
अटक गई नए नोएडा की योजना, 5 साल बाद भी मुआवजा दर तय नहीं; कैसे होगा अधिग्रहण
नए नोएडा के लिए मास्टर प्लान 2041 को मंजूरी मिलने के 5 साल बाद भी न तो 80 गांवों में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो पाई है और न ही मुआवजा दर तय हुई है, जबकि किसान नोएडा के बराबर मुआवजे की मांग कर रहे हैं और गांवों में लगातार अवैध निर्माण जारी है।
नए नोएडा के लिए पांच साल बाद भी न तो मुआवजा दर तय हो सकी है और न ही इसकी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई है। इतना ही नहीं मुआवजा राशि तय करने के लिए गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर जिले के अधिकारियों के बीच अब तक संयुक्त बैठक भी नहीं हुई है और इससे संबंधित प्रस्ताव भी स्वीकार नहीं हुआ है जबकि दोनों जिलों के गांवों में लगातार निर्माण कार्य चल रहा हैं।
शासन ने 29 अगस्त 2017 में दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र गठित किया गया था, जिसे डीएनजीआईआर नाम दिया गया था। शासन ने शुरू में इसे बसाने की जिम्मेदारी यूपीसीडा को दी थी लेकिन बाद में आंशिक संशोधन करके 29 जनवरी 2021 इस क्षेत्र को बसाने का जिम्मा नोएडा प्राधिकरण को दे दिया।
इसके मास्टर प्लान 2041 को अक्तूबर 2024 में उत्तर प्रदेश सरकार से अंतिम मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अब तक इस निवेश क्षेत्र के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, न तो ही इसका कोई दफ्तर बना है और न ही अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि तय हुई है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि नए नोएडा में 80 गांव आते हैं, जिनमें गौतमबुद्ध नगर के 20 गांव और बुलंदशहर जिले के 60 गांवों में भूमि अधिग्रहीत होनी है।
प्राधिकरण अधिसूचित गांवों में अधिग्रहण की निगरानी के लिए अधिकारियों को नियुक्त कर रहा है। भूमि अधिग्रहण के लिए एक हाइब्रिड मॉडल तैयार किया जा रहा है। मुआवजा योजना मानक और दर यह निर्धारित करेगी कि किसानों को कितना भुगतान किया जाएगा और विकसित भूमि का कितना अनुपात उन्हें वापस किया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव दोनो जिलों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में तय कर जल्द ही राज्य को भेजा जाएगा।
सरकार से मंजूरी मिलने के बाद चिह्नित क्षेत्र में कार्यालय स्थापित किया जाएगा, जिसमें चार लेखपाल, दो तहसीलदार और दो नायब तहसीलदार तैनात होंगे, जो किसानों के साथ वार्ता कर अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू करेंगे।
पहले फेज में 15 गांव शामिल
योजना के तहत 80 गांवों में से 15 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। प्रत्येक गांव में करीब 200 किसान परिवार है, यानी कुल 16 हजार किसान परिवार हैं। इनके साथ बैठक कर मुआवजे पर निर्णय होगा। पहले फेज में 3165 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इन गांवों के प्रधान से बातचीत की गई है। यहां आपसी समझौते के आधार पर जमीन किसानों से खरीदने का प्रयास है।
भूमि की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाया गया
प्राधिकरण ने भविष्य में भूमि-उपयोग विवादों को रोकने के लिए अधिसूचित गांवों के भीतर आवासीय (आबादी) क्षेत्रों को परिभाषित करने और लेन-देन पर अंकुश लगाने के लिए मंजूरी के बिना भूमि की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाया है। जुलाई 2025 में, अवैध निर्माण रोकने के लिए 80 गांवों की निगरानी के लिए दो अधिकारियों को तैनात किया है। इसके बावजूद भी इन गांवों में निर्माण कार्य चल रहा है।
नोएडा की तर्ज पर मुआवजा देने की मांग
मुआवजा राशि तय करना भी प्राधिकरण के अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती है। सिकंदराबाद के इलाके के गांवों में 800 से लेकर 1700 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक मुआवजा राशि है जबकि नोएडा में यह राशि 5400 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक है। यहां के किसान नोएडा के बराबर मुआवजा राशि दिए जाने की मांग कर रहे हैं, जिसके लिए प्राधिकरण तैयार नहीं है।
दफ्तर के लिए भी जमीन नहीं मिली
नया नोएडा शासन की प्राथमिकता में है, मगर अब तक इसके दफ्तर के लिए भी जमीन नहीं मिल सकी है। नोएडा प्राधिकरण का प्रयास है कि किसानों से आपसी सहमति से जमीन ली जाए। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम सहित अन्य अधिकारी नए नोएडा के गांवों में जमीन की स्थिति देखने भी गए थे। सीईओ ने निर्देश दिया कि जोखाबाद या सांवली गांव के पास प्राधिकरण के अस्थाई दफ्तर के लिए जमीन ली जाए। दफ्तर के लिए करीब दो हजार वर्ग मीटर जमीन चाहिए, लेकिन कार्यालय के लिए भी जमीन फाइनल नहीं हो सकी है।
अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी
नए नोएडा के लिए चिह्नित गांवों में अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की तैयारी भी प्राधिकरण ने की है। अधिकारियों के अनुसार नए नोटिफिकेशन के बाद अधिसूचित क्षेत्र में हुए निर्माण को अवैध माना जाएगा। प्राधिकरण और प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा इन पर बुलडोजर चला कर ध्वस्त करेगी। वहीं, अवैध निर्माण को रोकने के लिए प्राधिकरण की तरफ से चेतावनी बोर्ड भी लगवाए गए हैं।





