जेपी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वेदांता समूह

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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वेदांता लिमिटेड ने अदाणी समूह की जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश पर रोक लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय में अपील की है। अदाणी एंटरप्राइजेज ने भी एक कैविएट दायर किया है। एनसीएलएटी ने वेदांता की याचिका को खारिज कर दिया था।

 जेपी मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वेदांता समूह

नई दिल्ली, एजेंसी। खनन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की सफल बोली को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के आदेश पर रोक लगाने की अपील करते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वेदांता ने 25 मार्च को अपनी अपील दायर की। इससे एक दिन पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने अदाणी की समाधान योजना के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इस बीच, अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने भी शीर्ष न्यायालय में एक 'कैविएट' दायर की है।

कैविएट एक कानूनी नोटिस है जिसमें अदालत से अनुरोध किया जाता है कि दूसरे पक्ष की याचिका पर कोई भी आदेश देने से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने 24 मार्च को वेदांता की उस याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया था, जिसमें राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि, एनसीएलएटी ने जेएएल के ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की है।वेदांता समूह ने दलील दी है कि उसने जेएएल के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई थी। वेदांता की बोली 16,726 करोड़ रुपये की थी, जबकि अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली 14,535 करोड़ रुपये थी। वेदांता का तर्क है कि दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त संपत्ति का अधिकतम मूल्य प्राप्त करना है, लेकिन ऋणदाताओं ने कम मूल्य वाली बोली को चुना।

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