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हिंदी न्यूज़ NCR नई दिल्लीलगातार प्रदूषण में रहने से भी मधुमेह का खतरा अधिक

लगातार प्रदूषण में रहने से भी मधुमेह का खतरा अधिक

हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 08:00 PM
लगातार प्रदूषण में रहने से भी मधुमेह का खतरा अधिक

लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहना लोगों को मधुमेह का शिकार बना सकता है। मधुमेह दिवस पर डॉक्टरों ने मधुमेह पीड़ित मरीजों से प्रदूषण को लेकर बेहद सावधानी बरतने को कहा है।

एम्स में मधुमेह पर अध्ययन करने वाले मेडिसिन विभाग के डॉक्टर नवल विक्रम का कहना है कि पीएम-2.5 के कण सांस के जरिए फेफड़े में प्रवेश करते हैं और रक्त में पहुंच जाते हैं। इससे दिल की बीमारी, हाइपरटेंशन, मधुमेह का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने मशहूर जर्नल लेंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि पीएम-2.5 मधुमेह की बीमारी को भी प्रभावित करता है। प्रदूषक पीएम 2.5 रक्त प्रवाह में भी मिलकर यकृत को क्षति पहुंचा सकता है, जिससे मधुमेह होने का खतरा बढ़ता है। पीएम 2.5 शरीर में ऑक्सीकारक तनाव बढ़ाता है। इसकी वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

शुगर के बढ़ते मामलों पर साल 2017 में एक रिपोर्ट आई थी। जिसमें साफ था कि रसायनिक कण, कीटनाशक व हवा में मौजूद सूक्ष्म धातु कण व टेफ्लॉन के कारण हार्मोंस का संतुलन बिगड़ रहा है। उर्वरक में पाया जाने वाला परकोलरेट थियोसायनेट भी हार्मोंस ग्रंथियों को प्रभावित करता है। इससे मधुमेह की समस्या बढ़ती है। साथ ही व्यायाम और क्रियाशीलता में कमी के कारण टाइप 2 डाइबिटीज होने का खतरा बढ़ रहा है।

विश्व स्वाथ्य संगठन के अनुसार प्रदूषण के कारण दुनिया भर में करीब 42 लाख लोगों की असमय मौत होती है। आइसीएमआर द्वारा वर्ष 2018 में जारी एक आंकड़े के अनुसार देश में प्रदूषण के कारण करीब 12.40 लाख लोगों की मौत होती है। इसके मद्देनजर यहां भी वायु गुणवत्ता के मानकों को सख्त करने की पहल शुरू हो गई है।

30 साल से अधिक के हैं तो शुगर जांच कराएं

डॉक्टर नवल विक्रम ने बताया कि बड़ी संख्या में मरीज ऐसे हैं, जिन्हें यह नहीं पता होता कि उन्हें मधुमेह की समस्या हो चुकी है। ऐसे में 30 वर्ष से उपर के लोग की ब्लड शुगर और उच्च रक्तचाप की जांच जरूर कराएं। जीवनशैली में बदलाव लाएं और व्यायाम करें लेकिन प्रदूषित इलाकों में तेज कसरत से बचें।

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