
देश के शीर्ष लॉ फर्म का महिलाओं पर भरोसा बढ़ा
भारत की प्रमुख लॉ फर्में अब महिलाओं को पार्टनर और सीनियर पार्टनर पदों पर अधिक नियुक्त कर रही हैं। इसका उद्देश्य न केवल समान अवसर प्रदान करना है, बल्कि क्लाइंटों के साथ मजबूत रिश्ते भी बनाना है। पिछले...
मुंबई, प्रियंका गवांडे। भारत की शीर्ष लॉ फर्में अब पार्टनर और सीनियर पार्टनर पदों पर महिलाओं को ज्यादा नियुक्त एवं पदोन्नत कर रही हैं। इसका मकसद केवल शीर्ष स्तर पर समान अवसर सुनिश्चित करना ही नहीं है, बल्कि क्लाइंटों के साथ लंबे समय तक मजबूत और सहयोगी रिश्ते बनाने के लिए बेहतर नेतृत्व सुनिश्चित करना भी है। पार्टनर वकील फर्म के प्रमुख होते हैं। वे बाकी वकीलों का प्रबंधन करते हैं, महत्वपूर्ण क्लाइंटों का ध्यान रखते हैं, नए केस या कार्य लाते हैं और फर्म की रणनीति और वित्त का प्रबंधन करते हैं। पिछले पांच साल में कई फर्मों ने नए पार्टनर पदों पर करीब आधी नियुक्तियां महिलाओं को दी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह लॉ फर्मों की कार्य संस्कृति में एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। डीएमडी एडवोकेट्स की संस्थापक फरेशते सेठना ने कहा, आज अदालतों में महिलाओं की संख्या 20-30 साल पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। यह केवल संख्या नहीं बल्कि उनके आत्मविश्वास और पेशेवर भूमिका की मजबूती का भी संकेत है। शीर्ष स्तर पर समान अवसर सुनिश्चित करने का सबसे असरदार तरीका महिलाओं को वरिष्ठ पदों पर नियुक्त और पदोन्नत करना है। पिछले पांच वर्षों में कॉर्पोरेट, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, रोजगार, दिवालियापन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। महिलाओं के नेतृत्व वाली पार्टनरशिप वाली फर्में क्लाइंट के साथ लंबे समय तक मजबूत संबंध बनाए रख सकती हैं। पिछले पांच वर्ष में ज्यादा बढ़ा भरोसा 1. ट्रिलिगल लॉ फर्म : 44 महिलाओं को प्रमुख पार्टनर पदों पर नियुक्त किया 2. खैतान एंड कंपनी : 75 महिलाओं को पार्टनर पदों पर पदोन्नत किया, 170 पुरुषों को वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किया 3. शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी : सैलरी और इक्विटी पार्टनरशिप में 66 महिलाओं को शामिल किया लॉ फर्मों में कड़ी प्रतिस्पर्धा पिछले तीन-चार साल में लॉ फर्मों में पार्टनरों की भर्ती को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। कई पार्टनर अपनी पूरी टीम के साथ दूसरी फर्मों में चले गए। जुलाई 2024 में जेएसए ने भारत की प्रमुख एंटिट्रस्ट विशेषज्ञ वकील निशा कौर उबेरॉय और उनकी 25 सदस्यीय टीम को ट्रिलिगल फर्म से भर्ती किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम, लचीली नीतियां -कुछ फर्में कर्मचारियों की रणनीति, प्रबंधन और व्यक्तिगत क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही हैं। साथ ही महिलाओं को वरिष्ठ पदों के लिए तैयार करने के लिए मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। -कुछ फर्में माताओं और युवा माता-पिता के लिए लचीली नीतियां लागू कर रही हैं। शार्दुल अमरचंद की श्वेता श्रॉफ चोपड़ा ने कहा, हमने पितृत्व अवकाश तीन सप्ताह तक बढ़ा दिया है और बच्चों के तीन साल तक अतिरिक्त देखभाल अवकाश दिया है। -इसके अलावा हाइब्रिड कार्य (सप्ताह में एक दिन घर से काम), कहीं से भी काम करने की सुविधा (साल में दो सप्ताह) और देखभाल अवकाश (तीन सप्ताह तक) सभी वकीलों के लिए लागू हैं। कोट-1 हम पूरी तरह से क्षमता के आधार पर काम करते हैं, लेकिन हमेशा यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी को बराबर मौके मिलें और काम करने का माहौल सबके लिए समान और सहज हो। आज हमारी फर्म में करीब 51 प्रतिशत वकील महिलाएं हैं। - श्वेता श्रॉफ चोपड़ा, पार्टनर, शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी कोट-2 हमारी फर्म में कुल मिलाकर 46 प्रतिशत लोग अलग-अलग पृष्ठभूमि और अनुभव से आते हैं। पार्टनर स्तर पर यह अनुपात 45 प्रतिशत बनाए रखा गया है। - सुमन रूद्र, चीफ टैलेंट ऑफिस, जेएसए एडवोकेट्स और सॉलिसिटर्स कोट-3 महिलाएं सहयोगी, समझदार और सबको शामिल करने वाला तरीका लेकर आती हैं। हमारी फर्म में पिछले पांच साल में हुई पदोन्नतियों का करीब 40 प्रतिशत महिलाओं को मिला है और वे अब 50 प्रतिशत पदों पर हैं। - अनुप्रिया आनंद, एचआर चीफ, सिरिल अमरचंद मंगलदास

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