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नई दिल्ली

अपडेट : चर्चा में चेहरा ::: नदी बचाने के लिए लड़ने वाली बोस्नियाई महिला को ग्रीन नोबेल अवार्ड

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:10 PM
अपडेट : चर्चा में चेहरा ::: नदी बचाने के लिए लड़ने वाली बोस्नियाई महिला को ग्रीन नोबेल अवार्ड

चर्चा में चेहरा ::: नदी बचाने के लिए लड़ने वाली बोस्नियाई महिला को ग्रीन नोबेल अवार्ड

चर्चा में चेहरा

क्रुसिका (बोस्निया), एजेंसी

नदी बचाने के लिए बोस्निया की महिला मैदा बिलाल को वर्ष 2021 का गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार दिया गया है। इस पुरस्कार को ग्रीन नोबेल भी कहा जाता है। मैदा के अलावा पांच अन्य पर्यावरण कार्यकर्ताओं को यह पुरस्कार दिया गया है।

बोस्निया की क्रुसिका नदी 150,000 लोगों के लिए मुख्य जल स्रोत है। 2016 में स्थानीय नगरपालिका ने स्थानीय समुदायों को सूचित किए बिना नदी के किनारे दो छोटे जल विद्युत संयंत्रों के निर्माण की अनुमति दे दी। अगस्त 2017 में 40 वर्षीय मैदा बिलाल ने इसी का विरोध शुरू किया। इस दौरान मैदा की पिटाई भी की गई। उसके 70 वर्षीय पिता को भी गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने गांव की 300 महिलाओं और पुरुष संग नदी पर प्रस्तावित लघु जल विद्युत संयंत्र को नहीं बनने देने के लिए बिलाल ने 500 दिनों तक पहरा दिया। बिलाल ने एक समाचार एजेंसी से कहा, हमने शारीरिक रूप से 503 दिनों तक 24 घंटे नदी की रक्षा की है। अगर जरूरत पड़ी तो हम और 5,300 दिनों तक पहरा देंगे।

वह बताती हैं, हमलोगों का कहना था कि जल विद्युत परियोजना पर्यावरण को बर्बाद कर देगी। इसके बाद उन्होंने पुलिस के हमले को भी सहन किया। पुलिस का कहना था कि सार्वजनिक शांति व्यवस्था का उल्लंघन करने के लिए उन्हें जबरन ले जाया गया। लेकिन वे लड़े, और डेढ़ साल बाद परमिट रद्द कर दिए जाने के बाद, पुल का नाम बदलकर महिलाओं के नाम पर रखा गया। बिलाल ने कहा, मैंने अपनी नौकरी खो दी, अपने दोस्तों को खो दिया, मेरी बेटी को स्कूल में तंग किया गया। यह आसान नहीं था। फिर भी मैंने किया। मेरी एक बेटी है और मैं नहीं चाहती कि बड़ी होकर उसे अपनी मां के समान समस्या का सामना करना पड़े। मालूम हो कि बोस्निया अपनी अविरल प्रवाह वाली पहाड़ी नदियों और अछूती प्रकृति के लिए मशहूर है। अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां लगभग 70 स्थानिक मछली प्रजातियां व दुनिया की 40% लुप्तप्राय मीठे पानी की मोलस्क प्रजातियां शामिल हैं।

अब अन्य संयंत्रों के खिलाफ लड़ाई :

मैदा को मध्य बोस्निया में दिसंबर 2018 में इस संघर्ष में सफलता मिली। वह अभी भी बाल्कन देश में अन्य प्रस्तावित संयंत्रों के खिलाफ लड़ाई की अगुवाई कर रही हैं।

पुरस्कार समिति ने सराहा :

15 जून को ऑनलाइन आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में पुरस्कार समिति ने मैदा के कामों को सराहा। कहा, ये रोजमर्रा के नायक हमारे ग्रह की रक्षा के लिए लड़ाई में जमीनी स्तर की सक्रियता की शक्ति का प्रदर्शन करते हैं।

प्रशिक्षित अर्थशास्त्री हैं बिलाल

मैदा बिलाल एको बिस्ट्रो नागरिक संघ की सह-संस्थापक व अध्यक्ष हैं। 2017 के अंत में क्रूसिका नदी की रक्षा के लिए इसे बनाया गया था। बिलाल का पालन-पोषण साराजेवो के पश्चिम में पहाड़ों के एक छोटे से गांव क्रुसिका में हुआ था। नदी की रक्षा के अपने काम से पहले उन्होंने वित्त में अंशकालिक काम किया था। अर्थशास्त्र का प्रशिक्षण लिया था।

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