अमेरिकी टैरिफ से भारतीय सोलर उद्योग को झटका
अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सोलर उत्पादों पर 126 प्रतिशत नया टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। इससे भारतीय सोलर पैनल उद्योग को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका का यह कदम अमेरिकी सोलर कंपनियों की शिकायतों के बाद आया है। अब भारत को नए बाजारों की तलाश करनी होगी, जैसे कि यूरोप।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सोलर उत्पादों पर 126 प्रतिशत नया टैरिफ लगाने का फैसला लिया है, जिसे भारतीय सोलर पैनल उद्योग के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पहले से ही अधिक उत्पादन और कीमतों के दबाव से जूझ रहे सोलर पैनेल उद्योग पर अमेरिका टैरिफका सीधा असर पड़ने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में शुल्क (प्रारंभिक ड्यूटी) लागू करने की घोषणा की। बताया जा रहा है कि यह फैसला अमेरिकी सोलर कंपनियों की शिकायतों के बाद लिया गया, जिसमें उनका आरोप था कि चीन से जुड़ी कंपनियां दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में सब्सिडी वाले सोलर उत्पाद अमेरिकी बाजार में भेज रही हैं, जिसमें भारत भी शामिल है।
बीते कुछ वर्षों में भारतीय सोलर कंपनियों ने तेजी से उत्पादन क्षमता बढ़ाई है और उनका बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार को निर्यात किया जाता था। अब नए टैरिफ के कारण यह बड़ा बाजार बंद होने की स्थिति में आ गया है। हालांकि सरकार उद्योग को राहत देने के लिए वैल्यू चेन मजबूत करने की दिशा में पहले से काम कर रही है। जून से नया नियम लागू होगा, जिसके तहत सभी सोलर मॉड्यूल में देश में बने सेल का इस्तेमाल अनिवार्य होगा। इससे घरेलू निर्माताओं को कुछ समर्थन मिलने की उम्मीद है। बीते वित्तीय वर्ष अमेरिका द्वारा आयात किए गए कुल सोलर पैनल में 55-60 फीसदी के हिस्सेदारी भारतीय सोलर पैनल की थी। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद अब भारत को नए बाजार तलाशने होंगे। इसमें यूरोप सबसे अहम माना जा रहा है। हाल में भारत ने यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौता भी किया है, जिसके लागू होने पर भारत यूरोप को सोलर पैनल उद्योग के लिहाज से बडे बाजार के तौर पर तैयार कर सकता है। भारत दुनिया का तीसरा सबे बड़ा उत्पादक भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश है। भारत, देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठा रहा है। इसमें सौर ऊर्जा प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आई है। आयात को कम करने, स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने अप्रैल, 2022 में आयातित सौर सेल और मॉड्यूल पर मूल सीमा शुल्क लगाया था। उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के विनिर्माण के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत देश में लगभग 48.3 गीगावाट की पूर्ण/आंशिक रूप से एकीकृत सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए अनुबंध पत्र जारी किए गए हैं। चीन से आयात घटकर आधा हुआ इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 26.6 गीगावाट सौर पीवी मॉड्यूल, 10.5 गीगावाट सौर पीवी सेल तथा करीब दो गीगावाट इन्गोट-वेफर विनिर्माण क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसके अलावा, एक योजना के तहत कुल 39,973 मेगावाट क्षमता वाले 55 सौर पार्क को भी मंजूरी दी गई है। भारत में सौर मॉड्यूल का आयात 2024-25 में घटकर 2.15 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया जो 2023-24 में 4.35 अरब डॉलर था। चीन से आयात भी पिछले वित्त वर्ष में घटकर 1.7 अरब डॉलर रह गया, जो 2023-24 में 2.85 अरब डॉलर था। भारत जिन अन्य देशों से आयात करता है उनमें वियतनाम, हांगकांग, मलेशिया और सिंगापुर शामिल हैं। सौर कंपनियों के शेयर धड़ाम अमेरिका के कुछ भारतीय सौर उत्पादों पर 125.87 प्रतिशत का प्रारंभिक प्रतिकारी शुल्क लगाए जाने की घोषणा के बाद सौर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के शेयर में बुधवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई पर वारी एनर्जीज लिमिटेड का शेयर 10.53 प्रतिशत लुढ़क गया जबकि प्रीमियर एनर्जीज लिमिटेड के शेयर में 5.86 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, विक्रम सोलर लिमिटेड के शेयर में 10.49 प्रतिशत और स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड में 2.02 प्रतिशत की गिरावट आई। हालांकि विक्रम सोलर, प्रीमियर एनर्जीज और वारी एनर्जीज ने कहा कि इस शुल्क का उद्योग पर कोई महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और इसका असर सीमित रहेगा।
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