छत्तीसगढ़: बिजली के लिए प्रधानमंत्री को खून से लिखीं चिट्ठियां

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गरियाबंद के आठ ग्राम पंचायतों के निवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से लिखे पत्र भेजकर ग्रिड से बिजली आपूर्ति की मांग की है। ग्रामीण बताते हैं कि सौर ऊर्जा प्रणालियां पर्याप्त नहीं हैं। प्रदर्शन के दौरान 700-800 पत्र स्पीड पोस्ट से भेजे गए, जबकि 20 सालों से पारंपरिक बिजली की मांग कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़: बिजली के लिए प्रधानमंत्री को खून से लिखीं चिट्ठियां

गरियाबंद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित आठ ग्राम पंचायतों के निवासियों ने ग्रिड से बिजली आपूर्ति की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से लिखे पत्र भेजे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में स्थापित सौर ऊर्जा प्रणालियां पर्याप्त नहीं हैं और अधिकांश समय ठीक से काम नहीं करतीं। बुधवार को गरियाबंद जिले के राजापड़ाव क्षेत्र स्थित अड़गड़ी गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए और अपनी लंबे समय से लंबित मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन की जानकारी

प्रदर्शन के दौरान एक डॉक्टर ने ग्रामीणों का रक्त लिया, जिससे उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र लिखे गए। ग्रामीणों के अनुसार, ऐसे 700-800 पत्र स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजे गए हैं। क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि आठ पंचायतों के लगभग 48 गांवों के लोगों ने इस अभियान में भाग लिया।

सौर ऊर्जा की असफलता

ग्रामीणों का आरोप है कि सौर ऊर्जा प्रणाली कई बार एक घंटे में केवल कुछ मिनट ही काम करती है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति, कृषि और दैनिक जीवन प्रभावित होता है। गरियाबंद के एडीएम पंकज दाहिरे ने बताया कि यह मुद्दा हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समक्ष उठाया गया था और इस पर उच्च स्तर पर विचार किया जा रहा है। वहीं, टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरूण जैन ने कहा कि संरक्षित वन क्षेत्र में बिजली लाइनों, सड़कों और स्थायी ढांचागत विकास से आवासीय क्षेत्रों का विखंडन हो सकता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा है。

बच्चों की शिक्षा पर प्रभाव

- आज भी अंधेरे में पढ़ते हैं बच्चे

लोगों ने बताया कि प्रधानमंत्री को बताया गया है कि बच्चों को आज भी अंधेरे में पढ़ाई करनी पड़ती है और मरीजों को रात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि ग्रामीण वन्यजीव संरक्षण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि जंगल और वनवासियों के सह-अस्तित्व की मांग कर रहे हैं।

लंबे समय से चल रही मांग

- 20 साल से कर रहे हैं मांग

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीण पतंग मरकाम ने दावा किया कि वर्ष 2006 से हजारों आवेदन, ज्ञापन और आंदोलनों के बावजूद पारंपरिक बिजली की मांग पूरी नहीं हुई है। हाल ही में राज्य सरकार के 'सुशासन तिहार' अभियान के दौरान भी यह मुद्दा उठाया गया था, लेकिन उन्हें बताया गया कि मामला केंद्र स्तर पर लंबित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्राम पंचायतों के निवासियों ने किसके पास बिजली आपूर्ति की मांग की?
ग्राम पंचायतों के निवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास बिजली आपूर्ति की मांग की।
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