
विदेशों में सुपरमार्केट देखने का बढ़ा क्रेज
साल 2026 में, पर्यटकों का रुख मशहूर ऐतिहासिक स्मारकों और म्यूजियम से हटकर सुपरमार्केट और स्थानीय किराना दुकानों की ओर बढ़ गया है। हिल्टन रिसर्च के अनुसार, 77 फीसदी यात्री छुट्टियों के दौरान ग्रोसरी स्टोर जाते हैं। यहां वे असली स्वाद और संस्कृति का अनुभव कर रहे हैं, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भी लाभ हो रहा है।
वर्जीनिया, एजेंसी। साल 2026 में पर्यटन की दुनिया में एक अनोखा बदलाव आया है। लोग अब मशहूर ऐतिहासिक स्मारकों और भीड़भाड़ वाले म्यूजियम के बजाय दूसरे देशों के सुपरमार्केट और स्थानीय किराना दुकानों में जाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सस्ता और असली अनुभव : हिल्टन रिसर्च के वैश्विक सर्वे के मुताबिक, करीब 77 फीसदी यात्री अब अपनी छुट्टियों के दौरान विदेशों के ग्रोसरी स्टोर जाते हैं। रेस्तरां और म्यूजियम की बढ़ती कीमतों के कारण लोग अब स्थानीय बाजारों का रुख कर रहे हैं। यहां कम बजट में उस देश के असली स्वाद और संस्कृति की झलक मिल जाती है। सोशल मीडिया पर पर लोग स्पेन, जापान और दक्षिण कोरिया के अनोखे स्नैक्स और फ्लेवर वाले ड्रिंक के वीडियो शेयर कर रहे हैं, जो घर पर मिलना मुश्किल है।
‘एयरबीएनबी’ जैसे विकल्पों की वजह से अब लोग खुद भोजन बनाना पसंद करते हैं, जिसके लिए वे लोकल स्टोर से ताजी चीजें खरीदते हैं। घूमने का नया ठिकाना : चाहे जापान के खास ‘बेंटो बॉक्स’ हों या स्पेन के अलग-अलग फ्लेवर वाले चिप, सुपरमार्केट अब सिर्फ सामान खरीदने की जगह नहीं, बल्कि घूमने का नया ठिकाना बन गए हैं। बॉक्स - भारत में ग्रोसरी शॉपिंग की संभावना भारत आने वाले पर्यटक अब स्थानीय मसाले, दालें और क्षेत्रीय स्नैक जैसे भुजिया या मिक्सचर खरीद रहे हैं। वे आयुर्वेदिक प्रोडक्ट, चाय की खास किस्में और चटपटे चिप पसंद करते हैं और इन्हें यादों के तौर पर साथ ले जाते हैं। भारत के सुपरमार्केट अब उनके लिए छोटी-छोटी संस्कृति की झलक दिखाने वाले अनुभव बन गए हैं। इस वजह से स्थानीय उत्पादकों को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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