‘कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने से भाजपा-टीएमसी को फायदा’
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अकेले लड़ने के निर्णय को भाजपा और टीएमसी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इससे चुनाव पूरी तरह भाजपा बनाम टीएमसी हो जाएगा। टीएमसी से निराश मतदाता अब भाजपा को एकमात्र विकल्प मान सकते हैं।

कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले को राज्य के नेता भाजपा और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को फायदा पहुंचाने वाला मान रहे हैं। उनका मानना है कि वामदलों-कांग्रेस के अलग होने से बंगाल में तीसरे ध्रुव की जगह समाप्त हो चुकी है। वर्ष 2006 के बाद इस विधानसभा चुनाव में पहली बार कांग्रेस राज्य की सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। हालांकि, अधीर रंजन चौधरी जैसे वरिष्ठ नेताओं ने गठबंधन जारी रखने का समर्थन किया था। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव अब पूरी तरह भाजपा बनाम टीएमसी होगा।
कहा, नेतृत्व का मानना है कि हमारे पास यहां खोने के लिए अब कुछ नहीं बचा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि टीएमसी से निराश मतदाताओं के पास अब सिर्फ भाजपा ही एकमात्र विकल्प है। वहीं, टीएमसी के एक नेता ने कहा कि अल्पसंख्यक वोट पार्टी को मिल सकते हैं, जबकि सत्ताविरोधी वोट सीधे भाजपा की ओर जा सकते हैं। एक अन्य नेता ने भी कहा कि सत्ताविरोधी वोट कांग्रेस-वामदल में बंट सकते थे, जो अब नहीं होगा। वहीं, सीपीआई (एम) नेता सुजान चक्रवर्ती मानते हैं कि बंगाल में त्रिकोणीय मुकाबले में सत्ताधारी पार्टी को लाभ होता रहा है, लेकिन इस बार ऐसी स्थिति नहीं है। ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन के मोहम्मद कमरुज्जमां ने कहा कि जो मतदाता पहले कांग्रेस-वामदलों के साथ थे, अब टीएमसी का साथ दे सकते हैं।
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