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सावधान : कहीं आपको भी तो नहीं हो रही प्रकृति से एलर्जी

सावधान : कहीं आपको भी तो नहीं हो रही प्रकृति से एलर्जी

संक्षेप:

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस अजीब बीमारी को ‘बायोफोबिया’ कहते हैं ताजी हवा और बाग-बगीचे लोगों

Jan 01, 2026 03:17 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस अजीब बीमारी को ‘बायोफोबिया’ कहते हैं ताजी हवा और बाग-बगीचे लोगों को डराने लगते हैं यह डर कभी-कभी हानिरहित जानवरों से भी हो सकता है लंदन, एजेंसी। कुछ लोगों को घास पर चलने, घने जंगलों में जाने या रेंगने वाले जीवों को देखने से घबराहट, घृणा या डर महसूस होता है। विशेषज्ञ इस स्थिति को ‘बायोफोबिया’ कहते हैं। हाल ही में इस संबंध में स्वीडन स्थित लुंड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक अध्ययन किया है। उन्होंने करीब 196 शोधों की समीक्षा करने के बाद इस विकार के प्रमुख कारणों को दो हिस्सों में बांटा है। बाहरी कारक में मीडिया का असर आता है।

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दरअसल, फिल्में और खबरें अक्सर प्रकृति को खतरनाक दिखाती हैं। शहरों में रहने वाले लोग प्रकृति से इतना कट चुके हैं कि उन्हें हर जंगली चीज से डर लगने लगा है। आंतरिक कारक में ज्ञान की कमी बड़ी वजह है। अध्ययन बताते हैं कि जिन्हें प्रजातियों और पर्यावरण के बारे में कम जानकारी होती है, वे ज्यादा डरते हैं। बचपन का कोई बुरा अनुभव या खराब स्वास्थ्य भी जंगली जानवरों के प्रति डर को बढ़ा देता है। यह केवल एक व्यक्तिगत डर नहीं है, बल्कि इसके बड़े सामाजिक नुकसान भी हैं। ऐसे लोग बाहर जाने से बचते हैं, जिससे वे ताजी हवा और हरियाली से मिलने वाले शारीरिक और मानसिक लाभ नहीं ले पाते। जिन लोगों के मन में डर होता है, वे अक्सर जानवरों को मारने का समर्थन करते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ जाता है। साथ ही, बच्चों और युवा पीढ़ी में प्रकृति के प्रति कम लगाव से पर्यावरण संरक्षण के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं। बॉक्स - कैसे दूर करें परेशानी विशेषज्ञों की मदद से धीरे-धीरे प्रकृति के करीब जाएं। इसकी शुरुआत तस्वीरों से हो सकती है और धीरे-धीरे प्राकृतिक जगहों पर जाने तक बढ़ सकती है। जब लोग यह समझते हैं कि कोई जीव क्यों जरूरी है और वह हमला क्यों करता है, तो उनका डर कम हो जाता है। उन अनुभवों को कम करना, जहां प्रकृति से नुकसान होता हो (जैसे किसानों की फसल बर्बाद होना)। जब नुकसान कम होगा, तो नकारात्मकता भी कम होगी।