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अपडेट : नारियल के रेशे ‘कॉयर’ को दुनिया में मिले पहचान

अपडेट : नारियल के रेशे ‘कॉयर’ को दुनिया में मिले पहचान

संक्षेप:

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कोल्लम में कहा कि कॉयर भारत की पहचान और सतत विकास का प्रतीक है। उन्होंने उद्योग से जुड़े लोगों से अपील की कि कॉयर को वैश्विक ब्रांड बनाया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षा में वैज्ञानिक सोच और उत्कृष्ट प्रशासक क्षमता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Nov 03, 2025 10:24 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नोट : पूर्व में छात्रों को केवल नौकरी के लिए तैयार करने पर न हो फोकस शीर्षक से जारी खबर को इसी में इनसेट लगा दिया है। - उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने की अपील कोल्लम, एजेंसी। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को नारियल के छिलके से बनने वाले प्राकृतिक रेशे (कॉयर) को भारत की पहचान और सतत विकास का प्रतीक बताया। उन्होंने उद्योग से जुड़े लोगों से अपील की कि देश में निर्मित होने वाले इस प्राकृतिक रेशे को पूरी दुनिया में एक वैश्विक ब्रांड के तौर पर पहचान मिले। पर्यावरण अनुकूल है ‘कॉयर’ उपराष्ट्रपति ने यह बात केरल के कोल्लम जिले में फेडरेशन ऑफ इंडियन कॉयर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सदस्यों से कहा कि दुनिया में अब पर्यावरण के अनुकूल चीजों की मांग बढ़ रही है, इसलिए भारत के पास बड़ा मौका है कि वह अपने कॉयर उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगे बढ़ाए।

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उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को मिलाकर कॉयर की गुणवत्ता और पहचान दोनों बढ़ाई जा सकती हैं। राधाकृष्णन ने कॉयर निर्यातकों और उद्योग से जुड़े लोगों की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी मेहनत से भारत का कॉयर उद्योग लगातार आगे बढ़ रहा है। जब राधाकृष्णन 2016 से 2020 तक कॉयर बोर्ड के चेयरमैन थे, तब भारत के कॉयर निर्यात में दोगुनी बढ़ोतरी हुई थी। --------- - छात्रों को केवल नौकरी के लिए तैयार करने पर न हो फोकस उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि हमें ऐसे कॉलेजों की आवश्यकता है, जो छात्रों को केवल नौकरी के लिए तैयार न करें, बल्कि हमारा फोकस वैज्ञानिक सोच और उत्कृष्ट प्रशासक क्षमता वाले नागरिक तैयार करने पर होना चाहिए। यह बातें उन्होंने केरल के कोल्लम स्थित फातिमा माता नेशनल कॉलेज के हीरक जयंती समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को आलोचनात्मक चिंतन और वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करना है। शिक्षा वह धन है, जिसकी तुलना किसी भी भौतिक संपत्ति से नहीं की जा सकती है। देश की शैक्षिक प्रगति में केरल के योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्यों की साक्षरता दर 40 प्रतिशत तक भी नहीं थी, तब केरल 90 प्रतिशत पर था। यह राज्य के योगदान को बताता है। इसका श्रेय हमारी पिछली पीढ़ियों को जाता है। छात्रों को सोशल मीडिया के प्रयोग को सीमित करने की सलाह देते हुए कहा कि हमें किसी भी चीज की आदत नहीं डालनी चाहिए, नहीं तो एक समय के बाद यह हम पर हावी हो जाती है। साथ ही, नशे से दूर रहने और समाज में इसके खिलाफ जागरूक फैलाने की अपील की।