दावा: ठंडी नाक से पता चलता है तनाव
संक्षेप: ससेक्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का अनोखा शोध 29 लोगों को पर किया गया

ससेक्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का अनोखा शोध 29 लोगों को पर किया गया शोध नाक का तापमान और मानसिक दबाव ससेक्स, एजेंसी। जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारी नाक का तापमान गिर जाता है। यह बात वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक से साबित की है। इस तकनीक में थर्मल कैमरे का इस्तेमाल किया गया, जो शरीर से निकलने वाली गर्मी को माप सकते हैं। इस शोध के लिए ब्रिटेन के ससेक्स विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिकों ने एक ऐसा प्रयोग किया, जिसमें 29 लोगों को जानबूझकर तनाव भरी स्थिति में डाला गया। इनसे बिना तैयारी के तीन अजनबियों के सामने 5 मिनट का भाषण देने को कहा गया।
इस दौरान उनके चेहरे पर थर्मल कैमरा लगा था, जिससे तनाव के समय नाक का तापमान गिरना रिकॉर्ड किया गया। कई लोगों की नाक का तापमान 3 से 6 डिग्री तक गिरा। तनाव के कारण शरीर रक्त प्रवाह को आंखों और कानों की ओर भेजता है, ताकि खतरे को बेहतर समझा जा सके। इसलिए नाक में खून कम पहुंचता है और वह ठंडी हो जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि नाक का तापमान तनाव मापने का एक सटीक तरीका हो सकता है। खास बात यह है कि यह तरीका पूरी तरह सुरक्षित है, यानी किसी दवाई या इंजेक्शन की जरूरत नहीं। यह तकनीक उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है जो अपनी बात जाहिर नहीं कर सकते, जैसे कि बच्चे, बीमार, बुज़ुर्ग या मानसिक रूप से असहाय लोग। शोधकर्ताओं ने बताया कि तनाव से नाक का ठंडा होना, शरीर के अंदर के बदलावों का संकेत देता है। यह भी देखा गया कि तनाव से उबरने में किसी को कितना समय लगता है, यह पता चलता है कि वो व्यक्ति तनाव को कितनी अच्छी तरह संभाल पाता है। यह तकनीक दिखाती है कि मानव और जानवर, दोनों की मानसिक स्थिति को बिना कुछ कहे समझा जा सकता है। सिर्फ चेहरे की गर्मी देखकर यह पता लगाया जा सकता है कि कोई तनाव में है या नहीं। शायद भविष्य में यह तकनीक स्कूलों, अस्पतालों और चिड़ियाघरों में भी उपयोग की जा सकेगी, जहां किसी के मानसिक तनाव को बिना पूछे ही पहचाना जा सकेगा और समय पर मदद दी जा सकेगी। बॉक्स - जानवरों पर भी असर इस तकनीक को अब प्राइमेट्स यानी वानरों पर भी आजमाया जा रहा है। शोधकर्ता अब चिम्पांजी और गोरिलों के अभयारण्यों में थर्मल कैमरों से उनके तनाव की निगरानी कर रहे हैं। शोध में पाया गया कि जब वयस्क चिम्पांज़ी को छोटे चिम्पांजी खेलते हुए दिखाए गए, तो उनकी नाक गर्म हो गई, यानी तनाव कम हुआ। इससे पता चलता है कि दृश्य अनुभव भी जानवरों के तनाव को कम करने में मददगार हो सकते हैं। इस शोध का उद्देश्य जानवरों को नए वातावरण और सामाजिक समूहों में आसानी से ढलने में मदद करना है, खासकर उन जानवरों के लिए जिन्हें पहले दर्दनाक परिस्थितियों से बचाया गया हो।

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