीब 10 किलोमीटर लंबा अतिरिक्त चक्कर काटकर आना-जाना पड़ता है।





