
उपराष्ट्रपति चुनाव: मेल-मिलाप और सौहार्दपूर्ण मतदान के बीच सेंधमारी की कोशिश
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान के दौरान सांसदों में सौहार्दपूर्ण माहौल देखा गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एक साथ पहुंचे। थरूर ने कहा कि उन्होंने अपने...
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए मतदान के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद एक दूसरे से हास-परिहास और मेल-मिलाप करते दिखे। मतदान बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में हुआ। मतदान के लिए जाते हुए कई प्रदेशों के सांसदों ने मकर द्वार पर समूह में फोटो भी खिंचवाई। विचारधारा के आधार पर अपने-अपने उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए जाते हुए सांसदों ने एक दूसरे से समर्थन हासिल होने का दावा भी किया। मतदान के दौरान नेताओं की बयानबाजी भी चलती रही। उपराष्ट्रपति पद के लिए संसद भवन में मतदान की प्रक्रिया सुबह 10 बजे शुरू हो गई थी।
दोपहर तक बड़ी संख्या में सांसद मतदान के लिए पहुंच गए थे। हाथों में हाथ डाले पहुंचे नेता केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे संसद भवन में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान देने एक साथ पहुंचे। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे का हाथ थामा हुआ था और चेहरे पर मुस्कान थी। ऐसे ही गिरिराज सिंह ने सपा के सांसदों को गले लगाया। उन्होंने तो अपने पक्ष में मतदान का दावा भी कर डाला। हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जवाब में गिरिराज पर कटाक्ष किया और कहा-अच्छा है संसद में रिवॉल्वर नहीं है। उधर, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी मतदान के दौरान विपक्षी सांसदों से पूरे गर्मजोशी के साथ मिलते रहे। थरूर ने कहा, अंतरात्मा नहीं अपना उम्मीदवार कांग्रेस सांसद थरूर जब वोट देकर निकले तो उनसे जब पूछा गया कि क्या आपने भी अंतरात्मा के आधार पर वोट दिया, इस पर उन्होंने कहा अंतरात्मा नहीं अपना उम्मीदवार। हालांकि, थरूर अंदर मतदान की व्यवस्था से खिन्न दिखे। उन्होंने कहा, अंदर उन्हें डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा। अखिलेश यादव ने कहा-विचारधारा का सवाल अपने सांसदों के साथ मतदान कर बाहर आने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि नंबर सबको पता है लेकिन बात विचारधारा की है। उन्होंने क्रॉस वोटिंग के दावे पर कहा कि मुझे नहीं पता लेकिन अगर कोई दावा कर रहा है कि इधर से उधर जाएंगे तो उधर से भी कुछ लोग इधर आ सकते हैं। संघ या संविधान राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि सवाल यह है कि संघ की जीत होगी या संविधान की। उन्होंने कहा अगर लोग संविधान के पक्ष में खड़े नहीं होते हैं तो यह चिंता की बात होगी। चुनाव के दौरान दोनों तरफ से अपनी-अपनी जीत के दावे होते रहे। हालांकि, नंबर गेम की वजह से एनडीए सांसदों का आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। सारी चर्चा इस बात पर थी कि कहां कितनी सेंधमारी हो पाती है।

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