विश्व साइकिल दिवस: आसान नहीं है राजधानी की सड़कों पर साइकिल चलाने वालों की राह
जर्नल ‘नेचर सिटीज’ के अंतरराष्ट्रीय शोध में राजधानी में साइकिल चलाने वालों की चुनौतियां

जर्नल ‘नेचर सिटीज’ के अंतरराष्ट्रीय शोध में राजधानी में साइकिल चलाने वालों की चुनौतियां आई सामने नई दिल्ली। हिन्दुस्तान टीमविश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जिस साइकिल को प्रदूषण और बीमारियों से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार मानता है, देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उसे ही सबसे ज्यादा उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। यहां साइकिल चलाना न तो सुरक्षित है न सहज। शोध में सामने आया है कि पर्याप्त प्रभावी योजनाओं की कमी के कारण कामकाजी या साइकिल चालकों के लिए साइकिल चलाना मुश्किल हो गया है। राजधानी में साइकिल चलाने वाले दुर्घटना के शिकार होते हैं। कई मामले में उनकी मौत भी हो जाती है।
2024 में दिल्ली में साइकिल सवारों से जुड़े 149 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 53 लोगों की मौत और 106 लोग घायल हुए।यानी औसत प्रति माह 4 से अधिक साइकिल सवार अपनी जान से हाथ धो रहे हैं।प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘नेचर सिटीज’ में प्रकाशित एक वैश्विक शोध पत्र द स्टेट्स एंड पोलिटिक्स ऑफ बाइसकिलिंग इन द सिटीज ऑफ फ्लो एंड मिडिल इनकम कंट्रीज में दिल्ली में साइकिल चालकों की स्थिति को लेकर कई चौंकाने वाले और चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। आईआईटी दिल्ली और यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा किए गए इस साझा अध्ययन से साफ हुआ है कि दिल्ली की सड़कों का मौजूदा ढांचा साइकिल चालकों के प्रति बहुत अच्छा नहीं है। आईआईटी दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर में प्राध्यापक डा.राहुल गोयल भी इस शोध का हिस्सा हैं।शोध के आंकड़ों के मुताबिक, अध्ययन में शामिल चारों वैश्विक शहरों (दिल्ली, चेन्नई, ढाका और अक्रा) में से सबसे लंबी और समय लेने वाली साइकिल यात्राएं दिल्ली में दर्ज की गईं। दिल्ली में एक साइकिल चालक औसतन हर दिन 47 मिनट का सफर तय करता है। इसमें सुरक्षा गार्ड, फैक्ट्री मजदूर, निर्माण कर्मी और सफाई कर्मचारी जैसे कम आय वाले लोग अपनी आजीविका के लिए इन्हें हर रोज मीलों दूर वीआईपी या औद्योगिक इलाकों तक साइकिल से थकाऊ सफर तय करना पड़ता है। लेकिन इनके लिए पर्याप्त व सुरक्षित साइकिल ट्रैक नहीं है।दिल्ली की मुख्य और व्यस्त सड़कों (आर्टेरियल रोड्स) पर साइकिल चलाने वालों में महिलाओं और बच्चों की भागीदारी लगभग शून्य पाई गई। सर्वे के अनुसार, दिल्ली में घरेलू काम करने वाली महिलाएं केवल दो किलोमीटर के दायरे में ही साइकिल का इस्तेमाल करती हैं और वे दुर्घटना के डर से मुख्य सड़कों पर आने से बचती हैं।फ्लाईओवर और डिवाइडर बने बड़ी बाधाशोध में यह भी सामने आया है कि दिल्ली की सड़कों को गाड़ियों की तेज रफ्तार के लिए डिजाइन किया जा रहा है। फुट ओवरब्रिज, ऊंचे डिवाइडर और लंबे फ्लाईओवर कारों का रास्ता तो सुगम बनाते हैं, लेकिन साइकिल चालकों की शारीरिक मेहनत और दूरी को कई गुना बढ़ा देते हैं। इन बाधाओं से बचने के लिए दिल्ली के साइकिल चालक मजबूरन खतरनाक कदम उठाते हैं। वे अक्सर मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक के विपरीत दिशा में साइकिल चलाते हैं, ऊंचे डिवाइडर पर साइकिल उठाकर लांघते हैं, या फ्लाईओवर पर चढ़ने के लिए चलते हुए ऑटो-रिक्शा को हाथ से पकड़कर खुद को खींचते हैं।वीआईपी इलाकों तक सीमित हैं साइकिल लेनशोध में दिल्ली के अर्बन प्लानर्स के हवाले से बताया गया है कि दिल्ली में जो भी साइकिल ट्रैक या पेंट की गई लेन मौजूद हैं, वे बेहद छोटी और आपस में कटी हुई हैं। ये लेन ज्यादातर केवल उच्च आय वाले (वीआईपी) इलाकों के आसपास बनाई गई हैं, जो कामकाजी गरीबों के रूट से मेल नहीं खातीं। पीक आवर्स के दौरान इन साइकिल ट्रैकों पर मोटरसाइकिल सवारों का कब्जा हो जाता है या फिर ये निर्माण मलबे, अवैध पार्किंग और दुकानों के विस्तार की भेंट चढ़ जाते हैं। परिणामस्वरूप, साइकिल चालक मुख्य सड़क पर चलने को मजबूर होते हैं।---------------------------साइकिल चालकों की मुश्किलें कम नहींहाई-वे में कम, शहर के अंदर है अधिक असुरक्षाद साइकिल क्लब दिल्ली के संस्थापक कमल बिष्ट ने बताया कि दिल्ली में साइकिल ट्रैक काफी कम हैं। जो बने भी हैं, उनका रखरखाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहर के अंदर ज्यादा असुरक्षा रहती है। कई बार साइकिल व फोन की छिना-झपटी भी होती है। लेकिन, शहर के तुलना में हाई-वे फिर भी सुरक्षित हैं। उन्होंने बताया कि कार व बाइक चालक साइकिल चालकों को निचले दर्जे का समझते हैं। ऐसे में वह सड़क पर साइकिल चालकों को देखते ही नहीं है। कई बार निकलने तक की जगह नहीं छोड़ते हैं।बिष्ट ने बताया कि दो साल पहले एक कार चालक ने उन्हें साइकिल चलाते समय टक्कर मार दी थी। वह एक माह तक अस्पताल में भर्ती थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली साइकिल के लिए अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है। यहां युवा साइकिल चलाने के बारे में सोच ही नहीं रहा है। वह केवल बाइक या कार पर निर्भर होना चाहते हैं। ऐसे में सुविधाओं का अभाव है। बिष्ट ने बताया कि उनके समूह में 250 से अधिक लोग शामिल हैं। वह सप्ताह में तीन दिन साइकिल राइड पर निकलते हैं। साथ ही, लंबी राइड के लिए उत्तराखंड, राजस्थान व उत्तर प्रदेश भी जाते हैं।वह पूर्वी दिल्ली व मध्य दिल्ली में साइकिल चलाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार साइकिल चलाने को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है, लेकिन इस कार्य में तेजी लाने की जरूरत है। साइकिल चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।साइकिल ट्रैक पर अवैध तरीके से की जा रही पार्किंगदिल्ली के पहाड़गंज मेन रोड पर बने साइकिल ट्रैक को अवैध तरीके से पार्किंग बना दिया गया है। यहां पर साइकिल ट्रैक पर कार, बाइक-स्कूटर लगातार खड़े किए जा रहे हैं। इसे लेकर साइकिल चलाने वाले चालकों ने सवाल उठाते हुए विभागों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। साइकिल चालन विमल ने बताया कि पहाड़गंज मेन रोड में साइकिल ट्रैक पर साइकिल चला ही नहीं सकते हैं। यहां पर अवैध तरीके से वाहनों को खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागों की तरफ से इस तरह के अतिक्रमण और अवैध कब्जे की न ही निगरानी की जा रही है और न ही कोई कार्रवाई हो रही है। हर दिन सैकड़ों साइकिल चालक असुरक्षित तरीके से इस सड़क पर चलने को मजबूर हैं। लेकिन विभाग कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। दुकानों के बाहर अवैध तरीके से सैकड़ों स्कूटर-बाइक साइकिल ट्रैक व पैदल चलने वाले मार्गों पर अवैध तरह से खड़ी की जा रही हैं। यहां पर इस पूरे साइकिल ट्रैक को अवैध सरफेस पार्किंग बना दिया गया है। कारों पर कपड़ा ढकते हुए उसे अवैध रूप से खड़ा कर रहे हैं। इस पर कोई भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह अव्यवस्था का नतीजा है और पूरी तरह से गलत है।साइकिल ट्रैक में वाहनों के अवरोध से आ रही दिक्कतेंदिल्ली के कोहाट एंक्लेव मेट्रो स्टेशन से लेकर नेताजी सुभाष प्लेस तक साइकिल ट्रैक को बनाया गया है। इसके अलावा रोहिणी वेस्ट मेट्रो स्टेशन से लेकर मधुबन चौक मेट्रो स्टेशन भी साइकिल ट्रैक मौजूद है। लेकिन इन साइकिल ट्रैक पर कई जगहों पर विभिन्न अवरोधों के कारण नागरिकों को साइकिल चलाना में मुश्किल होती है। कई जगहों पर अतिक्रमण हो रखा है। इसमें अवैध तरीके से वाहनों को खड़ा कर दिया जा रहा है। इसमें कार, बाइक, स्कूटर खड़े किए जा रहे हैं। इस दौरान साइकिल ट्रैक के मार्ग पर अवैध तरीके से गमलों को भी रखा जा रहा है। इस संबंध में स्थानीय निवासी सुमित ने बताया कि साइकिल तो दूर की बात है, साइकिल ट्रैक के साथ पैदल चलने के लिए मार्ग भी बनाया गया है। वहां पर भी रेहड़ी पटरी वालों का कब्जा हो रखा है। इन सब कारणों से काफी समस्या आ रही है। इस पूरे रूट पर लगातार ट्रैफिक की आवाजाही होती है। इस लिहाज से साइकिल ट्रैक पर चलना ही सुरक्षित महसूस होता है लेकिन कई तरह के अवरोध और अतिक्रमण की वजह से इस पर चल नहीं पाते हैं। इन सब को लेकर विभागों को अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता है।पीक ऑवर में साइकिल ट्रैक पर बाइक-स्कूटर चलाते हुए नजर आते हैंदिल्ली के लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन से आईटीओ विकास मार्ग तक साइकिल ट्रैक बना हुआ है। लेकिन इस साइकिल ट्रैक पर पीक ऑवर में बाइक-स्कूटर चलाते हुए नजर आते हैं। सुबह आठ से साढ़े दस बजे के दौरान इस साइकिल रूट पर आने-जाने के सड़क मार्ग के साइड पर बने साइकिल ट्रैक पर बाइक-स्कूटर घुस जाते हैं। इसे लेकर साइकिल चालकों को सबसे ज्यादा दिक्कतें होती हैं। इसे लेकर कई साइकिल चालकों ने कहा कि इस रूट पर किसी भी तरह की कोई निगरानी नहीं की जाती है। यहां पर अवैध तरीके से साइकिल ट्रैक में घुसकर बाइक-स्कूटर चलाने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। इस दौरान इस व्यस्त सड़क मार्ग पर साइकिल चलाना असुरक्षित महसूस होता है। पूर्वी दिल्ली की एक फैक्ट्री में काम कर रहे सुभाष ने बताया कि मैं नई दिल्ली के पिलंजी गांव में रहता हूं। साइकिल से भी फैक्ट्री जाता हूं। लेकिन मौजूदा समय में दिल्ली में साइकिल ट्रैक की कोई बेहतर बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन से विकास मार्ग तक बने साइकिल ट्रैक और अन्य जगहों पर मौजूद साइकिल ट्रैक में अतिक्रमण के कारण दिक्कतें होती हैं। दूसरे स्थानों पर स्थित साइकिल ट्रैक पर अवैध तरीके से छोटी अस्थायी दुकानें व रेहड़ी पटरी भी लगाई जा रही हैं। जिससे इन ट्रैक पर साइकिल चला ही नहीं सकते हैं।-----------------------सरकारी प्रयास:यमुना डूब क्षेत्र में साइकिल कॉरिडोर बनाने का कार्य डीडीए ने शुरू कियादिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) साइकिल कॉरिडोर व साइकिल वॉक की दो परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें बायोडायवर्सिटी पार्क, डीडीए पार्कों व अन्य क्षेत्र में 201 किलोमीटर के साइकिल वॉक को पांच चरणों में पूरा किया जाना है। इस पर पहले चरण पर डीडीए प्रशासन ने काम जारी है। इसके अलावा यमुना डूब क्षेत्र में 95 किलोमीटर के साइकिल कॉरिडोर का कार्य शुरू हो चुका है। इसमें डीडीए प्रशासन यमुना डूब क्षेत्र में साइकिल कॉरिडोर परियोजना के तहत ओल्ड रेलवे ब्रिज से और एनएच-24 में 24 किलोमीटर का साइकिल कॉरिडोर का कार्य इसी वर्ष पूरा करेगा। इसके लिए कार्य शुरू हो चुका है। डीडीए अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना को यमुना डूब क्षेत्र के असिता पूर्वी पार्क, यमुना वाटिका पार्क, कालिंदी कुंज बायोडायवर्सिटी पार्क, अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क से भी जोड़ा जाएगा। इस प्रोजेक्ट से यमुना किनारे पर्यावरणीय ढांचे को मजबूत करने में निर्णायक साबित होगा। इसके अलावा दिल्ली में सार्वजनिक पहुंच और पारिस्थितिकी सुरक्षा उपाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट के बाकी चरणों को एक से डेढ़ वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। असिता पार्क में फरवरी में 1300 मीटर का साइकिल ट्रैक शुरू हुआसाइकिल वॉक का काम जारी हैडीडीए ने 201 किलोमीटर के साइकिल ट्रैक का निर्माण चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाई है। इस संबंध में डीडीए अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण का कार्य जारी है। इसके तहत 36 किलोमीटर का साइकिल वॉक संगम विहार से मालवीय नगर मेट्रो स्टेशन तक बनेगा। इसके अलावा दूसरे चरण में 65 किमी में राजेंद्र प्लेस, नारायणा, राजेंद्र नगर, तालकटोरा स्टेडियम, बुद्धा जयंती पार्क, दिल्ली कैंट, धौला कुआं से वसंत विहार जैसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इसके बाद अन्य क्षेत्रों में तीसरे चरण में 46 किमी, चौथे चरण में 25 किमी और पांचवें चरण में 29 किमी के रूट पर साइकिल वॉक का निर्माण कार्य होगा।
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