
वंदे मातरम का एक-एक शब्द मां को समर्पित है : धर्मेंद्र प्रधान
संक्षेप: नई दिल्ली में रामजस कॉलेज में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वंदे मातरम का हर शब्द मां को समर्पित है। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष और वंदे मातरम की ऐतिहासिक भूमिका पर जोर दिया, यह कहते हुए कि यह रचना भारतीयों के लिए कालजयी है।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर रामजस कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में सोमवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वंदे मातरम का एक-एक शब्द मां को समर्पित है और मां कभी सांप्रदायिक नहीं हो सकती। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 19वीं सदी के प्रारंभ से ही भारत ने कभी अंग्रेजों को सहन नहीं किया था। जगह-जगह पर उनके खिलाफ विद्रोह का माहौल बना हुआ था। 1857 से पहले भी देश के विभिन्न भागों में विद्रोह की घटनाएं हुईं। मंत्री ने कहा कि भारत के लोगों ने एक लंबी लड़ाई के बाद 1947 में देश को आजाद करवाया।

यह आजादी एक क्षण में नहीं आई, बल्कि अनेक प्रयासों के बाद 1947 में ये परिस्थिति हमें मिली। उस स्थिति में जो मुख्य घटनाएं हुई, उसी दौरान राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने के लिए बंकिम चंद्र चटर्जी के द्वारा लिखी गई आनंद मठ की ये कविता वंदे मातरम चेतना की वाहक है, जिसने देश को एकत्रित किया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वंदे मातरम भारतीयों के लिए कालजयी रचना है। वंदे मातरम के गान की आवश्यकता इसलिए पड़ी है कि दुनिया में भारत को एक बार फिर से मजबूत करना है। तब आजादी के लिए हमने वंदे मातरम गाया था, इस बार हम एकत्रित होकर समृद्धि के लिए वंदे मातरम गा रहे हैं।

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