सोने से सुरक्षित निवेश का दर्जा छीन रहा अमेरिकी डॉलर

Apr 06, 2026 06:34 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share

मिंट का लोगो लगाएं वामना सेठी नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते दुनियाभर

सोने से सुरक्षित निवेश का दर्जा छीन रहा अमेरिकी डॉलर

नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते दुनियाभर में सुरक्षित निवेश की रणनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आमतौर पर युद्ध या संकट के समय लोग सोने में निवेश करते हैं, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में निवेशक अमेरिकी डॉलर को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और ब्याज दरें ऊंची रहने से डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि सोने में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। सोने ने देखी ऐतिहासिक गिरावटयुद्ध शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में पहले तेज उछाल आया था लेकिन बाद में 40 साल की ऐतिहासिक गिरावट भी देखी गई।

सोना अपने उच्चतम स्तर से अब तक करीब 15 प्रतिशत टूट चुका है। इस साल इसने 5,595.51 डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर को छुआ था। अब फिसलकर 4700 डॉलर के करीब बना हुआ है। इससे पहले यह 4,200 डॉलर तक गोता लगा चुका है। इस गिरावट ने कई निवेशकों को हैरान कर दिया है, क्योंकि खासकर वे लोग जो ऊंचे दाम पर निवेश करने आए थे, अब उन्हें खासा नुकसान हुआ है।अमेरिकी डॉलर फिलहाल सबसे मजबूतवहीं, अमेरिका सीधे तौर पर युद्ध में शामिल है, फिर भी डॉलर सूचकांक में मजबूत वापसी हुई है। वर्ष 2025 में लगभग 10 प्रतिशत गिरने के बाद मार्च 2026 में डॉलर सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। इसका मतलब है कि कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के समय डॉलर अब भी दुनिया की सबसे मजबूत मुद्रा बना हुआ है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि इस समय निवेशक सोने की बजाय नकद और डॉलर में पैसा रखना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। इसके अलावा एक और कारण अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें हैं। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक सोने की बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों और डॉलर में निवेश करना पसंद करते हैं। सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची ब्याज दर के समय सोने की मांग कम हो जाती है।डॉलर सुरक्षित निवेश क्यों बना?एसएस वेल्थस्ट्रीट की संस्थापक सुगंधा सचदेवा का कहना है कि डॉलर में इस वक्त आई मजबूती का सबसे बड़ा कारण पेट्रो-डॉलर प्रणाली है। दुनिया में कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार डॉलर में होता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने तेल की आपूर्ति को बाधित किया है, खासकर होर्मुज जलमार्ग में लगातार रुकावट के कारण इसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इससे डॉलर की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है और यह महंगा हो गया है। इसका सीधा असर सोने की खरीदारी पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया है, जिससे इसकी मांग घटी है और और कीमतों में तेज गिरावट आई है। इस स्थिति में फिलहाल सोना अब सुरक्षित निवेश नहीं माना जा रहा है और निवेशक नुकसान की भरपाई के लिए डॉलर में निवेश कर रहे हैं।सोने की अहमियत खत्म नहीं होगीविशेषज्ञों का कहना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची बनी रहेगी, महंगाई का डर बना रहेगा और बॉन्ड यील्ड ऊंची रहेगी, तब तक अमेरिकी डॉलर को सोने पर बढ़त मिल सकती है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी सोने की अहमियत खत्म नहीं होगी। हो सकता है कि कुछ समय के लिए डॉलर मजबूत होने और ब्याज दर ऊंची रहने के कारण सोना कमजोर रहे, लेकिन लंबे समय में सोना आर्थिक संकट, मुद्रा कमजोरी और वैश्विक अस्थिरता के खिलाफ सुरक्षा देने वाला निवेश बना रहेगा।इसलिए मजबूत हुआ डॉलर- कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़त- दुनियाभर में महंगाई का दबाव बढ़ा- ब्याज दरों में ऊंची ब्याज दरों की आशंका

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।