महिला दिवस विशेष: दलदल से निकल भर रही सपनों की उड़ान

Mar 07, 2026 04:13 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सब इंस्पेक्टर किरण सेठी ने दी नई जिंदगी नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय 15

महिला दिवस विशेष: दलदल से निकल भर रही सपनों की उड़ान

सब इंस्पेक्टर किरण सेठी ने दी नई जिंदगी नई दिल्ली। अभिनव उपाध्याय15 अगस्त 2012 को जब देश आजादी का जश्न मना रहा था तब जीबी रोड के एक कोठे पर कर्नाटक की रहने वाली दीप्ति (बदला हुआ नाम) की जिंदगी एक कमरे में कैद हो गई। उनको देह व्यापार में धकेल दिया गया। लेकिन संघर्ष, साहस और आत्मसम्मान के साथ खड़ी दीप्ति अब राजधानी में अपने जैसी महिलाओं को काम देने और मुख्य धारा में लाने जज्बे के साथ दिल्ली सड़कों पर ई रिक्शा चला रही है।दीप्ति बताती है कि मैं जो पैसा बचाती हूं उससे बच्चों की परवरिश करती हूं कुछ और बचे पैसों से नया रिक्शा खरीदना चाहती हूं।

ताकि मेरे जैसी और महिलाएं इसे चलाकर जीवनयापन कर सकें। दीप्ति सिंगल मदर हैं और दो बच्चों का पालन भी करती हैं। वह बताती हैं कि यदि आप कुछ बेहतर करने की ठान लें तो अच्छे लोग साथ देने वाले मिल ही जाते हैं। वह दिल्ली पुलिस में कार्यरत सब इंस्पेक्टर किरण सेठी को नई जिंदगी देने के लिए शुक्रिया कहती हैं।कर्नाटक की रहने वाली दीप्ति की कहानी रोंगटे खड़े कर देते वाली है। वह बताती हैं कि पिता बीमार थे इसलिए हमें पैसों की जरूरत थी। एक व्यक्ति ने मुझे दिल्ली में नौकरी देने के वादे के साथ लाया। 30 जुलाई 2012 को मैं दिल्ली आई लेकिन 15 अगस्त 2012 को मुझे जीबी रोड के कोठे पर कैद कर लिया गया। मुझे हिंदी भी भी नहीं आती थी। मैं रोई, चिल्लाई लेकिन मेरी आवाज दीवारों से टकराकर खो गई। रोज मुझे नए ग्राहकों के सामने परोसा जाता। मेरे लिए यह सब नया था। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे साथ कभी ऐसा होगा। उस व्यक्ति ने मुझे यहां महज 40 हजार में बेच दिया था, कोठा मालकिन कहती कि मुझे पैसे लौटा दो और तुम आजाद हो लेकिन 55 हजार लौटाने के बाद भी मैं इस दलदल में ही थी। एक ग्राहक से 2016 में मुझे एक विकलांग बेटा हुआ। मेरे सामने अब दोहरी चुनौती थी। मुझे उसका भी पेट पालना था। 2021 को जब किरण सेठी मैम ने मुझे रेस्क्यू किया और मुझे एक जगह नौकरी पर रखवा दिया छह महीने बाद पता चला कि मैं दूसरी बार मां बनने वाली हूं।मेरी बेटी हुई और मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई। बच्चों को देखकर उम्मीद जगी, मैंने सपने देखे और उसे पूरा करने की ठान ली। मुझे नौकरी में वेतन और पहचान की दिक्कत थी। इसलिए मैंने किरण मैम को अपनी परेशानी बताई उन्होंने मुझे रिक्शा दिलाया और अब मेरे लिए वही मेरी रोजी रोटी है। मैं इस पैसे से अपनी बेटी को बेहतर बनाने के लिए हर कोशिश करूंगी। मेरा सपना बेटी को सेना में भर्ती करना है। बेटा दिव्यांग है इसलिए उसके लिए दिन रात एक चिंता रहती है। मैं अब कई ई रिक्शा खरीदना चाहती हूं और उन महिलाओं को उससे जोड़ना चाहती हूं जो जीबी रोड की दलदल में हैं। मैं चाहती हूं ई रिक्शा उनकी जिंदगी को रफ्तार दे। सम्मान दे।जीबी रोड की सेक्स वर्कर को मुख्य धारा में शामिल करने वाली किरण सेठी बताती हैं कि यह मेरे लिए केवल नौकरी नहीं है यह मेरे लिए समाज के प्रति एक कर्तव्य भी है। हाल ही में एक अन्य महिला को छुड़ाया और आज वह एक बेकरी में काम कर रही है।

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