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अपडेट:::समान नागरिक संहिता लागू करने को प्रतिबद्ध : शाह

(सत्येंद्र जैन और श्रद्धा वालकर वाली खबर बदली गई है) केंद्रीय गृहमंत्री ने...

अपडेट:::समान नागरिक संहिता लागू करने को प्रतिबद्ध : शाह
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीThu, 24 Nov 2022 08:10 PM
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(सत्येंद्र जैन और श्रद्धा वालकर वाली खबर बदली गई है)

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, यह जनसंघ के दिनों से ही भाजपा का जनता से वादा

संविधान सभा ने भी संसद और राज्यों को ऐसा कानून बनाने की सलाह दी थी

नई दिल्ली, एजेंसी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि भाजपा सभी लोकतांत्रिक चर्चाओं और बहसों के पूरा होने के बाद देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह जनसंघ के दिनों से ही भाजपा का देश के लोगों से किया गया एक वादा है।

सबके लिए एक कानून हो

गृह मंत्री ने कहा, न सिर्फ भाजपा ने, बल्कि संविधान सभा ने भी संसद और राज्यों को उचित समय आने पर समान नागरिक संहिता लागू करने की सलाह दी थी, क्योंकि किसी भी धर्मनिरपेक्ष देश में कानून, धर्म के आधार पर नहीं होने चाहिए। यदि राष्ट्र और राज्य धर्मनिरपेक्ष हैं तो कानून धर्म पर आधारित कैसे हो सकते हैं। हर धर्म के व्यक्ति के लिए संसद या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित एक ही कानून होना चाहिए।

संविधान सभा की मंशा भुला दी गई

शाह ने दावा किया कि समय बीतने के साथ संविधान सभा की इस प्रतिबद्धता को भुला दिया गया। भाजपा को छोड़कर, कोई भी दल समान नागरिक संहिता के समर्थन में नहीं है। एक लोकतंत्र में स्वस्थ चर्चा जरूरी है। इस मुद्दे पर खुली एवं स्वस्थ बहस किए जाने की आवश्यकता है।

लोकतांत्रिक चर्चा पूरी होने के बाद लागू करेंगे

गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा शासित तीन राज्यों-हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में सर्वोच्च अदालत और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक पैनल गठित किया गया है। पैनल के सामने अलग-अलग धर्मों के लोग इस मुद्दे को लेकर अपनी राय जाहिर कर रहे हैं। हम इस प्रक्रिया में मिलने वाले सुझावों के आधार पर कार्रवाई करेंगे। सभी लोकतांत्रिक चर्चाओं के पूरा होने के बाद भाजपा समान नागरिकता लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करना मेरा अकेले का फैसला नहीं

यह पूछे जाने पर कि क्या जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने का फैसला उनके कार्यकाल का सबसे सफल फैसला था। शाह ने कहा कि कोई भी सफलता उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, क्योंकि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट के एक मंत्री हैं और हर सफलता पूरी सरकार की सफलता है। वर्षों से यह दुष्प्रचार फैलाया जा रहा था कि जम्मू-कश्मीर अनुच्छेद 370 की वजह से भारत का हिस्सा है। अब न तो अनुच्छेद 370 है और न ही 35ए, फिर भी जम्मू-कश्मीर भारत के साथ है।

जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं शून्य पर आईं

गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में एक नई लोकतांत्रिक पीढ़ी तैयार हो रही है, जहां 30,000 से अधिक पंच और सरपंच लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचा रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में 56 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया है और 80 लाख पर्यटक पहुंचे हैं। यह आजादी के बाद से सर्वाधिक है। शाह ने दावा किया कि 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की शुरुआत के बाद से वहां इससे जुड़ी सबसे कम वारदातें हुई हैं। पत्थरबाजी की घटनाएं भी शून्य दर्ज की गई हैं, जो उनकी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्ध है और इसे लेकर कोई दो राय नहीं है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की जड़ें गहरी हैं, लेकिन सरकार इसे पूरी तरह से उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध है।

सत्येंद्र जैन का मंत्री पद पर बने रहना शर्मनाक

गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार के मंत्री के तौर पर आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन के जेल में बने रहने को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजें सार्वजनिक जीवन में अभूतपूर्व हैं। शाह ने कहा, मैं भी जेल गया था और मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में, हमने अदालत में लड़ाई लड़ी और अदालत ने कहा कि यह एक राजनीतिक साजिश थी और मामला फर्जी है। यदि आपके साथ अन्याय हुआ है तो कानून का सहारा लीजिए, या अदालत का रुख करिए। आप इतने शर्मनाक तरीके से कार्य नहीं कर सकते।

जैन को सुविधाएं मिलने पर घेरा

तिहाड़ में जैन को विशेष सुविधाएं मिलने के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि यह जवाब आम आदमी पार्टी को देना चाहिए कि ये वीडियो वास्तविक हैं, या नहीं। यदि वीडियो वास्तविक हैं तो यह आप की जवाबदेही बनती है। उन्हें जेल में बंद अपने मंत्री से कहना चाहिए कि उनके जेल जाने के बाद भी आप उन्हें निलंबित नहीं कर रहे हैं। और जेल में रहते हुए वह इस तरह की सुविधाएं उठा रहे हैं। मुझे इस सवाल का जवाब नहीं देना। वह (जैन) आज भी मंत्री हैं। मैंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में यह कभी नहीं देखा कि एक पार्टी एक मंत्री के जेल जाने पर भी उनका इस्तीफा नहीं ले रही है। जेल में बंद रहने के बाद भी मंत्री पद पर चिपके रहना अभूतपूर्व है। ऐसे मामलों में केंद्र को किसी मंत्री को हटाने की अनुमति देने वाले प्रावधानों के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने भी शायद ऐसी चीजें होने की कल्पना नहीं की थी, इसलिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया।

अन्य मुद्दों पर क्या कहा...

ईडी-सीबीआई के दुरुपयोग पर

चुनाव से पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग से जुड़े सवाल पर शाह ने कहा कि जिस किसी को शिकायत है, वह अदालत का रुख कर सकता है और इस तरह के कदमों को राजनीति के लिहाज से नहीं देखा जाना चाहिए।

श्रद्धा के हत्यारे को कड़ी सजा सुनिश्चित करेंगे

श्रद्धा वालकर हत्याकांड पर गृहमंत्री ने कहा, पूरे मामले पर मेरी नजर है। मैं देश के लोगों को सिर्फ यह बताना चाहता हूं कि जिसने भी यह किया है, दिल्ली पुलिस व अभियोजन पक्ष कानून और अदालतों के माध्यम से कम से कम समय में सख्त सजा सुनिश्चित करेंगे। दिल्ली और मुंबई पुलिस के बीच तालमेल की कोई कमी नहीं है। लेकिन जो चिट्ठी सामने आई है, उसमें दिल्ली पुलिस की कोई भूमिका नहीं है। श्रद्धा ने महाराष्ट्र के एक थाने को चिट्ठी भेजी थी कि उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करने और जान से मारने की धमकी दी जा रही है। वहां पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.. वहां इसकी जांच होगी। उस समय हमारी सरकार नहीं थी। जो भी जिम्मेदार होगा, सख्त कार्रवाई की जाएगी।

2024 लोकसभा चुनाव

गुजरात के आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला है। शाह ने कहा, गुजरात में हम सीटों और वोट प्रतिशत के मामले में सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे। हिमाचल प्रदेश में भी हमारी सरकार दोबारा बनने जा रही है। शाह ने 2024 लोकसभा चुनाव में भी पहले से बड़ी जीत का दावा किया।

अर्थव्यवस्था

इससे पहले, शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को दुनिया के सामने रखा जाए। भारत 2025 तक पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2014 में देश में चार यूनिकॉर्न स्टार्टअप थे। अब यह संख्या बढ़कर सौ के पार चली गई है।

समान नागरिक संहिता पर राज्यों की तैयारी

-उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम, हरियाणा समेत ज्यादातर भाजपा शासित राज्यों ने समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही है।

-उत्तराखंड में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की कमेटी इसका ड्राफ्ट तैयार करने के लिए लगातार बैठकें कर रही है।

-समिति ने विवाह कानून व उम्र, शादी पंजीकरण, धर्म परिवर्तन, बुजुर्गो को बच्चों की प्रापर्टी में हिस्सेदारी, महिला अधिकार जैसे मसलों पर लोगों से सुझाव भी मांगे हैं।

- गुजरात ने भी उच्चस्तरीय कमेटी बनाने की घोषणा की है। राज्य सरकार ने कहा है कि कमेटी के अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे और इसमें 3-4 सदस्य होंगे। यह समिति समान नागरिक संहिता लागू करने का तरीका क्या होगा, इस पर विचार करेगी।

- हिमाचल प्रदेश में चुनाव से पहले सरकार ने वादा किया कि सरकार बनी तो समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी बनाई जाएगी, जिसकी सिफारिशों के आधार पर ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

विधि आयोग क्या कर रहा

करीब चार साल बाद हाल ही में विधि आयोग का गठन किया गया है और कर्नाटक हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी को इसकी कमान सौंपी गई है। आयोग समान नागरिक संहिता पर अध्ययन कर रहा है। नवंबर की शुरुआत में सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि समान नागरिक संहिता पर अध्ययन का काम विधि आयोग को सौंपा गया है। बहुत जल्द इस पर कोई निर्णय लिया जा सकता है।

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