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एआई दुनिया में अमीर और गरीब के बीच खाई और बढ़ाएगी : रिपोर्ट

एआई दुनिया में अमीर और गरीब के बीच खाई और बढ़ाएगी : रिपोर्ट

संक्षेप:

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई के लाभ केवल अमीर देशों तक सीमित रहेंगे। जिन देशों में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वहां के लोग पीछे रह जाएंगे। रिपोर्ट ने एआई की तुलना औद्योगिक क्रांति से की है, जिसमें अमीर देशों ने तेजी से विकास किया जबकि गरीब देश पीछे रह गए।

Tue, 2 Dec 2025 03:30 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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यूएन की रिपोर्ट, एआई से ज्यादातर फायदे अमीर देशों को ही मिलेंगे इसकी तुलना औद्यौगिक क्रांति से की गई जब कई पश्चिमी देशों ने तेजी से आधुनिककरण अपनाया, जबकि दूसरे देश पीछे रह गए जहां अभी भी बिजली, इंटरनेट के लिए लोग संघर्ष कर रहे उन समुदायों को कोई लाभ नहीं मिलेगा अमीर देशों में भी डाटा सेंटर के बिजली और पानी की खपत अधिक होने से चिंताएं बढ़ीं बैंकॉक, एजेंसी। एआई का बढ़ता प्रभाव दुनिया में अमीर और गरीब के बीच की खाई को और गहरा कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की नई रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है।

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रिपोर्ट के अनुसार एआई के लाभ केवल अमीर देशों तक ही सीमित रहेंगे। दुनिया भर में लाखों लोग जिनके पास डिजिटल कौशल, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, वे पीछे छूट जाएंगे। औद्यौगिक क्रांति से तुलना संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में एआई की तुलना औद्यौगिक क्रांति के दौर से की गई है। यह दावा किया गया है कि औद्यौगिक क्रांति के दौरान जिस तरह से पश्चिमी देश तेजी से आगे बढ़ गए थे, और बाकी देश पीछे रह गए थे। वैसा ही एआई के दौर में भी होगा। रिपोर्ट यह भी कहती है कि गरीब और विस्थापित लोग एआई के युग में अदृश्य हो सकते हैं, जिससे एआई सिस्टम उनकी जरूरतों को ध्यान में नहीं रखेगा। एआई का ध्यान उत्पादकता पर संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि कंपनियां और दूसरे संस्थान एआई का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह सवाल चिंता का विषय है। एआई पर ज्यादातर ध्यान उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा और ग्रोथ पर है। जबकि जरूरी सवाल यह है कि इसका इंसानी जिंदगी पर क्या असर होगा। जो लोग बुनियादी जरूरतों जैसे बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, यह उनलोगों के लिए बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा बुजुर्गों, युद्ध, संघर्ष तथा आपदाओं की वजह से बेघर हुए लोगों के लिए यह बड़ी समस्या है। एआई में संभावनाएं रिपोर्ट के अनुसार एआई नए उद्योग शुरू करने की क्षमता है। यह तकनीक खेती के लिए बेहतर सलाह, एक्स-रे का तेजी से विश्लेषण, जल्दी मेडिकल निदान, और मौसम पूर्वानुमान जैसी चीजों में ग्रामीण समुदायों और आपदा वाले इलाकों में मदद कर सकती है। एआई कुछ ऐसे काम बदल सकता है या उनकी जगह ले सकता है जो अभी लोग करते हैं। अमीर देशों में भी चिंताएं एआई डाटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली और पानी खाते हैं। इसने अमेरिका जैसे अमीर देशों की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन का ज्यादा इस्तेमाल ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के प्रयासों को धीमा कर सकता है। इसके अलावा एआई से साइबर हमले, डीपफेक (गलत जानकारी फैलाने वाली नकली सामग्री), और निगरानी जैसे खतरे पैदा होते हैं जो गोपनीयता के अधिकारों का उल्लंघन कर सकते हैं। इन देशों को मिलेगा अधिक लाभ चीन, जापान,दक्षिण कोरिया, सिंगापुर जैसे एशियाई देश एआई का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं, जबकि अफगानिस्तान, मालदीव और म्यांमार जैसे देशों में आवश्यक कौशल और बुनियादी ढांचे की कमी है। दुनियाभर में एआई पर निवेश वर्ष निवेश 2014 10 अरब डॉलर 2016 17 अरब डॉलर 2018 43 अरब डॉलर 2020 74 अरब डॉलर 2022 113 अरब डॉलर 2024 151 अरब डॉलर स्रोत: एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 एशियाई देशों में मोबाइल, इंटरनेट की स्थिति मोबाइल फोन उपयोग करनेवाले(आंकड़े प्रतिशत में) महिला पुरुष फिलिपींस 73 72 पाकिस्तान 58 93 इंडोनेशिया 87 91 भारत 71 84 बांग्लादेश 68 85 मोबाइल इंटरनेट उपयोग करनेवाले(आंकड़े प्रतिशत में) महिला पुरुष फिलिपींस 73 73 पाकिस्तान 45 60 इंडोनेशिया 73 71 भारत 39 58 बांग्लादेश 28 42 स्त्रोत: मोबाइल जेंडर गैप रिपोर्ट 2025