काम की बात: गाजियाबाद में बैनामा कराने के लिए चक्कर लगाने की जरूरत नहीं, टाइम स्लॉट चुनने का विकल्प मिलेगा
गाजियाबाद में संपत्ति बैनामे की प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए पासपोर्ट की तरह अप्वाइंटमेंट व्यवस्था शुरू कर दी गई। अप्वाइंटमेंट में जो भी समय मिलेगा, उसी अनुसार सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचना होगा। इससे रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और अनावश्यक भीड़ से भी राहत मिलेगी।

गाजियाबाद में संपत्ति बैनामे की प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए पासपोर्ट की तरह अप्वाइंटमेंट व्यवस्था शुरू कर दी गई। अप्वाइंटमेंट में जो भी समय मिलेगा, उसी अनुसार सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचना होगा। इससे अनावश्यक भीड़ से राहत मिलेगी।
अधिकारियों के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत आवेदकों को टोकन लेते समय तीन समय स्लॉट चुनने का विकल्प मिलेगा। पहला स्लॉट सुबह 10 बजे से 12 बजे तक, दूसरा 12 बजे से दो बजे तक और तीसरा शाम तीन बजे से पांच बजे तक होगा। अब तक टोकन लेने के एक घंटे के भीतर बैनामा कराना जरूरी होता था, लेकिन अब तीन स्लॉट में एक निर्धारित समय में सब रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचाना होगा।
कार्यालयों में भीड़ कम होगी
अप्वाइंटमेंट व्यवस्था लागू होने से कार्यालयों में भीड़ कम होगी। तय समय पर पहुंचने से आवेदकों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और काम तेजी से पूरा हो सकेगा। इसके साथ ही लोगों को पहले से पता होगा कि उन्हें किस समय अपने काम के लिए पहुंचाना होगा। बिना वजह सुबह से तहसील पर आकर परेशान होने की जरूरत नहीं होगी।
रोजाना 500 से अधिक बैनामे
जनपद के पांच सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में रोजाना 500 से अधिक बैनामे दर्ज किए जाते हैं। अधिक संख्या के कारण पहले कार्यालयों में भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती थी, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती थी। अधिकारियों के अनुसार, समयबद्ध व्यवस्था से कार्य प्रणाली अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। इससे बैनामे की प्रक्रिया में गड़बड़ियों की संभावना कम होगी और लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।
प्रक्रिया को लगातार सरल बनाया जा रहा
गाजियाबाद के सहायक आयुक्त निबंधन पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि बैनामा करने के प्रक्रिया को लगातार सरल बनाया जा रहा है। आधार और पैन कार्ड के सत्यापान से बैनामे में पारदर्शिता आई है। अब सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद बैनामा कराने के लिए समयानुसार अप्वाइंटमेंट मिलेगा। इससे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में लोगों को ज्यादा समय नहीं लगेगा।
रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा
नई व्यवस्था से न केवल आम नागरिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर को भी गति मिलेगी। समयबद्ध और सरल प्रक्रिया से निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बैनामे की कागजी प्रक्रिया पूरी कराने के बाद खरीदार की सुविधानुसार बैनामा कराने का समय लिया जा सकेगा। ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लोगों के प्रति लोगों में विशवास बढ़ेगा।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


