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षड़यंत्र के तार कई देशों तक फैले, तुर्किये व दुबई तक पहुंचे हैंडलर

षड़यंत्र के तार कई देशों तक फैले, तुर्किये व दुबई तक पहुंचे हैंडलर

संक्षेप:

दिल्ली में लालकिले पर हुए धमाके की साजिश के तार पाकिस्तान, तुर्किये और दुबई तक फैले हैं। एनआईए की जांच में फरीदाबाद मॉड्यूल के सदस्यों का जैश ए मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद से संपर्क का खुलासा हुआ है। इनका विदेशी हैंडलर दक्षिण कश्मीर का डॉ. मुजफ्फर अहमद राथर बताया जा रहा है।

Nov 12, 2025 09:37 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। लालकिले पर हुए धमाके की साजिश के तार कई देशों तक फैले हैं। एजेंसियों की जांच में कड़ियां पाकिस्तान के साथ तुर्किये व दुबई तक पहुंच रही हैं। बांग्लादेश और नेपाल रूट के जरिए अमोनियम नाइट्रेट आने की बात सामने आई है। एनआईए का यह अभी तक का सबसे बड़ा हंट हो सकता है। देश के अलग अलग राज्यों के साथ विदेश में भी अलग अलग देशों से माड्यूल के तार जुड़ रहे हैं। फरीदाबाद मॉड्यूल के सदस्यों का संपर्क प्रतिबंधित संगठन जैश ए मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद से होने का खुलासा हुआ है। जबकि इन संगठनों के हैंडलर से निर्देश मिलने की जानकारी का खुलासा हुआ है।

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दिल्ली धमाके की जांच नेशनल जांच एजेंसी(एनआईए) का एक बड़ा हंट हो सकता है। एनआईए की दस सदस्यीय टीम इसकी जांच के लिए लगाई गई है। अलग अलग राज्यों में लगातार साजिशकर्ताओं की धरपकड़ के लिए कार्यवाही चल रही है। प्रारंभिक तफ्तीश में इनके विदेशी हैंडलर से लगातार संपर्क होने की जानकारी मिली है। और वह हैंडलर भी कोई और नहीं, बल्कि इसी मॉड्यूल का एक फरार संदिग्ध दक्षिण कश्मीर के वानपोरा काजीगुंड का निवासी डॉ. मुजफ्फर अहमद राथर के जरिये है। वह संदिग्ध यूपी के सहारनपुर में गिरफ्तार किए गए फरीदाबाद मॉड्यूल के आतंकी डॉ. आदिल अहमद राथर का भाई है। मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद यह पता चला कि डॉ. मुजफ्फर यहां से भागकर दुबई गया था, जहां से उसने अपना ठिकाना पाकिस्तान बनाया था। सूत्रों की मानें तो उसके जरिये ही सीमापार के आका से इस मॉड्यूल को निर्देश मिलते थे, जिसपर डॉ. मुजम्मिल व डॉ. उमर आगे की रणनीति बनाते थे। क्योंकि ये दोनो ही मॉड्यूल के मुख्य ऑपरेटर थे। हालांकि यह माना जा रहा है कि इन दोनों की विदेशी हैंडलर से पहली मुलाकात तुर्किए में होने का भी शक जताया जा रहा है। क्योंकि एजेंसियों को इनके तुर्किए जाने की जानकारी मिली है। इसके बाद ये अपने नेटवर्क का विस्तार करने लगे थे और विदेश से मिले निर्देश पर अलग-अलग जगहों पर विस्फोटक व हथियार जुटाने के साथ अपना पैर पसारने लगे थे। क्या है मॉड्यूल का तुर्किये कनेक्शन एजेंसियों की जांच के दौरान इस मॉड्यूल का जो तुर्किए कनेक्शन भी सामने आया है। उसके मुताबिक मॉड्यूल के गिरफ्तार दो संदिग्ध डॉ. उमर और डॉ.मुजम्मिल के पासपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि इन दोनों ने टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ने के तुरंत बाद वर्ष 2021 में तुर्किये की यात्रा की थी। दौरे के दौरान इन लोगों ने आतंकी संगठन जैश-ए- मोहम्मद के लोगों से मुलाकात की और आगे की योजना बनाई। क्योंकि तुर्किए से लौटने के बाद दोनों डॉक्टरों ने देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय होने की योजना बनाई थी। दरअसल जैश हैंडलर ने उन्हें निर्देश दिया था कि मॉड्यूल के सदस्य देशभर में अपना नेटवर्क फैलाएं। क्योंकि किसी एक जगह पर फोकस करने पर ये एजेंसियों की पकड़ में आ सकते हैं। तुर्किये से लौटने के बाद ही डॉ. उमर ने अमोनियम नाइट्रेट और दूसरे विस्फोटक को अल फलाह यूनिवर्सिटी में एकत्र करना शुरू किया था।