
पेरिस जलवायु समझौते के दस साल: हरित ऊर्जा में निवेश और नौकरियां बढ़ी
पेरिस जलवायु समझौते के दस साल में हरित ऊर्जा में निवेश और नौकरियां जीवाश्म ईंधन से अधिक हो गई हैं। 140 देशों ने नेट जीरो लक्ष्य घोषित किया है। सौर ऊर्जा की लागत 80% कम हुई है और स्वच्छ ऊर्जा नौकरियां दोगुनी हो गई हैं। जलवायु नीति अब विकास की परिभाषा बन गई है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पेरिस जलवायु समझौते के दस वर्षों में कई क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि कई क्षेत्रों में अभी भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि आज हरित ऊर्जा में निवेश और नौकरियां जीवाश्म ईधन की तुलना में आगे निकल चुकी हैं। पेरिस समझौते के बाद अब तक 140 देश नेट जीरो का लक्ष्य घोषित कर चुके हैं। दुनिया की 90 फीसदी अर्थव्यवस्था आज किसी न किसी रुप में जलवायु से जुड़े कानूनों, प्रावधानों से जुड़ चुकी है। एक दशक पहले सौर पैनल लगाना अमीर देशों का प्रतीक माना जाता था लेकिन आज यह अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इंजन बन चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार 2015 के बाद से स्वच्छ ऊर्जा नौकरियां दोगुनी होकर 1.62 करोड़ तक पहुंच गई हैं, जबकि जीवाश्म ईंधन क्षेत्र की नौकरियां वहीं की वहीं हैं। सौर ऊर्जा की लागत 2014 से 80% घट चुकी है और अब नई बिजली क्षमता का 90% हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आता है। 2025 में रिन्यूबल एनर्जी में निवेश 2.2 खरब डॉलर तक पहुंच गया जो जीवाश्म ईंधन निवेश से दोगुना है। रिपोर्ट के अनुसार जनता के रुख में भी बड़ा बदलाव आ गया है। हर 10 में से 8 लोग सरकार से पवन, सौर और परमाणु ऊर्जा में निवेश के पक्षधर हैं। यूएनईपी की एमिसन गैप रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया अब 2.3–2.5° डिग्री वार्मिंग की राह पर है, जो पिछले साल के 2.6–2.8° डिग्री से थोड़ा कम है, लेकिन 1.5° डिग्री की सुरक्षित सीमा से अब भी बहुत दूर है। लू की संभावना नौ गुना बढ़ा तापमान वृद्धि ने लू की संभावना नौ गुना बढ़ा दी है लेकिन जलवायु नीतियों ने करीब 30 देशों को हर साल 100 अतिरिक्त ‘हॉट डेज’ से बचाया है। कभी जलवायु नीति विकास की राह में ‘अतिरिक्त शर्त’ मानी जाती थी, अब यह खुद विकास की परिभाषा बन रही है। आज 140 से ज्यादा देश, जो 90% वैश्विक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं, नेट जीरों लक्ष्य अपना चुके हैं। जी-20 देशों की भूमिका जी-20 देशों में से 19 ने उत्सर्जन डिस्क्लोजर को अनिवार्य किया है और 14 देशों में क्लाइमेट रिस्क रिपोर्टिंग अब कानून का हिस्सा है। अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और नॉर्वे ने तेल-गैस उत्पादन में 40% की बढ़ोतरी की है। यानी दुनिया की कुल वृद्धि का 90% हिस्सा सिर्फ इन चार देशों से आया है, जबकि बाकी दुनिया ने उत्पादन 2% घटाया है। इन देशों ने 280 अरब डॉलर का क्लाइमेट फाइनेंस दिया पर उनकी तेल-गैस कंपनियों ने 1.3 खरब डॉलर का मुनाफा कमाया।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




