
विकास यादव को क्यों न मिले फरलो; HC ने दिल्ली सरकार, कटारा फैमिली से मांगा जवाब
Nitish Katara Murder Case: विकास यादव के वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि फरलो नियमों के तहत सभी शर्तें पूरी होने के बाद भी अर्जी बिना उचित विचार के ठुकरा दी गई। वहीं, दिल्ली सरकार ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीतीश कटारा हत्याकांड में 25 वर्ष की सजा काट रहे आरोपी विकास यादव की फरलो याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने सरकार के साथ ही जेल प्रशासन, कटारा की मां नीलम कटारा और गवाह अजय कटारा को नोटिस जारी कर अगली तारीख तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।

याचिका में कहा गया है कि हाल ही में उसकी शादी हुई है इसलिए वह पहली बार 21 दिनों की फरलो चाहता है ताकि सामाजिक संबंध बनाए रख सके। विकास यादव के वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि फरलो नियमों के तहत सभी शर्तें पूरी होने के बाद भी अर्जी बिना उचित विचार के ठुकरा दी गई। वहीं, दिल्ली सरकार ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा। जेल प्रशासन ने कैदी के अंसतोषजनक आचरण और रिहाई पर उसके फरार होने, सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने तथा पीड़ित पक्ष को नुकसान पहुंचाने की आशंका के आधार पर फरलो आवेदन खारिज कर दिया था।
अपनी याचिका में, विकास यादव ने जेल से रिहाई की अपनी याचिका को जेल महानिदेशक (DG Prisons) की ओर से खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी है। उसने यह तर्क दिया है कि आजीवन कारावास की 25 साल की निश्चित सज़ा में से वह 23 साल से अधिक की सजा काट चुका है।
जेल अधिकारियों ने विकास यादव की फरलो (अस्थायी छुट्टी) की अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था-
➤उसके अपराध की गंभीरता।
➤जरूरी वार्षिक आचरण रिपोर्टों की अनुपस्थिति।
➤पीड़ित परिवार (नीतीश कटारा के परिवार) का विरोध, जिन्होंने रिहाई पर अपनी सुरक्षा को लेकर डर जाहिर किया था।
विकास यादव ने अपनी याचिका में यह कहा है कि वह अपनी मां के इलाज और शादी के लिए 4 महीने से अधिक समय तक अंतरिम जमानत पर बाहर था और इस दौरान उसने स्वतंत्रता का कोई दुरुपयोग नहीं किया या उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं हुई। विकास ने अपनी याचिका में कहा कि विनम्रतापूर्वक यह निवेदन किया जाता है कि याचिकाकर्ता को फरलो देने से इनकार करना सीधे तौर पर भेदभावपूर्ण है, क्योंकि जो दोषी अधिक गंभीर अपराधों में शामिल हैं, उन्हें नियमित रूप से फरलो पर रिहा किया जा रहा है, जबकि वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने लगभग साढ़े चार महीने के लिए जमानत दी थी और उसने स्वतंत्रता का कभी दुरुपयोग नहीं किया, जैसा कि ऊपर बताया गया है।





