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पूर्व केंद्रीय मंत्री और आईओए के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे सुरेश कलमाड़ी का निधन

पूर्व केंद्रीय मंत्री और आईओए के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे सुरेश कलमाड़ी का निधन

संक्षेप:

81 वर्षीय कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का निधन हो गया। वह भारतीय ओलंपिक संघ के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे और खेल प्रशासन में एक प्रभावशाली हस्ती माने जाते थे। कलमाड़ी का जन्म 1944 में हुआ था और उन्होंने कई महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम किया। उनके निधन पर नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।

Jan 06, 2026 05:15 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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81 साल की उम्र में ली अंतिम सांस आईओए के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे कलमाड़ी पुणे, एजेंसी। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार को निधन हो गया। कलमाड़ी भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे, वे अनुभवी खेल प्रशासक माने जाते थे। 81 साल की उम्र में उन्होंने मंगलवार तरके करीब 3.30 बजे अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। दो दशक से भी अधिक समय तक अलग-अलग भूमिकाओं में वे रहे। उन्होंने रेल राज्य मंत्री के रूप में काम किया था और भारतीय ओलंपिक संङ के पूर्व अध्यक्ष रहे।

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भारतीय खेलों पर उनके दबदबे से सफलता और घोटाले दोनों हुए। कलमाड़ी के परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और बहू, दो विवाहित बेटियां और दामाद, साथ ही पोते-पोतियां शामिल हैं। खेल प्रशासन में प्रभावशाली हस्ती रहे कलमाड़ी भारतीय खेल प्रशासन में एक प्रभावशाली हस्ती रहे। उन्होंने ने 1996 से 2011 तक आईओए के अध्यक्ष के रूप में काम किया। वह देश की सर्वोच्च खेल संस्था का लंबे समय तक अध्यक्ष बने रहने वाले व्यक्तियों में से एक बन गए। 1944 में जन्म, वायुसेना पायलट थे कलमाड़ी का जन्म 1944 में हुआ था। उन्होंने भारतीय वायु सेना में लड़ाकू पायलट के रूप में अपना पेशेवर जीवन शुरू किया तथा राजनीति और खेल प्रशासन में प्रवेश करने से पहले 1965 और 1971 के युद्ध का हिस्सा रहे थे। उन्होंने कांग्रेस नेता के रूप में कई बार लोकसभा में पुणे का प्रतिनिधित्व किया और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं में विभिन्न पदों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कलमाड़ी 1982 में संसद आए थे। उन्होंने पीवी नरसिम्हा राव सरकार में 1995 से 1996 तक रेल राज्य मंत्री के रूप में काम किया। वह एकमात्र रेल राज्य मंत्री थे जिन्होंने रेल बजट पेश किया था। उनके कार्यकाल के दौरान, पुणे रेलवे डिवीजन की स्थापना हुई और शहर से कई लंबी दूरी की ट्रेनें शुरू की गईं। आईओए के अध्यक्ष के रूप में प्रभाव आईओए के अध्यक्ष के रूप में कलमाड़ी का उस दौर में बहुत अधिक प्रभाव था जब भारतीय खेल वैश्विक स्तर पर अपनी जीवंत उपस्थिति दर्ज कराने के प्रयास में लगे हुए थे। उन्होंने एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और विश्व एथलेटिक्स की सर्वोच्च संस्था (तब आईएएएफ) की परिषद के सदस्य भी रहे, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सबसे शक्तिशाली खेल प्रशासकों में से एक बन गए। उनके कार्यकाल में भारत ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की जब निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने देश का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में अहम भूमिका दिल्ली में 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह इन खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। कलमाड़ी ने पुणे में एथलेटिक्स और खेल अवसंरचना के विकास में भी अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयास से ही पुणे अंतरराष्ट्रीय मैराथन शुरू हुई थी जो भारतीय एथलेटिक्स के कैलेंडर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि कलमाड़ी के निधन पर उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और स्थानीय सांसद मुरलीधर मोहोल सहित सभी पार्टियों के नेताओं ने कर्वे रोड स्थित कलमाडी के आवास पर जाकर श्रद्धांजलि दी। कलमाडी का अंतिम संस्कार दोपहर में नवी पेठ के वैकुंठ श्मशान घाट पर किया गया। देश ने अनुभवी नेता खो दिया एनसीपीएसपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश ने एक अनुभवी नेता खो दिया है जो संघर्षों से बने थे और सार्वजनिक जीवन की एक लंबी विरासत रखते थे। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ नेता जो दशकों तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और देश के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों पर अपनी अलग छाप छोड़ी, कलमाडी को गहरे सम्मान के साथ याद किया जाएगा। पुणे फेस्टिवल और पुणे इंटरनेशनल मैराथन जैसी पहलों के माध्यम से, उन्होंने पुणे को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने शोक संदेश में, अजीत पवार ने कहा कि कलमाड़ी ने पुणे के विकास में अहम भूमिका निभाई, और उनके निधन से शहर के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में एक खालीपन आ गया है।