व्यापार जांच के नाम पर भारी शुल्क थोपने की तैयारी कर रहा अमेरिका
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 11 मार्च को भारत और चीन सहित 16 देशों की नीतियों की जांच के लिए नई जांच शुरू की है। ट्रंप प्रशासन ने 10% आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। जांच में व्यापार अधिशेष, सब्सिडी और श्रम मानकों की पड़ताल होगी। भारत के कुछ क्षेत्रों में निर्यात अधिशेष की संभावना है।

नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 11 मार्च को घोषणा की कि उसने भारत और चीन सहित 16 देशों की नीतियों एवं औद्योगिक प्रथाओं की जांच के लिए 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301(बी)के तहत नई जांच शुरू की है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्क को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इस नई जांच की शुरुआत को व्यापार निगरानी में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जुलाई से लग सकता है नया टैरिफट्रंप प्रशासन चाहता है कि ये जांच जुलाई से पहले पूरी हो जाए। फिलहाल फरवरी में लगाए गए 10% अस्थायी टैरिफ 150 दिनों के लिए लागू हैं। योजना के अनुसार 15 अप्रैल तक सार्वजनिक टिप्पणियां ली जाएंगी और करीब पांच मई को सार्वजनिक सुनवाई होगी। इसके बाद नए टैरिफ लागू करने पर फैसला हो सकता है।जांच के दायरे के अहम बिंदुजांच में कुछ खास चीजें देखी जाएंगी जैसे-लगातार बड़ा व्यापार अधिशेष, सरकार की ओर से दी जा रही भारी सब्सिडी, राज्य संचालित कंपनियों की गैर-व्यावसायिक गतिविधियां, मजदूरी का दबाव और कमजोर पर्यावरण व श्रम मानक, ट्रंप प्रशासन के मुताबिक इन सब कारणों से वैश्विक बाजार में सस्ता माल बढ़ता है और अमेरिकी उद्योगों पर दबाव पड़ता है।जांच में व्यापार नीतियों की पड़ताल होगीयूएसटीआर के अनुसार, जांच के दौरान यह तय किया जाएगा कि इन देशों की नीतियां और प्रथाएं अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं या नहीं और क्या वे अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालती हैं या उसे सीमित करती हैं। इस्पात, एल्युमीनियम, वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक, रसायन, मशीनरी, सेमीकंडक्टर और सौर मॉड्यूल जैसे क्षेत्र जांच के दायरे में हैं।किन देशों के खिलाफ हो रही है जांचजांच में 15 देशों और 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ को शामिल किया गया है। इन देशों में भारत, चीन, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ताइवान, बांग्लादेश, मेक्सिको और जापान शामिल हैं।बंधुआ मजदूरी पर भी कार्रवाईअमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने संकेत दिया कि गुरुवार से एक और जांच शुरू होगी, जो विशेष रूप से बंधुआ मजदूरी से तैयार किए गए सामानों पर केंद्रित होगी। इस जांच में दुनिया भर के 60 से अधिक देश शामिल हो सकते हैं। वाशिंगटन चाहता है कि उसके व्यापारिक भागीदार भी बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने के मामले में अमेरिकी कानूनों का पालन करें। अमेरिका का आरोप है कि चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुस्लिम समुदाय के लोगों को श्रम शिविरों में काम कराया जाता है। हालांकि बीजिंग इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है।भारत के लिए इस जांच के क्या मायनेजीटीआरआई के अनुसार जांच में भारत के कुछ क्षेत्रों में संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता या निर्यात अधिशेष होने की संभावना बताई गई है। इनमें सौर मॉड्यूल, पेट्रोरसायन, इस्पात, वस्त्र, स्वास्थ्य संबंधी वस्तुएं, निर्माण सामग्री व वाहन उत्पाद शामिल हैं। भारत की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता घरेलू मांग से लगभग तीन गुना हो चुकी है, जिससे निर्यात आधारित उत्पादन अधिशेष की संभावना दिखती है। इस बीच निर्यातकों के शीर्ष संघ भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि यह जांच मुख्य रूप से वैश्विक विनिर्माण में अतिरिक्त क्षमता की चिंता से निपटने के लिए है।
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