जीरो हिंसा से नक्सल खात्मे के करीब पहुंच रहे सुरक्षा बल

Jan 16, 2026 07:55 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जीरो हिंसा से नक्सल खात्मे के करीब पहुंच रहे सुरक्षा बल- सटीक रणनीति, त्वरित फैसले और अत्याधुनिक हथियारों से नक्सल खात्मे की व्यूह रचना हो रही सफल नई दिल्ली। पंकज कुमार पाण्डेय नक्सल के ख़िलाफ़ अभियान...

 जीरो हिंसा से नक्सल खात्मे के करीब पहुंच रहे सुरक्षा बल

जीरो हिंसा से नक्सल खात्मे के करीब पहुंच रहे सुरक्षा बल- सटीक रणनीति, त्वरित फैसले और अत्याधुनिक हथियारों से नक्सल खात्मे की व्यूह रचना हो रही सफल नई दिल्ली। पंकज कुमार पाण्डेय नक्सल के ख़िलाफ़ अभियान में एडवांस हथियारों से सुसज्जित बख्तरबंद वाहनों ने अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा जवानों की जान माल की हिफाजत के लिए उपलब्ध कराए गए उपकरणों ने सुरक्षा बलों के ऑपरेशन को बिना नुकसान के आगे बढ़ाने में मदद की है। एक आला अधिकारी ने कहा, अब हम बिना नुकसान के एनकाउंटर कर रहे हैं । हिंसा का स्तर भी शून्य है। नक्सल खात्मे के ऐलान के पहले यह सकारात्मक संदेश है।

आला अधिकारी ने कहा , नक्सल के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों के ऑपरेशन को मिल रही सफलता में बड़ा योगदान शीर्ष स्तर पर त्वरित और निर्णायक फैसलों का हैं। सुरक्षा बलों ने बख्तरबंद वाहन, अत्याधुनिक हथियार, नाईट विजन उपकरण , एंटी स्पाइक जूते सहित जो भी जरूरत सरकार को बताई बिना देरी के उन्हें उपलब्ध कराया गया। आला अधिकारी ने कहा, गृहमंत्री अमित शाह का स्पष्ट निर्देश है कि ऑपरेशन के लिए जरूरी उपकरण हथियार सुरक्षा बलों को तुरंत मिलने चाहिए अगर क्रय करने में देरी हो तो सेना से लोन पर उपलब्ध कराया जाए। कुछ मामलों में तुरंत रक्षा मंत्रालय से बात कर सुरक्षा बलों को आवश्यक उपकरण सेना द्वारा मुहैया कराए गए। ऑपरेशन से जुड़ी स्पेसिफिक जानकारी देने से इंकार करते हुए एक अधिकारी ने कहा सुरक्षाबलों की माँग पर कई तरह के मॉडिफिकेशन के साथ बख्तरबंद वाहन तैयार कराए गए। इसकी वजह से एक बड़े ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों द्वारा चारों तरफ़ से गोलीबारी का असर भी सुरक्षाबलों पर नहीं हुआ। वाहन की खूबी यह है कि इसके ज़रिए टार्गेटेड जवाब भी दिया जाना संभव होता है। देश का सबसे बड़ा ''बख्तरबंद सुरंग रोधी वाहन'' (आर्मर्ड एंटी टनल व्हीकल ) सीआरपीएफ के पास हैं जो बारूदी सुरंगों को रौंदते हुए पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ने में सक्षम है। सुरक्षा बल के सुझाव पर इसमें अब तक 36 तरह के छोटे-बड़े मॉडिफिकेशन किए जा चुके हैं। इसे खराब सड़कों और दुर्गम क्षेत्रों में आवाजाही में कोई दिक्कत नहीं होती। आईईडी ब्लास्ट का भी असर इस पर नहीं होता। इस वाहन को एमपीवी (माइंस प्रोटेक्टिव व्हीकल ) से भी एडवांस किया गया है। फ्रंट ग्लास में गन पोर्ट, रॉकेट लॉन्चर, रियर व्यू कैमरा, चारों तरफ सर्च लाइट और उसके साथ आगे और पीछे दोनों तरफ विंच लगाए गए हैं। माइंस प्रोटेक्टिव व्हीकल (एमपीवी ) पहले से ही सीआरपीएफ के खेमे में शामिल है। कांच को काटकर तैयार किए गए पोर्ट से बेहद आसानी से फायरिंग होती है। जबकि बुलेट प्रूफ होने के कारण बाहरी गोलीबारी का असर अंदर बैठे जवानों पर नहीं होता। सुरक्षा बलों को ऐसे एरिया वेपन मुहैया कराए गए हैं जिनकी रेंज 300 मीटर से लेकर पाँच किलोमीटर तक है । छोटे हथियार और गोला-बारूद, भीड़ नियंत्रण गियर, आईईडी डिटेक्शन और प्रबंधन उपकरण, निगरानी और टोही उपकरण, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक डिवाइस, जैमर और अत्याधुनिक संचार प्रणाली सुरक्षा बलों के पास हैं। बेहतर नाइट विजन समेत कई एडवांस तकनीक से लैस वाहन और एयर सिस्टम भी ऑपरेशन के इलाके में मौजूद हैं। इनकी मदद से सुरक्षा बलों के लिए रात में भी जंगलों में सर्च ऑपरेशन या बचाव कार्य संभव हुआ है। कैजुअल्टी से बचाने के लिए एयर एम्बुलेंस भी सुरक्षा बलों को उपलब्ध कराए गए । एंटी स्पाइक्स शू का भी फायदा जवानों को हुआ। इसकी वजह से स्पाइक हमले से जवान बचने लगे। अधिकारी ने कहा मॉडिफिकेशन के लिए कंपनी को जरूरत बताई गई और बेहद कम समय में यह जूते जवानों को मिल गए। अभियान में शामिल डीआरजी को पहले हथियार नहीं दिए जाते थे। अमित शाह के निर्देश पर इन्हें भी हथियार दिए गए और इन्हें फ्रंट फोर्स के तौर पर आधा दर्जन एजेंसियों के साथ अभियान में लगाया गया। इसके अलावा सरकार ने अकेले बस्तर में लगभग 320 सुरक्षा शिविर स्थापित किए हैं। प्रत्येक सुरक्षा शिविर में कर्मियों की संख्या आवश्यकता के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है। यह 150 कर्मियों से लेकर 1,200 तक हो सकती है। इनमें सुरक्षा बल और तकनीकी कर्मचारी शामिल हैं। सभी कोर नक्सल इलाके में कैम्प बन चुके हैं। नक्सलियों के ख़िलाफ़ एनकाउंटर अभियान से पहले उन्हें सरेंडर के लिए राजी करने का हर संभव प्रयास किया जाता है। अधिकारी ने उदाहरण देते हुए कहा, हिडमा के एनकाउंटर से पहले उसकी बात उसकी माँ से कराई गई थी। उस समय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे पर थे।

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