ट्रेंडिंग न्यूज़

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ NCR नई दिल्लीयूपीएससी अभ्यर्थियों ने सरकार से अतिरिक्त अवसर मांगा

यूपीएससी अभ्यर्थियों ने सरकार से अतिरिक्त अवसर मांगा

कोविड-19 से उपजी स्थिति ने राजधानी सहित देश में प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्रों को भी प्रभावित किया है। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी...

यूपीएससी अभ्यर्थियों ने सरकार से अतिरिक्त अवसर मांगा
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीFri, 09 Dec 2022 04:40 PM
ऐप पर पढ़ें

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। कोविड-19 से उपजी स्थिति ने राजधानी सहित देश में प्रतियोगी परीक्षा देने वाले छात्रों को भी प्रभावित किया है। संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र अतिरिक्त परीक्षा के मौके देने की मांग कर रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि देश के 100 से अधिक सांसदों के अलावा इस मामले की समिति की रिपोर्ट में भी छात्रों को अवसर देने की बात कही गई है, लेकिन अब तक यह अवसर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षा के छात्र सुभाष ठाकुर का कहना है कि कोरोना महामारी के दो वर्षों (2020 और 2021) में लॉकडाउन, कोविड नियमों के अनुपालन, शिक्षण संस्थानों का बंद होना, ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी, आवश्यक अध्ययन सामग्रियों की अनुपलब्धता तथा स्वास्थ्य कारणों से अभ्यर्थियों को देश की सबसे कठिन परीक्षा की समुचित तैयारी करने का अवसर ही नहीं मिल सका। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थीगण इन्हीं दो वर्षों में निर्धारित उम्र सीमा एवं अवसरों की संख्या को पार कर चुके हैं। अब वे इन परीक्षाओं में बैठने की पात्रता खो चुके हैं। कोरोना महामारी से हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति को देखते हुए प्रतियोगी छात्रगण केन्द्र सरकार से यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा सहित सभी केन्द्रीय भर्ती परीक्षाओं में दो अतिरिक्त मौके और तदनुसार आयु सीमा में छूट देने की मांग कर रहे हैं।

उनका कहना है कि इन वर्षों में छात्र समुदाय सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। जहां एक ओर असंख्य छात्रों ने अपने निकट संबंधियों को खोया, वहीं दूसरी ओर छात्र स्वयं भी इस महामारी के शिकार हुए। अनेक लोग फ्रंटलाइन वर्कर्स थे जिसके कारण उन्हें इन परीक्षाओं की तैयारी करने का उचित अवसर नहीं मिला। इन कारणों से कई अभ्यर्थी परीक्षा में ही नहीं बैठ पाये, जबकि कई छात्र आधी-अधूरी तैयारी के साथ परीक्षा में बैठे। इससे संविधान के अनुच्छेद-16 (लोक नियोजन में अवसर की समानता) का भी उल्लंघन हुआ है।

सरकार ने दी है छूट

प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थियों का कहना है कि केन्द्र सरकार ने कोरोना महामारी से हुए नुकसान की भरपाई हेतु हर वर्ग और हर क्षेत्र को कुछ न कुछ राहत अवश्य पहुंचाई है। मसलन, अग्निपथ योजना में अभ्यर्थियों को आयु सीमा में दो वर्षों की छूट तथा एसएससी जीडी के अभ्यर्थियों को आयु सीमा में तीन वर्षों की छूट प्रदान कर दी गई है। यहां तक कि एसएससी सीजीएल में ‘एज रेकनिंग पॉलिसी में बदलाव लाने से लाखों अभ्यर्थी लाभान्वित हुए हैं, लेकिन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रगण अबतक राहत से अछूते हैं। कई राज्यों ने अपने यहां आयु सीमा में छूट के साथ अवसर प्रदान किया है। यह एक ‘नीतिगत मामला है जो पूरी तरह से कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में है। केवल एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से ऐसा किया जा सकता है। इससे सरकार के ऊपर कोई वित्तीय बोझ भी नहीं आने वाला है। इससे पहले भी वर्ष 1979, 1990, 1992, 2014 और 2015 में यूपीएससी के द्वारा छूट दी जा चुकी है।

विभागीय संसदीय समिति ने भी की है सिफारिश

अभ्यर्थियों का कहना है कि भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली ‘विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने भी अपनी 112वीं रिपोर्ट में सिविल सेवा के आकांक्षियों को अतिरिक्त अवसर और आयु सीमा में छूट देने के लिए सरकार से अनुशंसा की है। समिति का यह भी कहना है कि सरकार एक विशेषज्ञ समिति का गठन करे जो इस बात का मूल्यांकन करे कि वर्तमान भर्ती प्रणाली ‘अंग्रेजी भाषी शहरी अभ्यर्थियों एवं गैर-अंग्रेजी भाषी ग्रामीण अभ्यर्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराता है या नहीं। साथ ही विशेषज्ञ समिति यह भी मूल्यांकित करे कि परीक्षा का वर्तमान पैटर्न प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों को एक समान स्तर उपलब्ध कराता है या नहीं।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।