काम की बात: फरीदाबाद के विकास को लगेंगे पंख, बाटा चौक के पास नई टाउनशिप-व्यावसायिक केंद्र बनाने का प्लान
फरीदाबाद शहर के विकास को नई रफ्तार मिलने जा रही है। इसके लिए टीओडी पॉलिसी के तहत बाटा चौक के पास नई टाउनशिप-व्यावसायिक केंद्र बनाने की योजना है। नमो भारत ट्रेन चलने के बाद यहां आवास और रोजगार के अवसर और बढ़ेंगे।

धनंजय चौहान, फरीदाबाद
स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में नमो भारत ट्रेन परियोजना के साथ बाटा चौक के आसपास टाउनशिप और व्यावसायिक केंद्र को बढ़वा दिया जाएगा। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पॉलिसी के तहत इंटरचेंज पॉइंट के आसपास योजनाबद्ध तरीके से नए रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
शहर में प्रस्तावित गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा नमो भारत (आरआरटीएस) कॉरिडोर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। इस 64 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक शुरू करने और वर्ष 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रेटर फरीदाबाद में पहले से ही कई हाईराइज आवासीय परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। नमो भारत कनेक्टिविटी मिलने के बाद इन क्षेत्रों में नई सोसाइटी और व्यावसायिक परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
हाईवे किनारे विकास की अनेक संभावनाएं
आरपीएस ग्रुप के निदेशक अमन गुप्ता ने बताया कि दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग का जिस तरह विकास होना चाहिए, वह नहीं हुआ है। नमो भारत और टीओडी नीति से हाईवे के आसपास विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। भूमिका ग्रुप के सीएमडी उद्धव पोद्दार ने कहा कि गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा नमो भारत कॉरिडोर से बेहतर कनेक्टिविटी के कारण आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की मांग बढ़ेगी।
मनीष यादव, डीटीपी प्लानिंग, ''नमो भारत परियोजना के तहत टीओडी पॉलिसी से स्टेशन और कॉरिडोर के आसपास योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें आवासीय, व्यावसायिक और सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर विकास की योजना तैयार की जाएगी।''
ग्रीन बेल्ट में चल रहे अवैध प्रतिष्ठानों की जांच होगी
फरीदाबाद शहर और प्रदेश में ग्रीन बेल्ट पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने हरियाणा के मुख्य सचिव को ग्रीन बेल्ट पर संचालित सभी प्रतिष्ठानों की विस्तृत जांच कराने और उनके संचालन के आधार की जानकारी देने के निर्देश दिए। एनजीटी ने संबंधित विभागों से भूमि के स्वामित्व, उपयोग और संचालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह जांच करने के निर्देश दिए गए कि संबंधित प्रतिष्ठान कितने समय तक बिना आवश्यक अनुमति और वैधानिक स्वीकृतियों के संचालित होते रहे। वन विभाग से भी पूछा गया कि वन संरक्षण कानून के तहत आवश्यक अनुमति के बिना वन भूमि पर प्रतिष्ठानों का संचालन कैसे होने दिया गया। एनजीटी को बताया गया कि कुछ प्रतिष्ठान हटाए जा चुके हैं और कुछ भूमि आवंटन निरस्त किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी, जिसमें जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।


