यमुना का जलस्तर बढ़ने पर भी नहीं घुसेगा पानी, बाढ़ से बचने को दिल्ली सरकार की क्या तैयारी
यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद भी दिल्ली में बाढ़ का पानी नहीं घुस पाएगा। दिल्ली सरकार ने मानसून में यमुना की बाढ़ से सुरक्षा के लिए एक अहम कदम उठाते हुए मोटी दीवार बनाने का निर्णय लिया है। अगले वर्ष मानसून आने से पहले यह दीवार बनाने की परियोजना पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर जाने के बाद भी दिल्ली में बाढ़ का पानी नहीं घुस पाएगा। दिल्ली सरकार ने मानसून में यमुना की बाढ़ से सुरक्षा के लिए एक अहम कदम उठाते हुए मोटी दीवार बनाने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत रिंग रोड के किनारे मजनू के टीला से ओल्ड रेलवे ब्रिज (ओआरबी) तक लगभग 4.72 किलोमीटर लंबी एक मजबूत सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अगले वर्ष मानसून आने से पहले यह दीवार बनाने की परियोजना पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। यह परियोजना पूरी होने पर बाढ़ की समस्या का समाधान होगा।
उन्होंने बताया कि बजट में इस योजना के प्रस्ताव को पारित किया गया है। यह दीवार रिहायशी इलाकों में यमुना का पानी घुसने से रोकेगी। इससे सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे इलाकों के लिए बाढ़ से बचाव के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करेगी।
संयुक्त बाढ़ समिति ने तैयारी की रिपोर्ट
वर्ष 1978 की भीषण बाढ़ के बाद वर्ष 2023 में बाढ़ का पानी रिंग रोड सहित कई हिस्सों में पहुंच गया था। पिछले वर्ष भी यमुना का जलस्तर खतरे के निशान (205.33 मीटर) को पार कर 207.48 मीटर तक पहुंच गया था। इस तरह भविष्य में भी बाढ़ की आंशका बनी हुई है।
इसके मद्देनजर पुणे स्थित केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (सीडब्ल्यूपीआरएस) के विशेषज्ञों की ओर से किए गए एक अध्ययन के आधार पर अगस्त 2024 में संयुक्त बाढ़ समिति ने एक रिपोर्ट तैयार की। इसी रिपोर्ट के आधार पर सुरक्षा दीवार बनाने का फैसला लिया गया।
50 करोड़ की लागत आएगी
यह सुरक्षा दीवार करीब 50 करोड़ की लागत से बनेगी। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को यह सुरक्षा वाल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस दीवार का 850 मीटर हिस्सा सीमेंट कंक्रीट की मोटी दीवार होगी। शेष 3.879 किलोमीटर हिस्सा ईंट व पत्थर से बनाई जाएगी। जल्द ही इस परियोजना पर काम शुरू होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया है कि इस सुरक्षा दीवार के निर्माण के बाद दिल्ली को हर वर्ष आने वाली बाढ़ की समस्या से लोगों को स्थायी राहत मिलेगी और रिहायशी इलाकों में दोबारा पानी नहीं घुसने पाएगा।
इसलिए जरूरी है दीवार
● यह दीवार नदी और शहर के बीच एक मजबूत ढाल बनेगी, जिससे यमुना का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर नहीं आएगा।
● दीवार बनने से यमुना किनारे अवैध रूप से कचरा डाले जाने पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


