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सुरेश कलमाड़ी का निधन:: विवादों से भी रहा नाता

सुरेश कलमाड़ी का निधन:: विवादों से भी रहा नाता

संक्षेप:

सुरेश कलमाड़ी एक कुशल प्रशासक थे, जिन्होंने भारतीय वायु सेना में सेवा की और बाद में राजनीति में कदम रखा। उन्होंने कई प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं की मेज़बानी की, लेकिन 2011 में राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना किया। हालाँकि, उन्हें बाद में क्लीन चिट मिल गई।

Jan 06, 2026 05:26 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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वायु सेना के पायलट से लेकर भारत के अग्रणी खेल प्रशासक तक नई दिल्ली, एजेंसी। सुरेश कलमाड़ी बेहद कुशल प्रशासक थे लेकिन इसके साथ ही उनका विवादों से भी नाता रहा और उन्हें हमेशा आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कलमाड़ी का प्रोफाइल जन्म: 1944, मद्रास (अब चेन्नई) -पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में पढ़ाई -1964 से 1974 तक भारतीय वायु सेना में सेवा की। स्क्वाड्रन लीडर के रूप में सेवानिवृत्त होने से पहले वायुसेना में पहले कमीशन पायलट के रूप में और फिर एक प्रशिक्षक के रूप में काम किया। राजनीतिक सफर शरद पवार की नजर उन पर पड़ी और उसके बाद उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ।

उन्हें पुणे युवा कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने संजय गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए। -1982, 1988, 1994 और 1998 में राज्यसभा के लिए चुने गए। -राज्यसभा सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वह 1995 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रेल राज्य मंत्री भी रहे। -कलमाड़ी 1996 में पुणे से लोकसभा के लिए चुने गए थे, लेकिन अगले आम चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। - 2004 और 2009 के चुनावों में जीत हासिल करके शानदार वापसी की। भारत में कई प्रमुख प्रतियोगिताएं करवाईं -कलमाड़ी के नेतृत्व में भारत ने कई प्रमुख प्रतियोगिताओं की मेजबानी की -2003 के एफ्रो एशियाई खेल -2008 में राष्ट्रमंडल युवा खेल -2010 के राष्ट्रमंडल खेल -1989 और 2013 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार के आरोप -आईओए प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल 1996 से 2011 तक चला। -वर्ष 2011 में उन पर राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि पिछले साल अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी। सफलता -आईओए के प्रमुख के रूप में उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक राष्ट्रीय खेलों को पुनर्जीवित करना था। उनके अध्यक्ष रहते हुए पुणे, बेंगलुरु, चंडीगढ़, हैदराबाद और मणिपुर सहित विभिन्न स्थानों पर नियमित अंतराल पर राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन किया गया। -भारतीय एथलेटिक्स से बेहद करीब से जुड़े रहे तथा 1987 से 2006 तक 19 वर्षों तक भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के अध्यक्ष भी रहे। -1989 से 1998 तक दिल्ली में आयोजित आठ प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रैक और फील्ड सितारों को बुलाने में सफल रहे। पुणे अंतरराष्ट्रीय मैराथन के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो भारतीय एथलेटिक्स कैलेंडर का अहम हिस्सा बन गया। -नई दिल्ली ने उनके नेतृत्व में 1989 में देश के इतिहास में पहली बार एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मेजबानी भी की थी। वह 2001 में एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने 1990 में एशियाई ग्रां प्री एथलेटिक्स प्रतियोगिता की शुरुआत की। -2004 में नयी दिल्ली में विश्व हाफ मैराथन का आयोजन भी किया। -ओलंपिक खेलों के बारे में जागरूकता लाने में उनकी भूमिका के लिए 2008 में बीजिंग में राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के संघ (एएनओसी) पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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