
दिल्ली में हिडमा के लिए नारे लगाने वालोंं के बारे में नया खुलासा, पुलिस ने अदालत के सामने बताया
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सरकार के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किए गए चार छात्रों को गुरुवार को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन की आड़ में रविवार शाम इंडिया गेट पर नक्सली कमांडर हिडमा के समर्थन में नारेबाजी करने वाले लोगों ने 14 नवंबर को प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नक्सली मूवमेंट को समर्थन देने की बात कही थी। पुलिस ने यह खुलासा गुरुवार को कोर्ट में पेशी के दौरान किया। अपने दावे के समर्थन में पुलिस ने बतौर सबूत एक वीडियो भी रिकॉर्ड में दिया है। इस दौरान कोर्ट ने चार आरोपियों को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। आरोपियों से पूछताछ के बाद अभी इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पुलिस ने यह भी दावा किया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ ने पुलिस रिकॉर्ड में अपनी असली जानकारी छुपाते हुए गलत पते दिए। पुलिस ने अदालत को प्रदर्शन की प्लानिंग, कोऑर्डिनेशन और भड़काने से जुड़ी मोबाइल चैट्स देने के साथ उनका सामना कराने के लिए रिमांड मांगी है। पुलिस ने कथित तौर पर आरोपियों से पेपर स्प्रे और मिर्च पाउडर भी बरामद किया था।
प्रतिबंधित संगठन के कार्यक्रम में लिया था हिस्सा
आरोपी लोग झारखंड में मिलिटेंट मूवमेंट और नक्सलियों को सपोर्ट कर रहे थे। पुलिस ने अदालत में एक्स पर एक आरोपी के वीडियो का भी जिक्र किया, जिसमें उसने बैन संगठन रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (RSU) की 50वीं वर्षगांठ में हिस्सा लिया था।
वकील ने गिरफ्तारी को गलत बताया
कोर्ट में पेशी के दौरान आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस रिमांड का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि RSU का समर्थन करने के आरोप मौजूदा केस में नहीं लाए जा सकते। उनका दूसरा मुख्य तर्क कथित अपराधों के लिए अधिकतम सजा से संबंधित था। विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि इस केस में जिन धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है, उनमें अधिकतम पांच साल की सजा का ही प्रावधान है, इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।
पुलिस लिखित कारण बताकर करे गिरफ्तारी
विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि इस केस में जिन धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है, उनके लिए अधिकतम सजा पांच साल है, इसलिए गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए। या अगर गिरफ्तारी की भी जाती है तो पुलिस को लिखित में कारण बताने होंगे। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि अगर पुलिस पूछताछ की जरूरत थी, तो शुरू में ही पुलिस रिमांड मांगी जानी चाहिए थी। उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह से गिरफ्तारियां की गईं, वह सही नहीं था।
बता दें कि रविवार को हुए इस प्रदर्शन को लेकर दो FIR दर्ज कर कुल 23 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR के तहत 17 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि कर्तव्य पथ थाने में दर्ज केस में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये FIR मारपीट, सरकारी कर्मचारियों के काम में रुकावट डालने और भारतीय न्याय संहिता की महिलाओं की इज्जत खराब करने के आरोपों के तहत दर्ज की गई हैं।





