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भारत को प्रभावित करना चाहते हैं पश्चिम के लोग : जयशंकर

विदेश मंत्री ने कहा, वे हमें चुनाव कराने के बारे में व्याख्यान दे रहे हैं

भारत को प्रभावित करना चाहते हैं पश्चिम के लोग : जयशंकर
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीWed, 15 May 2024 12:15 AM
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विदेश मंत्री ने कहा, वे हमें चुनाव कराने के बारे में व्याख्यान दे रहे हैं
विदेश मंत्री ने कोलकाता में आयोजित में कार्यक्रम को संबोधित किया

कोलकाता, एजेंसी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम में कई लोग भारत को प्रभावित करना चाहते हैं। जिन देशों को अपने चुनाव के नतीजे तय करने के लिए अदालत जाना पड़ता है, वे हमें चुनाव कैसे कराना है, इस बारे में व्याख्यान दे रहे हैं। जयशंकर 2020 के चुनाव परिणामों को पलटने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चल रही कानूनी लड़ाई का परोक्ष संदर्भ दे रहे थे, जिसमें वह जो बिडेन से हार गए थे। विदेश मंत्री मंगलवार को यहां ‘इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

जयशंकर ने कहा कि पश्चिम में कई लोग भारत को प्रभावित करना चाहते हैं। क्योंकि इनमें से कई देशों को लगता है कि उन्होंने पिछले 70-80 वर्षों से इस दुनिया को प्रभावित किया है। ऐसे पश्चिमी देश हैं जो वास्तव में महसूस करते हैं कि उन्होंने पिछले 200 वर्षों से दुनिया को प्रभावित किया है। आप किसी ऐसे व्यक्ति से कैसे उम्मीद कर सकते हैं जो उस स्थिति में है कि वह उन पुरानी आदतों को इतनी आसानी से छोड़ देगा। विदेश मंत्री कनाडा और अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ चुनाव में हस्तक्षेप और विदेशी धरती पर अभियान चलाने के लगाए गए आरोपों पर एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

जयशंकर ने कहा कि ये देश एक ऐसा भारत देख रहे हैं जो एक मायने में उनकी छवि के अनुरूप नहीं है कि भारत कैसा होना चाहिए। कुछ मामलों में पश्चिमी मीडिया ने खुले तौर पर उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों का समर्थन किया है, वे अपनी प्राथमिकता नहीं छिपाते हैं। वे आपको प्रतिष्ठित रूप से नुकसान पहुंचाएंगे, कोई एक सूचकांक लाएगा और आपको उसमें डाल देगा। वे एक निश्चित वर्ग चाहते हैं लोग वास्तव में भारत पर शासन करने के लिए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि जब भारतीय आबादी अन्यथा महसूस करती है तो वे परेशान हो जाते हैं।

चीन से लगी सीमा पर सैनिकों की तैनाती असामान्य :

विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती असामान्य है और देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। भारत ने गलवान झड़प का जवाब वहां अपने सैनिकों को तैनात करके दिया। विदेश मंत्री ने कहा, चीनियों ने 2020 में कई समझौतों का उल्लंघन करते हुए हमारी सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों को तैनात किया। उन्होंने यह ऐसे वक्त किया जब हमारे यहां कोविड लॉकडाउन लागू था। गलवान घाटी झड़प में कुल 20 भारतीय सैन्य कर्मी शहीद हुए थे। भारत-चीन सीमा पर चार दशकों में यह सबसे भीषण झड़प थी।

जयशंकर ने कहा कि भारत ने भी (सीमा पर) सैनिकों को तैनात कर जवाब दिया और चार साल से गलवान में सैनिकों की तैनाती वाले सामान्य मोर्चों से आगे भारतीय सैनिक तैनात हैं। उन्होंने कहा, एलएसी पर यह बहुत ही असमान्य तैनाती है। दोनों देशों के बीच तनाव के मद्देनजर, भारतीय नागरिक होने के नाते हममें से किसी को भी देश की सुरक्षा की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, यह मौजूदा समय की चुनौती है। विदेश मंत्री ने कहा कि एक आर्थिक चुनौती भी है, जो विगत वर्षों में विनिर्माण और बुनियादी ढांचा के क्षेत्रों की अनदेखी के कारण है। भारतीय कारोबार जगत चीन से इतनी खरीद क्यों कर रहा है। क्या किसी दूसरे देश पर इतना निर्भर रहना अच्छा होगा?

संवेदनशील क्षेत्रों में हम सावधान रहेंगे :

जयशंकर ने कहा कि विश्व में आर्थिक सुरक्षा पर एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है। उन्होंने कहा, आज देशों को ऐसा लगता है कि कई प्रमुख व्यवसायों को देश के भीतर ही रहना चाहिए। आपूर्ति शृंखला छोटी और विश्वसनीय होनी चाहिए। संवेदनशील क्षेत्रों में, हम सावधान रहेंगे, राष्ट्रीय सुरक्षा दायित्व है। रूस के बारे में विदेश मंत्री ने कहा कि उसके साथ भारत का संबंध सकारात्मक है। जयशंकर ने कहा कि एक आर्थिक कारक भी है क्योंकि रूस तेल, कोयला और विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न है, जिसे भारत प्राप्त कर सकता है। पूर्व में, विनिर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर उपयुक्त ध्यान नहीं दिया गया और पूर्ववर्ती ‘लाइसेंस और परमिट राज ने विकास को बाधित किया।

पीओके भारत का अंग :

विदेश मंत्री ने पीओके में मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति के बारे में भी बात की, जहां छिटपुट हिंसा और नागरिक अशांति हुई है। उन्होंने कहा कि आज, पीओके में कुछ हलचलें हो रही हैं। इसका विश्लेषण बहुत जटिल है, लेकिन निश्चित रूप से मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि पीओके में रहने वाला कोई व्यक्ति अपनी स्थिति की तुलना जम्मू-कश्मीर में रहने वाले किसी व्यक्ति से कर रहा है और कह रहा है कि आजकल वहां के कितनी तरक्की कर रहे हैं। वे कब्जे में होने या बुरी तरह से भेदभाव किए जाने की भावना को जानते हैं। यह (पीओके) हमेशा भारत रहा है और यह हमेशा भारत रहेगा।

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