
टीएमसी से निलंबित हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी बनाई
मुर्शिदाबाद के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'जनता उन्नयन पार्टी' की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह पार्टी आम आदमी के हित में काम करेगी। कबीर ने 2026 के चुनाव के लिए आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी भी तय किए हैं। टीएमसी और भाजपा ने उनके इस कदम की आलोचना की है।
मुर्शिदाबाद, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है। कबीर ने अपने दल का नाम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ रखा है। सोमवार को पार्टी की घोषणा करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि पार्टी का गठन आम आदमी के हित में काम करने के लिए किया है। हुमायूं कबीर तब चर्चा में आ गए थे, जब उन्होंने छह दिसंबर को मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ बनाने के लिए शिलान्यास किया था। इससे कुछ दिन पहले बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा करने के बाद टीएमसी ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। हालांकि, कबीर ने कहा था कि वह कुछ भी असंवैधानिक नहीं कर रहे हैं।
संविधान ही उन्हें मस्जिद निर्माण की इजाजत देता है। कबीर के इस कदम की संघ, भाजपा समेत कई संगठनों ने आलोचना भी की थी। तब हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में संघ के विस्तार में मदद कर रही हैं। आठ सीटों पर प्रत्याशी भी तय किए हुमायूं कबीर ने पार्टी की घोषणा के साथ ही 2026 के चुनाव के लिए आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी भी तय कर दिए। बताया कि वह स्वयं रेजीनगर और बेलडांगा सीटों से चुनाव लड़ेंगे। कबीर ने दावा किया कि वह दोनों सीटों से जीत दर्ज करेंगे। यही नहीं, उन्होंने टीएमसी को उन्हें हराने की चुनौती भी दे डाली। भाजपा बोली टीएमसी को मदद की कोशिश हुमायूं कबीर की नई पार्टी को लेकर भाजपा और टीएमसी एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि कबीर टीएमसी को दोबारा जीत दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। कहा कि कबीर और उनकी मित्र पार्टी टीएमसी दोनों ही इस चुनाव में हार का सामना करेंगी। वहीं, टीएमसी प्रवक्ता जयप्रकाश मजूमदार ने कहा कि ऐसे दल पहले भी बनते रहे हैं और डूब गए हैं। कहा कि कबीर की यह पार्टी सिर्फ एक सांप्रदायिक उकसावा है। टीएमसी, भाजपा, कांग्रेस सब जगह रहे कबीर हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल में सभी प्रमुख दलों में रह चुके हैं। वह टीएमसी में थे, जब 2015 में उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था। उस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए थे। 2016 में उन्होंने रेजीनगर से निर्दलीय चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस से हार गए। चुनाव के बाद वह कांग्रेस में चले गए, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में चले गए। भाजपा ने उन्हें मुर्शिदाबाद से प्रत्याशी भी बनाया, लेकिन वह तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद वह फिर टीएमसी में चले गए और 2021 में पार्टी के टिकटपर भरतपुर से विधायक का चुनाव जीते।

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