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 प्रदूषण के चलते पर्यटन स्थलों पर घट रहे पर्यटक

प्रदूषण के चलते पर्यटन स्थलों पर घट रहे पर्यटक

संक्षेप:

---एएसआई के मुताबिक 15 से 20 फीसदी पर्यटकों की संख्या में आई कमी---टूर एंड ट्रैवलर एजेंसियों ने भी कहा, दिल्ली-एनसीआर में कम घूमना पसंद कर रहे हैं पर्यटकनई दिल्ली। राजधानी गैस चैंबर में तब्दील हो गई...

Nov 23, 2025 05:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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---एएसआई के मुताबिक 15 से 20 फीसदी पर्यटकों की संख्या में आई कमी ---टूर एंड ट्रैवलर एजेंसियों ने भी कहा, दिल्ली-एनसीआर में कम घूमना पसंद कर रहे हैं पर्यटक नई दिल्ली। राजधानी गैस चैंबर में तब्दील हो गई है। लोगों को दमघोंटू हवा में सांस लेना मजबूरी बन गई है। प्रदूषण का असर पर्यटन पर भी देखने को मिल रहा है। लाल किला, कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा हो या सफदरजंग का मकबरा यहां देसी-विदेशी सैलानी कम पहुंच रहे हैं। हालांकि, सप्ताहांत होने पर लोग पर्यटन स्थलों पर पहुंचते दिखे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों ने कहा कि पर्यटकों की संख्या में 15 से 20 फीसदी की कमी आई है।

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टूर एंड ट्रैवलर एजेंसियों ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में पर्यटक कम घूमना पसंद कर रहे हैं। अलग-अलग पर्यटन स्थलों से पेश है हिन्दुस्तान टीम की रिपोर्ट:-- प्रदूषण ने रोकी बच्चों की पर्यटन स्थल की सैर स्थान : सफदरजंग का मकबरा समय : एक बजे प्रदूषण के बीच कम लोग ही यहां घूमते नजर आए। यहां अधिक संख्या युवाओं की थी। लेकिन, बच्चे और बुजुर्ग लोग न के बराबर दिखे। टिकट काउंटर पर भी अमूमन रहने वाली भीड़ नदारद थी। दूर से देखने पर मकबरा स्मॉग के बीच ओझल दिखा। एएसआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि देसी पर्यटकों की संख्या में तो बहुत ज्यादा फर्क नहीं आया है। लेकिन, विदेशी पर्यटक कम पहुंच रहे हैं। यहां लोगों की संख्या 900 प्रतिदिन से घटकर 700 प्रतिदिन रह गई है। यहां घूमने आए वरुण ने कहा कि वह परिवार के साथ घूमने आना चाहते थे, लेकिन प्रदूषण के चलते माता-पिता ने आने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल हमारी धरोहर हैं। ऐसे में प्रदूषण को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। --------- प्रदूषण ने बढ़ाई समस्या, तय कार्यक्रम बना आने की वजह स्थान: लाल किला समय: 2 बजे राजधानी के प्रमुख पर्यटक स्थलों में शुमार लाल किला पर पर्यटकों की संख्या में कमी देखी गई। इसकी वजह प्रदूषण और हाल में हुए बम विस्फोट को बताया जा रहा है। आमतौर पर ठंड के समय रविवार को लाल किला खचाखच भरा रहता है। सुनहरी मस्जिद से लाल किला के अंदर तक ई रिक्शा चलाने वाले लालचंद ने बताया कि वे लोग दिनभर में 25 से 30 चक्कर पर्यटकों को लेकर लगाते हैं। लेकिन रविवार होने के बाद भी अभी तक दस चक्कर ही लगा पाए हैं। आंध्रा प्रदेश से विशाखापट्टनम से आए एम लक्ष्मण राव कहते हैं कि उन्होंने टीवी में दिल्ली के प्रदूषण और बम विस्फोट की सूचना मिली थी। लेकिन पहले से कार्यक्रम तय होने की वजह से आना पड़ गया। अगर टिकट रद्द कराते तो काफी नुकसान का सामना करना पड़ता। वह कहते हैं कि थोड़ी दिक्कत हो रही है। वह कहते हैं कि सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और छींक से परेशान हैं। यह हाल उनके साथ आए सभी लोगों का है। गुजरात से परिवार सहित आए भरत पटेल कहते हैं कि टीवी पर प्रदूषण के बारे में सुना था। लेकिन इस कदर दिक्कत होती तो वह नहीं आते। वह कहते हैं कि दिल्ली में आते ही सर्दी, छींक, आंख में जलन, नाक से पानी बहना और सांस लेने में परेशानी हो रही है। उनके साथ आए एक व्यक्ति को नेबुलाइज करने की नौबत तक आ गई थी। वह कहते हैं कि इस प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार को दीर्घकालिक उपाय करने चाहिए। यह दिल्ली की हर साल की दिक्कत हो गई है। फिर कुछ समय बाद सरकारें भूल जाती हैं। लाल किला के चारों तरफ धूल से निपटने के उपाय करने चाहिए। वहीं, लाल किला परिसर के बाहर टूर एंड ट्रवेल्स के मालिक सिकंदर कहते हैं कि प्रदूषण का अच्छा खासा असर कारोबार पर पड़ रहा है। एक माह पहले की तुलना में काम आधा रह गया है। कोट बेल्जियम से हम लोग दिल्ली घूमने आए हैं। लेकिन यहां के प्रदूषणकी वजह से हालात बेहद खराब हैं। पहले से टिकट आदि बुक था इसलिए आना पड़ा। दिल्ली की यात्रा समेट कर भारत के दूसरे हिस्से में पूरी अवधि बीताएंगे। रिचर्ड, बेल्जियम -------- प्रदूषण सीरीज में लाइवः प्रदूषण के चलते छुट्टी के दिन ही रहती है ज्यादा भीड़ स्थानः उग्रसेन की बावली, नई दिल्ली समयः 1.30 बजे प्रदूषण के चलते नई दिल्ली स्थित प्रमुख पर्यटक स्थलों पर भी लोगों की आवाजाही में फर्क पड़ा है। लोकप्रिय पर्यटक स्थलों में शामिल उग्रसेन की बावली में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। यहां पर छुट्टी के दिनों को छोड़कर बाकी दिनों में लोगों की संख्या में कमी आई है। दिल्ली में रविवार को सुबह से ही अच्छी खिली हुई धूप निकली रही। इसके चलते धुंध और स्मॉग में भी पहले की तुलना में कुछ कमी देखने को मिली। इसके चलते उग्रसेन की बावली में रविवार को पर्यटकों की संख्या अच्छी रही। दिन के डेढ़ बजे तक यहां पर आठ सौ के लगभग पर्यटक आ चुके थे। इनमें से दो सौ के लगभग विदेशी पर्यटक शामिल हैं। यहां पर मौजूद कर्मी बताते हैं कि इन दिनों शनिवार और रविवार के दिन ही ज्यादा लोगों की आवाजाही दिख रही है। खासतौर पर अच्छी धूप निकलने पर लोग अच्छी संख्या में आ रहे हैं। सप्ताह के बाकी दिनों में या फिर दिन भर स्मॉग छाए रहने पर लोगों संख्या कम हो जाती है। ---कोट--- पीके फिल्म में उग्रसेन की बावली का सीन देखकर यहां पर घूमने के लिए आया हूं। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण के एक बड़ी समस्या बनी है। सरकार को इसकी रोकथाम के लिए उपाय करना चाहिए। क्योंकि, प्रदूषण के चलते लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। आज अच्छी धूप थी, इसलिए यहां घूमने चला आया। रिषभ, निजी कंपनी में कर्मचारी, नोएडा ——- प्रदूषण से टूरिस्ट ट्रांसपोर्टरों का भी रोजगार ठप हुआ बढ़ते प्रदूषण की वजह से दिल्ली में पर्यटकों की संख्या घटी तो टूरिस्ट ट्रांसपोर्टरों का भी रोजगार 70 फीसदी तक घट गया। अब पर्यटक कम हो जाने की वजह से टूरिस्ट वाहनों की मांग में जबरदस्त गिरावट आई है। वहीं, ग्रैप-3 लागू हो जाने के कारण बीएस-4 वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लग गई है। दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने बताया कि दिल्ली में बीएस-4 वाहनों के प्रवेश पर रोक लग जाने के कारण राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब समेत अन्य राज्यों से रोजाना आने वाली 10 हजार से ज्यादा गाड़ियां दिल्ली में नहीं पहुंच पा रही है। इसके कारण भी दिल्ली में पर्यटकों की संख्या घटी है। इन राज्यों से आने वाले पर्यटक, लालकिला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट, चिड़ियाघर, म्यूजियम, हुमायूं टॉम, लोटस टैंपल, अक्षरधाम मंदिर, शीशगंज गुरुद्वारा में आते हैं, लेकिन अब इनकी संख्या बेहद कम हो गई है। इसकी वजह से न सिर्फ टूरिस्ट ट्रांसपोर्टरों बल्कि टूरिस्ट वाहनों के ड्राइवरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। प्रदूषण के बीच धूप खिलने से साप्ताहांत पर देशी-विदेशी पर्यटकों की लगी लंबी कतार स्थान - लोटस टेंपल समय - दोपहर 12.30 बजे सप्ताहांत पर रविवार को धूप खिलने के बाद पर्यटक प्रदूषण की चिंता न करते हुए काफी संख्या पर लोटस टेंपल घूमने आए। पर्यटकों ने बताया कि धूप की वजह से एक तो ठंड से राहत और प्रदूषण भी थोड़ा बहुत छट गया है। ऐसे में घूमने में ज्यादा परेशानी नहीं है। लोटस टेंपल के बाहर दोपहर में देशी-विदेशी पर्यटकों की इतनी भीड़ उमड़ी कि प्रवेश द्वार से बाहर तक करीब एक किलोमीटर से ज्यादा लंबी कतार लग गई। इस दौरान सुरक्षाकर्मी कतार में लगे लोगों की बकायदा जांच के बाद ही उन्हें परिसर में प्रवेश करने की अनुमति दे रहे थे। पर्यटकों का कहना है कि दिल्ली में खासकर ठंड में घूमने के लिए लोटस टेंपल काफी सुलभ है। नि:शुल्क प्रवेश और हरियाली से भरा परिसर धूप सेंकने से लेकर परिवार के साथ घूमने के लिए इसे काफी बेहतर जगह बना देता है। यहां आए देशी-विदेशी पर्यटकों में छात्र, बुजुर्ग, बच्चे व महिलाएं भी शामिल रहीं। --- कोट --- मैं गुवाहाटी, असम से दिल्ली किसी काम से आया था। काम खत्म करने के बाद अब दिल्ली भ्रमण के लिए निकला हूं। प्रदूषण तो है लेकिन धूप होने से काफी राहत है। धूप खिली देखा तो लोटस टेंपल आ गया। --- रोहित, पर्यटक मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कर रहा हूं। मुझे सप्ताहांत पर ही घूमने-फिरने का मौका मिलता है और आज धूप खिलने के साथ प्रदूषण भी कम लग रहा है इसलिए घूमने आया हूं। --- सूरज, पर्यटक